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Written By: Atul Modi | Updated : March 29, 2024 7:58 PM IST
दूध के ऊपर जमी मोटी मलाई की परत देखकर हर किसी के मुंह में पानी आ जाता है। दरअसल, भारतीयों में दूध की मलाई (Doodh Ki Malai) खाने की परंपरा सदियों पुरानी रही है। वहीं दूध की मलाई खाने की बात आयुर्वेद में भी कही गई है। दूध की मलाई को आयुर्वेद में 'सन्तनिका' कहा गया है। जब गर्म दूध ठंडा हो रहा हो तो सतह पर बनी मलाई को सन्तनिका कहते हैं। आयुर्वेद में दूध की मलाई को औषधि के रूप में दर्शाया गया है, इसके कई स्वास्थ्य लाभ है यह कई प्रकार की बीमारियों को ठीक करने में भी उपयोगी है। मैत्रेय आयुर्वेद आश्रम, उडुपी (कर्नाटक) और करुणामई किरण आरोग्य आश्रम, गोवर्धन (मथुरा) के चेयरमैन डॉक्टर तन्मय गोस्वामी (एमडी-आयुर्वेद) ने अपने एक इंस्टाग्राम पोस्ट के माध्यम से दूध की मलाई या सन्तनिका के फायदे और नुकसान (Health Benefits & Side Effects of Milk Cream) के बारे में जानकारी दी है।
डॉ तन्मय गोस्वामी ने दूध की मलाई को बहुत ही उपयोगी बताया है। वह कहते हैं कि ''दूध की मलाई का सेवन करने से न सिर्फ शरीर को ताकत मिलती है बल्कि यह कई रोगों को ठीक करने में भी मददगार है। योग रत्नाकर में सन्तनिका के बारे में विस्तार से बताया है।''
डॉक्टर तन्मय के मुताबिक, दूध की मलाई का सेवन पुरुषों को जरूर करना चाहिए। यह उनके लिए बहुत ही फायदेमंद है। सन्तनिका का पुरुषों के शरीर में वीर्य को बढ़ाती है, जिससे उनके यौन स्वास्थ्य में सुधार होता है, हालांकि इसका सेवन रात्रि में ही किया जाना अच्छा होता है।
जिन व्यक्तियों के रक्त में पित्त और विषाक्त पदार्थ बढ़ गए हैं उनके लिए सन्तनिका या दूध की मलाई किसी औषधि से कम नहीं है। यह रक्त में मौजूद पित्त और टॉक्सिन या विषाक्त पदार्थों को खत्म कर देती है। जिसके कारण रक्त संबंधी समस्याएं, एलर्जी और अन्य तमाम प्रकार की विकृतियों से छुटकारा मिलता है।
आयुर्वेद में शरीर के वायु को बैलेंस करना जरूरी बताया गया है, क्योंकि वायु के विकृत होने पर शरीर में तमाम तरह के रोग उत्पन्न होने लगते हैं। ऐसे में जिन लोगों को वायु संबंधी विकार है या वायु को बैलेंस में रखना है तो उनके लिए दूध की मलाई सहायक सिद्ध हो सकती है। यह रोगों को ठीक करने में भी मदद करती है।
डॉ तन्मय कहते हैं कि, दूध की मलाई का सेवन फायदेमंद तो है, लेकिन ज्यादा फायदे के चक्कर में इसकी अधिक मात्रा नुकसानदायक सिद्ध हो सकती है, इसलिए दूध की मलाई को हमेशा सीमित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए, क्योंकि अधिक मात्रा में मलाई को पचा पाना थोड़ा मुश्किल होता है।
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(डिस्क्लेमर: यह लेख जागरूकता के लिए है, यदि आप किसी रोग के उपचार के लिए दूध की मलाई का सेवन करने पर विचार कर रहे हैं तो एक बार अपने आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह जरूर लें।)