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जो लोग नवरात्रि में व्रत रखते हैं वे फलाहार का सेवन करते हैं। इसलिए वे तेल की बजाए घी को प्राथमिकता देते हैं। आइए जानें कैसे आपकी सेहत के लिए बेहतर है शुद्ध घी का सेवन! © Shutterstock.
घी को आयुर्वेद में औषधि माना गया है। इसके स्वाद में एक खास तरह की मिठास होती है। जो लोग नवरात्रि में व्रत रखते हैं, वे भी तेल की बजाए घी में बने खाने का सेवन करते हैं। पर कुछ वर्षों से लोग फिटनेस की चिंता में इसके सेवन से परहेज करने लगे हैं। पर अब ताजा शोधों में यह बात सामने आई है कि अगर घी का सीमित मात्रा में सेवन (Healthy Navratri diet) किया जाए तो यह सेहत के लिए फायदेमंद ही होगा। आइए जानें क्यों व्रत में तेल से बेहतर माना गया है घी का सेवन।
नवरात्रि व्रत (Healthy Navratri diet) रखने वाले लोग इस दौरान तेल की बजाए घी में पके भोजन के सेवन को प्राथमिकता देते हैं। इसकी वजह है इसका फलाहार होना। यानी यह मिल्क प्रोडक्ट है। दूध से बने उत्पादों को फलाहार में ही शामिल किया जाता है। दूध से बने होने के कारण इसमें एक कुदरती मिठास होती है। जबकि तेल में हल्का तीखापन होता है। घी का स्मोकिंग प्वाइंट 252 डिग्री सेल्सियस होता है। जो किसी भी तेल की तुलना में ज्यादा है। यानी आप इसमें डीप फ्राई भी करें तो इसके पोषक तत्वों में कोई कमी नहीं आती।
देसी घी यानी शुद्ध घी अपने आप में एक आहार है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन्स, ओमेगा 3, आयरन और कैल्शियम भी पाया जाता है। एक चम्मच देसी घी में सौ से ज्यादा कैलोरीज होती हैं। जो उपवास के दौरान आपको एनर्जी देने का काम करती हैं। इसमें पके खाने का सेवन करने से आपका पेट देर तक भरा हुआ महसूस होता है। जिससे आपको बार-बार खाने की तलब नहीं लगती।
व्रत में खाया जाने वाला ज्यादातर खाना गरिष्ठ भोजन यानी हैवी फूड माना जाता है। फिर चाहें उबले आलुओं को फ्राई करना हो, कुट्टू की पूड़ी या परांठा बनाना हो। इनका स्वाद शुद्ध घी के साथ बढ़ जाता है। जबकि सरसों, ऑलिव या अन्य तेलों में इनमें वह स्वाद नहीं आ पाता। अगर आपका पाचन तंत्र कमजोर है, तब भी आपको देसी घी से बने खाने से ज्यादा परेशानी नहीं होगी।
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