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Healthy diet for uric acid patient: जब भी हेल्दी डाइट की बात आती है, तो उसमें फल और सब्जियों को शामिल करने करने की सलाह दी जाती है। सब्जियां वैसे तो सारी ही हेल्दी होती हैं, लेकिन ज्यादा फायदेमंद हरी पत्तेदार सब्जियों को माना जाता है। हालांकि, अगर ज्यादा हेल्दी हरी सब्जियों की बात की जाए तो हरी सरसों को इस लिस्ट में शामिल जरूर किया जाना चाहिए। सरसों के पत्ते व तने से बनाया जाने वाला साग जिसे हम सरसों का साग भी कहते हैं, यह कोई आम हरी सब्जी नहीं बल्कि बेहद हेल्दी डाइट का हिस्सा है। सर्दियों के दिनों मौसम में लोग खूब मात्रा में हरी सब्जियों का सेवन करते हैं, लेकिन इनमें सबसे ज्यादा फायदेमंद सरसों के साग को ही माना जाता है। सरसों को साग को डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल के मरीजों के लिए फायदेमंद तो माना ही जाता है, लेकिन क्या आपको पता है हाई यूरिक एसिड के मरीजों के लिए भी यह साग बेहद लाभकारी रहता है। (how to prevent uric acid in winter season)
यूरिक एसिड के मरीजों को जोड़ों में दर्द से जुड़ी काफी गंभीर समस्याएं रहती हैं, जिसके कारण स्वास्थ्य से जुड़ी कई अन्य परेशानियों का सामना भी करना पड़ जाता है। सर्दियों में बनाया और खाया जाने वाले सरसों का साग यूरिक एसिड की समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। हरी सरसों में कई ऐसे खास तरह के तत्व पाए जाते हैं, जो यूरिक एसिड को पेशाब के माध्यम से शरीर से बाहर निकलने में मदद करते हैं।
सिर्फ यूरिक एसिड ही नहीं बल्कि हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड शुगर लेवल जैसी क्रोनिक समस्याओं के लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए भी सरसों का साग काफी फायदेमंद बताया गया है। सरसों में कई तरह के ऐसे खास तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में ब्लड शुगर और बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकते हैं, जिससे इन बीमारियों के लक्षणों को कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है।
सर्दियों के दिनों में सरसों के साग का सेवन किसी भी समय किया जा सकता है। लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार दोपहर या शाम के समय हरे साग का सेवन करना ज्यादा फायदेमंद रहता है। सरसों के साग का सेवन आप हफ्ते में दो से तीन बार भी कर सकते हैं। इसे पचाना काफी आसान होता है इसलिए शाम या दोपहर के समय ही इसका सेवन करना ज्यादा फायदेमंद रहता है।
सरसों के साग को वैसे तो कई अलग-अलग तरीके से बनाया जाता है, लेकिन इसके बनाने का तरीका आमतौर पर एक जैसा ही होता है और सिर्फ अलग-अलग प्रकार की सामग्री के अनुसार इसे बनाने की रेसिपी में कुछ बदलाव किए जाते हैं। हालांकि, सभी रेसिपी में पहले सरसों को उबाला जाता है और फिर इसके पानी को बदलकर उसमें तड़का लगाया जाता है।