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Written By: Yogita Yadav | Published : August 31, 2019 3:49 PM IST
1 से 7 सितंबर के बीच पोषण संबंधी चिंताओं पर खुल कर चर्चा करने की जरूरत है। © Shutterstock
सितंबर के पहले सप्ताह को पूरे देश में राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के तौर पर सेलिब्रेट किया जाता है। बदलती दिनचर्या ने खानपान की आदतें बदल दी हैं। इन दिनों जो खानपान का जो चलन है उससे मोटापे में तो बढ़ोतरी हुई है, लेकिन पोषण में लगातार कमी देखी जा रही है। निम्न वर्ग के लोग ही नहीं, बल्कि शहरों में रहने वाले हायर इनकम ग्रुप के बच्चों और युवाओं में भी पोषण की कमी देखी जा रही है।
क्या है पोषण :
पोषण वह संतुलित भोजन है जिसमें शरीर की आवश्यकता के अनुसार प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट और वसा आदि शामिल होती है। परंतु इन दिनों जो डायट लिया जा रहा है उसमें वसा और कार्बोहाइड्रेट तो होते हैं, परंतु प्रोटीन और विटामिन नहीं मिल पाते। सेहत को दुरस्त रखने के लिए ज्यादा खाने की बजाए संतुलित भोजन की जरूरत बताई जाती है।
जंक फूड से तौबा :
बच्चे अक्सर जंक फूड या फास्ट फूड की डिमांड करते हैं। लेकिन बार बार उनकी ये मांग पूरी करने से उन्हें उनकी आदत पड़ जाती है। जंक फूड के नुकसान बहुत भारी पड़ सकते हैं। इसलिए जंक फूड से बच्चों को दूर रखें, यह हमारी जिम्मेदारी है। जरूरी है कि हम खुद भी जंक फूड से तौबा कर घर में पके सादा भोजन की आदत विकसित करें।
हरी सब्जियां :
हरी पत्तेदार सब्जियां फाइबर से परिपूर्ण होती हैं जो हानिकारक कोलेस्ट्रोल को दूर करता है एवं लाभदायक कोलेस्ट्रोल की मात्रा को बढाता है। हरी पत्तेदार सब्जियों में कैल्सियम, मैग्नीशियम एवं अन्य खनिज पदार्थ प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं जो आपकी धमनियों को मजबूत एवं साफ करते हैं। ये खनिज पदार्थ आपकी अग्न्याशय यानि पैनक्रियाज को भी स्वस्थ रखते है।
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मौसमी फल :
फलों को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है, चाहे बात ताज़े फलों की हो या ड्राई फ्रूट्स की। फलों में भरपूर मात्रा में विटामिन, कैल्शियम और आयरन होता है। मौसमी फल सेहत के लिए बहुत अधिक फायदा करते हैं। कुछ लोग फलों को खाने के बजाय जूस लेना अधिक पसंद करते हैं, हालांकि जूस भी बहुत फायदेमंद होता हैं, लेकिन आप फलों को बगैर रस निकाले खाएंगे तो आपको अधिक लाभ होगा। सन्तरा, अंगूर, आम, पपीता जैसे मौसम के फलों में खनिज लवण या विटामिन होते हैं जो फिट रखते हैं और शरीर में खून की कमी को दूर करते हैं।
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ट्रांस फैट से परहेज :
इसे ट्रांस फैटी एसिड भी कहते है। यह तेल में पाए जाने वाले हाइड्रोजनेशन की केमिकल प्रोसेस से बनता है। यह बॉडी को काफी ज्यादा नुक्सान पहुंचाता है। यह ट्रांस फैट तब उत्पन्न होता है जब आयल का हाइड्रोजनेशन एक सॉलिड रूप ले लेता है। आहार का स्वाद लम्बे समय के लिए अच्छा रखने के लिए और आहार को लम्बे समय तक ख़राब होने से बचाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। यह सबसे ज्यादा फ्रेंच फ्राइज में पाया जाता है। यह बॉडी के बुरे कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ाता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है। ट्रांस फैट युक्त चीज़े अच्छी तरह से पच नहीं पाती है। साथ ही ट्रांस फैट से युक्त आहार शरीर के हर पार्ट में फैट जमा करते है। ट्रांस फैट युक्त चीज़ो के सेवन से मोटापा, किडनी और दिल की बीमारी ज्यादा होती है।