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इस समय की सबसे बड़ी समस्या बढ़ता हुआ तनाव है। तनाव न उम्र देखता है, न वर्ग। हर व्यक्ति के पास अपने-अपने स्तर का तनाव है। जो अगर सीमा से ज्यादा बढ़ जाए तो अवसाद सहित और भी कई तरह की बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि शरीर में एक खास तरह के हार्मोन सेरोटोनिन हार्मोन का स्तर बढ़ा दिया जाए तो व्यक्ति तनाव से बच सकता है। आइए जानते हैं क्या है सेरोटोनिन हार्मोन और यह कैसे तनाव से लड़ने में मदद करता है।
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क्या है सेरोटोनिन हार्मोन
सेरोटोनिन एक ब्रेन केमिकल है। यह अमीनो एसिड ट्रिप्टोफैन से बनता है। यह अमीनो एसिड आपके आहार के माध्यम से आपके शरीर में प्रवेश करता है। आमतौर पर नट्स, पनीर और अलसी के बीज जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। ट्रिप्टोफैन की कमी से सेरोटोनिन का स्तर कम हो सकता है। जिससे मूड संबंधी विकार हो सकते हैं, जैसे कि चिंता या अवसाद। सेरोटोनिन को ही डॉक्टर्स ‘फील गुड हार्मोन’ कहते हैं। फील गुड हार्मोन सेरोटोटिन इंसान के मूड, भूख, नींद, सीखने की टेंडेंसी और याददाश्त संबंधी कार्यों को नियंत्रित करता है।
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सेरोटोनिन यानी फील गुड हार्मोन के 5 फायदे
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इस तरह बढ़ाएं अपना फील गुड हार्मोन
नियमित व्यायाम करें - सेरोटोनिन हार्मोन बढ़ाने के लिए यह जरूरी नहीं है कि आप भारी भरकम व्यायाम करें। आप रोजाना एक घंटा हल्के-फुल्के व्यायाम और योग करके अपने शरीर में सेरोटोनिन हार्मोन के स्तर को बढा सकते हैं तथा खुद को फिट भी रख सकते हैं। एक्सपर्ट भी यह मानते हैं कि नियमित व्यायाम डिप्रेशन से उबरने में मदद करता है, यहां तक कि इसे पूरी तरह दूर भी रख सकता है। व्यायाम करने से शरीर में सेरोटोनिन पैदा होता है, एक ऐसा रसायन, जो डिप्रेशन के रोगियों में धीमी गति से बनता है।
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धूप सेंकना – व्यस्तता में लोग सूरज की रोशनी भी ठीक से नहीं ले पातें, जिससे न केवल उनके शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है बल्कि सेरोटोनिन हार्मोन का स्तर भी कम होने लगता है। इसलिए सूरज की रोशनी में कुछ समय बिताएं। इससे शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिलेगा। सूरज की रोशनी से मूड में ताजगी आती है, जिससे सेरोटोनिन हार्मोन का स्राव होता है, जो कि ठंड, अंधेरे और निराशा के समय बढ़ जाता है।
कार्बोहाइड्रेट से भरपूर आहार - कार्बोहाइड्रेट से सेरोटोनिन के स्तर में बढ़ोतरी होती है। ओमेगा 3 फैट्स भी तन और मन के लिए फायदेमंद है। इसके लिए सरसों का तेल, अलसी के बीज, गेहूं, राजमा, मेथी, सोयाबीन और हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं।