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Written By: Atul Modi | Updated : August 21, 2023 3:53 PM IST
शरीर के सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ठीक रहना बेहद जरूरी है। इसके लिए बॉडी को बहुत से पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इन पोषक तत्वों में से एक बेहद ही महत्वपूर्ण तत्व है देसी घी, जो लगभग हर भारतीय रसोई का अंग है। देसी घी के सेवन से शरीर को अनेकों लाभ मिल सकते हैं। इसलिए आयुर्वेद में इसे सुपरफूड भी माना गया है। अगर हम ट्रांस फैट,सैचुरेटेड फैट और हाइड्रोजेनेटेड फैट की तुलना करें तो देसी घी एक स्वस्थ विकल्प है। तो आइए जानते हैं कि देसी घी को एक बेहतर विकल्प क्यों माना जाता है।
लहसुन लगभग हर रसोई में मिलने वाली एक आयुर्वेदिक दवा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब इसे घी के साथ मिलाया जाता है, तो यह पुराने बुखार के लिए भी प्रभावी इलाज हो सकता है। जो लोग आयुर्वेद में विश्वास करते हैं उनके अनुसार लहसुन और घी का सेवन बेहद प्रभाव कारी हो सकता है। लेकिन अगर बुखार काफी दिनों तक बना रहता है तो डॉक्टर से सलाह लेना अत्यधिक उचित है।
यदि त्रिफला काढ़े को घी के साथ मिलाकर प्रयोग किया जाए तो एनीमिया जैसी बीमारी कम हो सकती है। असल में घी पोषक तत्वों और बहुत से यौगिकों के अवशोषण में मदद कर सकता है।
नाश्ता बनाते समय, मक्खन या तेल के बजाय घी का उपयोग फायदेमंद हो सकता है। जैसे कि टोस्ट पर मक्खन की जगह घी का प्रयोग करें और पराठे या पोहा में रिफाइंड की जगह घी का प्रयोग एक हेल्दी विकल्प है। एक्सपर्ट के मुताबिक घी न केवल स्वाद बढ़ता है बल्कि जरूरी फैटी एसिड भी प्रदान करता है।
घी उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है जो अनाज या लैक्टोज इनटोलरेंस से पीड़ित होते हैं। क्योंकि घी में दूध के ठोस तत्व नहीं होते। जिसकी वजह से लेक्टोज इनटोलरेंस लोगों के लिए यह एक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प हो सकता है।
किसी भी चीज को तलने या भूनने में अगर तेल की जगह घी का प्रयोग किया जाए तो स्वास्थ्य की दृष्टि से अधिक फायदेमंद हो सकता है। असल में अधिक गर्म होने पर भी घी का तापमान स्थिर रहता है। जिससे नुकसानदायक कंपाउंड नहीं निकल पाते और खाने की क्वालिटी ठीक रहती है।