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Written By: Atul Modi | Published : February 10, 2024 8:17 AM IST
सर्दियों के मौसम में खाने पीने के शौकीन लोगों की मौज हो जाती है। गजक, रेवड़ी से लेकर मक्के की रोटी-सरसों के साग तक, गोंद के लड्डुओं से लेकर बादाम, मूंग दाल और गाजर के हलवे तक, इस मौसम में स्वादिष्ट व्यंजनों की एक लंबी लिस्ट है। इस मौसम में आपको कई तरह के हेल्दी जूस के ऑप्शन भी मिलते हैं, जिनमें एक है गाजर का जूस। गाजर का जूस नारंगी या लाल गाजर की जगह काली गाजर का बनाया जाता है। दरअसल, गाजर हमारी सेहत के लिए फायदेमंद है, ये तो हम सभी जानते हैं, लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि काली गाजर और भी गुणकारी होती है। आप इसका हलवा भी बना सकते हैं, या फिर कांजी के रूप में भी इसका सेवन कर सकते हैं। आप इसे सलाद के रूप में भी खा सकते हैं। चलिए जानते हैं काली गाजर को खाने से हमें क्या फायदे होते हैं।
शक्तिशाली एंथोसायनिन एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर काली गाजर आपके ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में मददगार साबित होती है। ये शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले मुक्त कणों से लड़कर उन्हें निष्क्रिय करती है, जिससे आप कई हार्ट डिजीज से बचते हैं। ये कैंसर और न्यूरोडीजेनेरेटिव परेशानियों के खतरे तक को कम करती है। एंथोसायनिन की मदद से शरीर की सूजन कम होती है।
काली गाजर कई विटामिन और पोषक तत्वों का भंडार है। विटामिन ए का अच्छा स्रोत होने के कारण यह आपकी आंखों के लिए बहुत लाभदायक होती है। इसके नियमित सेवन से आंखों की रोशनी तेज होती है। इससे आपकी इम्यूनिटी बूस्ट होती है और आपकी स्किन ग्लोइंग बनती है। काली गाजर विटामिन ‘के 1’ का भी अच्छा स्रोत्र है। यह विटामिन रक्त के थक्के जमने में मदद करता है। वहीं विटामिन सी आपकी इम्यूनिटी बूस्ट करता है।
काली गाजर में हाई फाइबर होता है, जिसकी मदद से आपका पाचन तंत्र मजबूत बनता है। नियमित रूप से काली गाजर का सेवन करने से कब्ज की परेशानी दूर होती है। यह शरीर में हेल्दी कोलेस्ट्राॅल का स्तर भी बढ़ाती है।
टाइप 2 डायबिटीज को कंट्रोल करने का मीठा उपाय है काली गाजर। यह आपके ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करती है। हाई फाइबर से भरपूर होने के कारण यह शरीर में इंसुलिन और ग्लूकोज रिलीज को नियंत्रित रखती है। इसी के साथ यह बैड कोलेस्ट्राॅल को कम करती है।
काली गाजर आंखों के लिए अमृत से कम नहीं है। इसमें प्रचुर मात्रा में बीटा कैरोटीन होता है, इससे आंखों की सेहत में सुधार होता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट रेटीना से संबंधी बीमारी मैक्यूलर डिजनरेशन के जोखिम को कम करता है। इसी के साथ यह मोतियाबिंद के खतरे को भी दूर करता है।
काली गाजर बहुत लाभकारी है, लेकिन अति हर चीज की बुरी होती है। ठीक ऐसा ही काली गाजर के साथ भी है। इसका संतुलित मात्रा में सेवन करना चाहिए। कुछ लोगों के इसके नियमित सेवन से बचना चाहिए। किडनी संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को काली गाजर का सीमित सेवन करना चाहिए। अगर आप पोटेशियम रिच डाइट नहीं खा सकते तो काली गाजर का कम सेवन करें। काली गाजर में भरपूर मात्रा में ऑक्सलेट होता है। अगर आप किडनी स्टोन की परेशानी से जूझ रहे हैं तो काली गाजर का सेवन कम करें। इसी के साथ अगर आप खून पतला होने की दवा लेते हैं तो भी आपको काली गाजर खाने से बचना चाहिए।