क्या चाय में चीनी की बजाय देसी खांड डालना सेहत के लिए फायदेमंद है? लेकिन इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी

Desi Khand ke Fayde चाय का जरूरत से ज्यादा सेवन अच्छा विकल्प नहीं माना जाता है और खासतौर पर चाय में जितनी चीनी होगी उसे उतना ही अनहेल्दी माना जाएगा। लेकिन क्या चाय में चीनी की बजाय देसी खांड का इस्तेमाल किया जा सकता है?

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Written By: Mukesh Sharma | Published : December 17, 2025 4:10 PM IST

Desi Khand Kya Hota Hai: हम भारतीय चाय को कभी ना नहीं करते और जो चाय पीने से मना करते हैं तो हम उन्हें भारतीय नहीं समझते। चाय वो भी खूब चीनी के साथ और दूध वाली। हम भारतीयों की नींद ही आंख ही चाय पीने के चक्कर में खुलती है और जब थकान हो तब भी चाय पीने का ही मन करता है। लेकिन चाय आपके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक मानी जाती है और ऐसा होने का एक कारण है चाय में रिफाइंड शुगर यानी चीनी का इस्तेमाल। लेकिन अगर चाय में चीनी की बजाय कोई हेल्दी विकल्प है, तो चाय को भी थोड़ा हेल्दी बनाया जा सकता है। आजकल लोग रिफाइंड चीनी के नुकसान जानकर चाय से भी दूरी बनाने लगे हैं। ऐसे में क्यों न आप चाय से दूरी बनाने की जगह कुछ हेल्दी विकल्पों की तलाश करें। देसी खांड ऐसा ही एक हेल्दी विकल्प है, जिसे आजकल बहुत से लोग चाय में इस्तेमाल कर रहे हैं। कहते हैं कि देसी खांड न सिर्फ चाय का स्वाद बढ़ा देता है, बल्कि चीनी की तुलना में यह एक अच्छा विकल्प भी माना जाता है।

क्या होती है देसी खांड?

देसी खांड गन्ने के रस से बनाई जाती है, लेकिन इसे चीनी के तरह पूरी तरह रिफाइंड नहीं किया जाता। इसमें गुड़ जैसे कुछ प्राकृतिक मिनरल्स और पोषक तत्व बचे रहते हैं, इसलिए इसका रंग हल्का भूरा होता है और स्वाद रिफाइंड चीनी की तुलना में थोड़ा सा अलग होता है। आजकल लोग फिटनेस को लेकर जागरूक हैं और देसी खांड एक ऐसा 'स्मार्ट स्विच' है, जो आपकी लाइफस्टाइल को बिना डिस्टर्ब किए आपको हेल्दी बनाता है।

(और पढ़ें - चीनी की बजाय देसी खांड के फायदे)

हड्डियों को मिलेगी मजबूती

देसी खांड कैल्शियम, फास्फोरस और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स से भरपूर होती है और हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करती है। इसके नियमित और सीमित सेवन से शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है और आप स्वस्थ रहते हैं। इसलिए जब भी आप चाय पीते हैं तो उसमें चीनी की बजाय अगर देसी खांड का इस्तेमाल किया जाए तो यह हेल्दी विकल्प हो सकता है।

खून की कमी नहीं होगी

देसी खांड में आयरन की मौजूदगी होती है, जो एनीमिया से जूझ रहे लोगों के लिए बेहतर विकल्प साबित होती है। माना जाता है कि यह हीमोग्लोबिन बढ़ाने में सहायक है, खासकर जब इसे संतुलित आहार के साथ लिया जाता है। इसलिए ऐसा समझने की गलती न करें कि सिर्फ देसी खांड से बनी चाय पीने से ही शरीर में खून की पूर्ति होती रहेगी। अगर आपको एनीमिया के लक्षण हो रहे हैं, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

पाचन और ऊर्जा में सहायक

देसी खांड शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा देती है, जबकि रिफाइंड चीनी तेजी से ऊर्जा दे देती है। इससे अचानक शुगर स्पाइक होने की संभावना बढ जाती हैं, वहीं देसी खांड से शुगर स्पाइक होने की संभावना कम होती है और पाचन पर भी इसका असर अपेक्षाकृत हल्का होता है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को पाचन से जुड़ी समस्याएं हैं, तो चीनी की बजाय देसी खांड की चाय पीना फायदेमंद हो सकता है।

इस बात का रखें ध्यान

मार्केट से मिलने वाली कुछ देसी खांड रिफाइंड प्रोसेस से नहीं बनाई होती है और इसलिए इसमें अशुद्धियां हो सकती हैं, जिसे कई बीमारियां व इन्फेक्शन आदि होने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं देसी खांड भले ही थोड़ी बेहतर हो, लेकिन यह डायबिटीज के मरीजों के लिए कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि इससे भी ब्लड शुगर बढ़ सकता है और इसका जरूरत से ज्यादा सेवन शरीर के वजन को भी बढ़ाता है।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।