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Written By: Yogita Yadav | Published : January 22, 2019 1:20 PM IST
कॉलेस्ट्रॉल बढ़ने का सीधा मतलब है कि आपके दिल की सेहत ठीक नहीं है। किसी भी तरह की आशंका से बचने के लिए जरूरी है कि अपने लाइफस्टाइल और आहार में कुछ जरूरी बदलाव करें। ©Shutterstock.
मौसम के बदलाव के साथ खून के लिपिड स्तर में उतार-चढ़ाव हो सकता है। ब्लड लिपिड के स्तर में बदलाव का मतलब है आपके कोलेस्ट्रॉल में बदलाव। ब्लड कोलेस्ट्रॉल के स्तर का सीधा संबंध दिल के रोगों से है। ब्लड कोलेस्ट्रॉल का स्तर जितना ज्यादा होगा, दिल के रोगों और दौरे का खतरा उतना ही ज्यादा होगा। भारत में महिलाओं और पुरुषों की मौतों का सबसे बड़ा कारण दिल का दौरा है, जो सर्दियों में बढ़ जाता है, क्योंकि इस मौसम में कोलेस्ट्रॉल स्तर बढ़ जाता है।
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आयुर्वेद है कारगर
खराब खान-पान और दिनचर्या के चलते कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है। सर्दियों में यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती है। पर उपचार के सबसे पुराने और विश्वसनीय तरीके, यानी आयुर्वेद की सहायता से इस पर काबू किया जा सकता है। इसके लिए आयुर्वेद में अनेक दवाएं व उपाय हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल खुद से करना नुकसानदेह हो सकता है। इसलिए किसी विशेषज्ञ से मिलना जरूरी होता है।
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बदलें खानपान
इस मौसम में ब्लड लिपिड स्तर में होने वाले उतार-चढ़ाव से बचने के लिए पौष्टिक व संतुलित भोजन लें। अपने वजन को नियंत्रण में रखने के लिए कम कैलरी वाली चीजें लेना चाहिए। लेकिन कोलेस्ट्रॉल के कई मरीज फैट पूरी तरह बंद न करें, क्योंकि शरीर के लिए उचित मात्रा में फैट्स भी जरूरी होते हैं।
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सेहतमंद फैट
सैचुरेटेड फैट जैसे कि क्रीम, चीज, मक्खन आदि अस्वस्थ एलडीएल बढ़ाते हैं और ट्रांस फैट को कम करते हैं। इसलिए इससे परहेज करें। उसकी जगह पर सेहतमंद अनसेचुरेटेड फैट जैसे मछली, मेवों और वनस्पति तेलों का प्रयोग करें।
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घी-मिठाई से करें परहेज
कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक न होने पाए, इसलिए इस दौरान मक्खन, घी, आइसक्रीम, चॉकलेट और मिठाई से परहेज करना चाहिए। नाश्ते में कॉर्नफ्लैक्स जैसी चीजों का सेवन करना चाहिए।
साबुत अनाज
साबुत अनाज की ब्रेड, मूसली आदि ब्लड शुगर बढ़ने से बचाते हैं और दिन भर पेट भरा रहता है। इनमें फाइबर होता है, जो एलडीएल का स्तर कम करता है।
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क्या खाएं
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