
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Medically Verified By: Dr. Sama Akbar
पैकेट के लेवल को सही तरीके से पढ़ना जरूरी है।
सुबह उठकर चाय के साथ बिस्कुट, ऑफिस में भूख लगे तो चिप्स का पैकेट और रात को थकान मिटाने के लिए रेडी-टू-ईट दाल चावल। पहले जहां लोग पूरा दिन घर पर बना हुआ खाते थे, लेकिन अब हमारा दिन अब डिब्बों और पैकेट्स के बिना पूरा नहीं होता। पर क्या आपने कभी सोचा है, सुविधा के इस चक्कर में हम अपने दिल को कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं? रिसर्च बताती है कि पैकेट वाले फूड्स खाने से दिल की बीमारियों का खतरा 10 से 15 गुणा ज्यादा हो जाता है।
चेन्नई के ऑक्सीमीड हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. समा अकबर कहते हैं- "मेरे पास आने वाले 40 की उम्र के 10 में से 4 मरीजों की नसें 60 साल के बुजुर्ग जैसी जाम मिलती हैं। वजह सिर्फ एक है - हमारी थाली में बढ़ता हुआ 'प्रोसेस्ड फूड'। बाजार में मिलने वाले सूप, सॉस, नूडल्स, फ्रोजन फूड्स और स्नैक्स को जब डिब्बे बंद कर दिया जाता है तो इसमें कई तरह के केमिकल्स मिल जाते हैं। समस्या यह है कि हम पैकेट के आगे लिखा "टेस्टी" और "इंस्टेंट" देखकर पीछे की लिस्ट पढ़ते ही नहीं।
भारत में हार्ट के मरीजों के मामले बढ़ रहे हैं।
डॉक्टर के मुताबिक, हार्ट अटैक और हाई BP के पीछे 3 सफेद जहर सबसे बड़े जिम्मेदार हैं - नमक, चीनी और ट्रांस फैट। गौर करने वाली बात तो यह है कि यह तीनों ही चीजें आपको हर पैकेट और डिब्बाबंद स्नैक्स में मिल ही जाएंगे। डॉ. समा अकबर कहते हैं कि इसलिए अब हमारे देश में सही खानपान पर नहीं बल्कि सामान खरीदने से पहले डिब्बे के लेबल को पढ़ने की बात करनी चाहिए।
डॉ. समा कहते हैं- हार्ट की बीमारियों से बचाव करने के लिए घर पर बना हुआ शुद्ध खाना ही खाना चाहिए। पैकेज्ड वाले फूड्स को बिल्कुल इग्नोर करना चाहिए। जिन पैकेट पर 5 से ज्यादा Ingredients का इस्तेमाल किया गया है, उन्हें बिल्कुल न खाएं।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें बताई गई बातें किसी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं हैं। डाइट में किसी भी प्रकार का बदलाव या कोई नई दवा शुरू करने या दिल से जुड़ी कोई समस्या होने पर अपने कार्डियोलॉजिस्ट से सलाह जरूर लें।