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Bathua Aur Palak ka Saag ke Fayde: सर्दी का मौसम आते ही हमारी थाली हरी पत्तेदार सब्जियों से सज जाती है। इस मौसम में पालक और बथुआ का साग खासतौर पसंद किया जाता है, जिसका साथ निभाती है, मक्के और बाजरे की रोटी, जो कि शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होती है। हरे साग में एक चम्मच देसी घी डालकर खाने से और ज्यादा स्वाद तो बढ़ता ही है, साथ ही इसके हेल्थ बेनिफिट्स भी बढ़ जाते हैं। आयुर्वेद में भी सर्दियों में देसी घी और हरे साग को सेहत के लिए अमृत समान माना गया है। क्या आप साग को अब तक तेल में बना रहे थे या बिना घी के ही सेवन कर रहते थे तो आज साग और उसमें मिलाए जाने वाले घी के लाभों के बारे में जान लें। यकीन मानिए हैरान रह जाएंगे।
पालक और बथुआ दोनों में ही आयरन, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स पाया जाता है। देसी घी मिलाने पर शरीर साग के पोषक तत्वों को सही ढंग से अवशोषित कर पाता है और साथ ही ओमेगा 3 फैटी एसिड की मात्रा भी बढ़ जाती है। नियमित रूप से इस साग का सेवन करने से सर्दी-जुकाम, खांसी और मौसमी बीमारियों से बचाव होता है, क्योंकि हमारे शरीर इम्यूनिटी लगातार अच्छे से काम कर रही होती है।
(और पढ़ें - हरा साग खाने के फायदे)
पालक और बथुआ से बने हरे साग में मौजूद विटामिन ए और ई त्वचा और बालों के लिए लाभकारी सिद्ध होते हैं। इसके सेवन से आपकी त्वचा व बाल स्वस्थ और चमकदार दिखने लगते हैं, साथ ही देसी घी भी त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसलिए अगर हफ्ते में एक या दो बार भी पालक व बथुआ के हरे साग में एक चम्मच देसी घी डालकर खा लेते हैं, तो इससे आपके स्वास्थ्य को एक नहीं बल्कि कई फायदे एक साथ मिल सकते हैं।
(और पढ़ें - बथुआ खाने के फायदे)
सर्दियों में जोड़ों के दर्द की समस्या आम सी हो जाती है, खासकर बुजुर्गों में। ऐसे में देसी घी में मौजूद स्वस्थ फैट्स सूजन को कम करने का काम करते हैं, जबकि पालक और बथुआ में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। इससे गठिया और जोड़ों के दर्द वाले लोगों को राहत मिलती है। लेकिन हरे साग के साथ दूध या छाछ आदि नहीं लेनी चाहिए और साग खाने से एक घंटा पहले या बाद में इसका सेवन करना चाहिए। क्योंकि पालक में मौजूद कुछ तत्व कैल्शियम के अवशोषण को रोकता है।
पालक हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए जाना जाता है, क्योकि यह आयरन का एक अच्छा स्रोत है। जिन लोगों को एनीमिया या कमजोरी की समस्या रहती है, खासकर महिलाओं को उन्हें देसी घी डालकर पालक-बथुआ के साग का सेवन जरूर करना चाहिए, जो कि शरीर में ऊर्जा बढ़ाने का काम भी करता है। आयरन का अच्छा स्रोत होने की वजह से इसे छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर किसी के लिए अच्छा माना जाता है।
पाचन के लिए बथुआ को आयुर्वेद में बहुत लाभकारी माना गया है। साग में फाइबर की अच्छी मात्रा होता है, जो कब्ज, गैस और अपच की समस्याओं को दूर करने में मदद करती है। वहीं देसी घी आंतों को चिकनाई प्रदान करता है, जिससे भोजन आसानी से पच पाता है। जिन लोगों को कब्ज, पेट में गैस, बदहजमी या दस्त आदि की शिकायत रहती है, उन्हें पोषक तत्वों से भरे इस हरे साग को अपनी डाइट में शामिल करते रहना चाहिए।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।