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Diet Mai Protein Or Carb Ka Combo: भारत के अलग-अलग क्षेत्रों के खाने में विभिन्नता दिखता है। हालांकि भारत में ज्यादातर लोगों का खाना चावल, रोटी और मीठी चीजों पर ज्यादा आधारित होता है, जबकि इसमें प्रोटीन की मात्रा उम्मीद से भी कम होती है। ऐसे में जाने-अनजाने हम ऐसी डाइट लेना शुरु कर देते हैं जिसमें कार्ब ज्यादा होता और प्रोटीन न के बराबर। यही आपके शरीर में अचानक दर्द होने, मसल पेन होने, इम्यूनिटी कम करने के साथ-साथ पूरे शरीर के स्वास्थ्य पर असर डालने का काम करता है। इसलिए जरूरी है कि लोग अपनी डाइट पर ध्यान दें और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल करें।
आपको डाइट की सही जानकारी देने के लिए हमने अपोलो और नमाहा हॉस्पिटल्स की कंसल्टेंट बैरिएट्रिक, हर्निया और लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉक्टर अपर्णा गोविल भास्कर से बात की। वह बताते हैं कि भारतीय खानपान में बढ़ता हुआ यह 'प्रोटीन गैप' एक बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है। प्रोटीन शरीर में मांसपेशियां बनाने, टिशू की मरम्मत करने और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए जरूरी होता है। जब खाने में कार्ब्स ज्यादा और प्रोटीन कम होता है, तो शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते और वह ठीक से काम नहीं कर पाता। आइए थोड़ा विस्तार से जानते हैं कि प्रोटीन और कार्ब्स की असंतुलित मात्रा शरीर को कैसे प्रभावित करती है?
हमारे भारतीय भोजन में प्रोटीन कम होने के पीछे कई सांस्कृतिक, खानपान और लाइफस्टाइल से जुड़े कारण हैं, जैसे-
इंडियन थाली में आमतौर पर सफेद चावल, गेहूं की रोटी और दूसरे अनाज मुख्य रूप से होते हैं। वहीं प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ प्लेट में कम मात्रा में होते हैं। इसलिए हमारे शरीर में प्रोटीन की कमी हो जाती है।
भारत में बड़ी संख्या में लोग शाकाहारी हैं। हालांकि शाकाहारी भोजन से भी पर्याप्त प्रोटीन मिल सकता है, लेकिन इसके लिए सही योजना बनानी पड़ती है। जैसे दाल, डेयरी प्रोडक्ट, सोया, नट्स और मिलेट्स का सही कॉम्बिनेशन। लेकिन अक्सर रोजमर्रा के खाने में इस पर ध्यान नहीं दिया जाता और हम शरीर में प्रोटीन की कमी का शिकार बन जाते हैं।
हम रोज क्या खाते-पीते हैं, यह हमारी आदतों में शामिल हो जाता है। ऐसे में कई बार दाल, पनीर, अंडे या मांस जैसे प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ मुख्य भोजन की बजाय सिर्फ साइड डिश की तरह खाए जाते हैं।
हम में से कई लोगों ऐसे होंगे जिन्हें यह पता ही नहीं होगा कि शरीर को रोज कितनी मात्रा में प्रोटीन की जरूरत होती है। ज्यादातर लोग तो चावल या रोटी खाकर पेट भर जाना ही अक्सर संतुलित भोजन मान लिया जाता है। लेकिन हमें डाइट को सही से समझना चाहिए और प्रोटीन की पूर्ति करने वाले फूड्स को खाने में शामिल करना चाहिए।
दाल, डेयरी प्रोडक्ट, नट्स, अंडे और मांस जैसे प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ कई बार अनाज के मुकाबले महंगे पड़ते हैं। इसलिए लोग इन्हें कम मात्रा में खाते हैं। वहीं अन्य चीजें जैसे ब्रेड, रोटी आदि ये चीजें कम मुल्य में मिल जाती हैं, जो डाइट में शामिल होकर शरीर में कार्ब्स बढ़ाती हैं।
आजकल लोग इतने बिजी हैं कि उन्हें हेल्दी तो छोड़िए, खाने का ही समय नहीं है। ऐसे में लोग या तो जल्दी बनने वाले खाने जैसे ब्रेड, स्नैक्स और पैकेज्ड फूड पर निर्भर हो जाते हैं या फिर सीधे बाहर का खाना ही ऑर्डर कर लेते हैं। इनमें बिल्कुल पोषक तत्व नहीं होते हैं और सेहत के लिए नुकसानदेह भी होते हैं।
कई लोग मानते हैं कि ज्यादा प्रोटीन सिर्फ खिलाड़ियों या बॉडी बिल्डर्स के लिए जरूरी होता है, या ज्यादा प्रोटीन खाने से किडनी को नुकसान हो सकता है। ऐसी गलत धारणाएं भी लोगों को पर्याप्त प्रोटीन लेने से रोकती हैं। ये सभी कारण मिलकर भारतीय डाइट में “प्रोटीन गैप” को बढ़ाते हैं। इसलिए लोगों में जागरूकता बढ़ाने और बेहतर डाइट प्लानिंग की जरूरत है।
अगर डाइट में कार्बोहाइड्रेट ज्यादा और प्रोटीन कम हो, तो शरीर को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
जब शरीर को जरूरत से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट मिलते हैं और वह ऊर्जा के रूप में खर्च नहीं होते, तो वे शरीर में फैट के रूप में जमा होने लगते हैं, खासकर पेट के आसपास। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस, मेटाबॉलिक गड़बड़ी और क्रोनिक सूजन का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही प्रोटीन कम होने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे वजन नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।
मोटापा कई बीमारियों की जड़ है जैसे हृदय रोग, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, फैटी लिवर, स्लीप एपनिया, गाउट, पित्ताशय की पथरी और पीसीओडी आदि। भारत में तेजी से बढ़ रहे मोटापे के मामलों में हाई कार्बोहाइड्रेट डाइट भी एक बड़ा कारण है। इसलिए डाइट में पनीर, टोफू, दाल, बीन्स, सीड्स, नट्स, मछली, अंडा, चिकन, चना, क्विनोआ, पालक, ब्रोकली, ओट्स और बकव्हीट जैसी चीजों को शामिल करना फायदेमंद होता है।
प्रोटीन मांसपेशियों को बनाए रखने के लिए जरूरी होता है। अगर शरीर को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता, तो शरीर ऊर्जा के लिए मांसपेशियों को ही तोड़ने लगता है, जिससे कमजोरी और ताकत में कमी आ सकती है।
इस असंतुलन को दूर करने के लिए भारतीयों को अपनी रोजमर्रा की डाइट में प्रोटीन को प्राथमिकता देनी चाहिए। हर भोजन में प्रोटीन का अच्छा स्रोत शामिल करना जरूरी है। संतुलित थाली, जिसमें पर्याप्त प्रोटीन हो, मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने, ब्लड शुगर को स्थिर रखने, स्वस्थ वजन बनाए रखने और इम्यूनिटी को मजबूत करने में मदद करती है। इससे कुल मिलाकर बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद मिलती है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।