किसी ढाबे पर आप खाना खाने जाएं तड़के वाली दाल आपको परोसी जाए तो कैसा लगेगा ? हम जानते हैं आपका मन खुश हो जाएगा। तड़के की वजह से भोजन का स्वाद तो बढ़ता ही है साथ ही साथ सेहत के लिहाज से भी यह बहुत फायदेमंद हैं। चलिए आज हम आपको बताते हैं अलग-अलग तरह के तड़कों के बारें में, और जानते हैं कि कैसे वो हमारी सेहत से जुड़े हुए हैं-
हींग लहसुन तड़का- पेट को शांत रखना है तो इस तड़के के फायदे हैं अनेक।इस तड़के का इस्तेमाल दाल में ही नहीं सिर्फ खिचड़ी में फ्लेवर लाने के लिए किया जाता है।
पंजाबी तड़का- पंजाबी तड़के में जो जीरा और अदरक इस्तेमाल किया जाता है, वह कब्ज़ के लिए फायदेमंद होता है। हरी मिर्च से वेट लॉस, लहसुन से सर्दी-खांसी कम और प्याज़ से इम्युनिटी बढ़ता है।
गुजराती तड़का- गुजराती तड़का पौष्टिकता से भरपूर होता है। राई कोलेस्ट्रोल को कम करने के साथ हजम शक्ति को बढ़ाता है। हल्दी एसिडिटी कंट्रोल करने के साथ हींग कब्ज़ को दूर करता है।
कढ़ी तड़का- घी बिना तड़के का क्या है मज़ा। इसलिए थोड़े मात्रा में घी का इस्तेमाल ज़रूर करें। मेथी हजम शक्ति को बढ़ाने के साथ लाल मिर्च इन्फेक्शन से बचाता है।
दक्षिण भारतीय तड़का- इसमें चना और उड़द दाल मूल रूप से होता है जो पौष्टिकता के दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होता है। चना दाल में फाइबर, कैल्सियम और प्रोटीन होता है तो उड़द दाल में उच्च मात्रा में प्रोटीन होता है जो यादाश्त को बेहतर बनाता है।
पंच फोरन- बंगालियों का अधिकतर व्यंजन पाँच फोरन से बनता है। कलौंजी जोड़ों का दर्द कम करता है तो सौंफ सांस की बदबू से राहत दिलाता है।
कश्मीरी तड़का- कश्मीरी तड़का से मसालों से भरपूर होता है। इसमें ऐसे मसाले दिये जाते हैं जो ठंड वाले जगहों मे शरीर को गर्म रखने में मदद करते हैं। लौंग दांत दर्द को कम करता है तो तेजपत्ता दिल को स्वस्थ रखता है।
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