
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : March 28, 2025 3:51 PM IST
गर्मियां आते ही बहुत से घरों में मिट्टी के घड़े या मिट्टी के मटके (Earthen pot) का इस्तेमाल शुरू किया जाता है। गर्मियों में मिट्टी के मटके में रखा पानी पीने से (Matke ka pani peene se kya hota hai?) गर्मी से राहत मिलती है। इसी तरह फ्रिज की तुलना में मटके का ठंडा पानी पीना स्वास्थ्य के लिहाज से भी अच्छा माना जाता है। लेकिन, मटके में पानी स्टोर करने और मटके का पानी पीने से पहले कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए वर्ना यह आपकी हेल्थ को फायदे की बजाय नुकसान पहुंचा सकता है।
दरअसल, मटके में रखा पानी मटके को बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मिट्टी और अन्य चीजों के गुण अपना लेता है। इसीलिए, मटके का रखरखाव सही तरीके से करना चाहिए। आइए जानते हैं कि मटके का पानी पीने से पहले किस तरह की बातों का ध्यान रखना चाहिए।
मौसम बदलने के साथ ही अगर गर्मियों में ठंडा पानी पीने के लिए आप घड़े का पानी पीते हैं तो मटका लाने के बाद ही आप मटके की साफ-सफाई अच्छी तरह करें। दरअसल, मिट्टी से बने घड़े में कई तरह के बैक्टेरिया होते हैं। अगर आप घड़े को घर लाने के बाद इसमें पानी भरकर रख देते हैं तो यह बीमारियों और इंफेक्शन का खतरा बढ़ा सकता है। ऐसे में आप मटके को अच्छी तरह साफ करने के बाद ही उसमें पानी रखें।
मटके की सफाई करने के लिए बेकिंग सोडा को गुनगुने पानी में घोल कर पेस्ट (Baking soda in warm water) बना लें। इससे, मटके को अच्छी तरह इस पेस्ट से साफ करें और फिर सादे पानी से मटका साफ करें।
मटके में पानी भरने के बाद उसे नियमित बदलते रहें। कई-कई दिनों तक मटके में रखा हुआ पानी नहीं पीना चाहिए। इसीलिए, मिट्टी के मटके का पानी रोज बदलते रहें।
मिट्टी के बर्तनों और मटके का पानी पीने का सबसे बड़ा फायदा यही है कि मिट्टी में केमिकल्स का इस्तेमाल नहीं होता। इस तरह मिट्टी के बर्तन में स्टोर किया गया पानी केमिकल-फ्री (Chemical free water) और सुरक्षित (Safe drinking water) होता है। जिससे बीमारियों का खतरा भी कम होता है। इसके साथ ही आपकी हेल्थ को इस तरह के भी कई फायदे मिल सकते हैं-
Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।