स्‍वस्‍थ जीवन के लिए अपनाएं खानपान की ये तीन आदतें

सही तरीके से भोजन करना किसी साधना से कम नहीं है।

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Written By: Yogita Yadav | Published : September 26, 2018 7:53 AM IST

भारतीय परंपराओं में भोजन को भी योग और साधना की संज्ञा दी गई है। जिस तरह अच्‍छा भोजन शरीर को स्‍वस्‍थ रखता है, उसी तरह खानपान की गलत आदतें जीवन को जटिल बना देती हैं। विभिन्‍न तरह की बीमारियां और मानसिक दबाव खानपान की गलत आदतों के कारण ही जन्‍मते हैं। अगर आप भी चाहतें हैं अपने जीवन को सुंदर और स्‍वस्‍थ बनाना तो भोजन के संबंध में दार्शनिकों के दिए गए इन नियमों को जरूर फॉलो करें।

आहार में जुड़ें प्रकृति से उसके मूल रूप में

अगर आप प्रतिदिन आठ से नौ घंटों की नींद ले रहे हैं तो आपको अपने आहार पर ध्यान देना होगा। कम से कम एक निश्चित मात्रा में शाकाहारी आहार लें, जिसे आप बिना पकाए, कच्चा ही खा सकें – ये आपकी खुशहाली के लिए बहुत जरुरी है। जब आप भोजन पकाते हैं तो उसकी बहुत सारी प्राण या जीवन ऊर्जा नष्ट हो जाती है। यही वजह है कि शरीर में आलस बना रहता है। अगर आप ताजे फल और सब्जियों का सेवन करें तो इसके बहुत लाभ हो सकते हैं, पर एक चीज़ जो आप सबसे पहले नोटिस करेंगे, वो ये है कि आपकी नींद के घंटे कम हो जाएंगे।

झटपट खाना

भारतीय संस्कृति में, पारंपरिक रूप से कहा जाता है कि पकाए हुए भोजन को डेढ से दो घंटे के बीच खा लेना चाहिए। बने हुए भोजन को लम्बे समय फ्रिज में रख कर खाने से नींद के घंटे बढ़ सकते हैं और शरीर में कई तरह की दिक्कतें भी हो सकती हैं। डिब्बाबंद भोजन के लिए भी यही कहा जा सकता है। इस तरह बंद रखा गया भोजन तमस यानी आलस्य को बढ़ाता है जिससे आपकी मानसिक फुर्ती और सजगता में कमी आ सकती है।

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कितना भोजन करें

आप अपनी ऊर्जाओं का जितना उचित प्रबंधन करते हैं, उसी पर आपकी सजगता निर्भर करती है। ध्यान करने के लिए आपके मन की ही नहीं, आपकी ऊर्जा की सजगता भी बहुत आवश्यक है। इसके लिए, यौगिक पथ का अभ्यास करने वालों से कहा जाता है कि उन्हें केवल चौबीस कौर ही खाने चाहिए और हर कौर को चौबीस बार चबाना चाहिए। इस तरह भोजन पेट में जाने से पहले ही, पच जाएगा और शरीर में आलस्य नहीं आएगा।

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अगर आप शाम के भोजन के दौरान ऐसा करेंगे, तो आप सुबह साढे तीन बजे अपने-आप ही उठ सकेंगे। यौगिक तंत्र में, यह समय ब्रह्म मुहूर्त कहलाता है। यह यौगिक अभ्यास करने के लिए आदर्श समय है, इस समय आपको साधना करने के लिए प्रकृति से अतिरिक्त सहयोग भी मिलेगा।

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