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प्रोबायोटिक्स फायदेमंद बैक्टीरिया हैं जो आंत में रहते हैं और पाचन सुधार में मदद करते हैं। प्रोबायोटिक्स के विपरीत प्रीबायोटिक्स (Prebiotics) ना पचने वाले कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं जो फाइबर से भरे होते हैं और ये आंतों में बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देते हैं। आप प्रीबायोटिक्स को हजम नहीं कर सकते हैं।
सभी प्रीबायोटिक्स फाइबर होते हैं और सभी तरह के फाइबर को प्रीबायोटिक्स नहीं माना जा सकता है। घुलनशील फाइबर पानी में घुल जाते हैं। इस तरह के फाइबर में ओलीगोसैचराइड्स (Oligosaccharides) जैसे प्रीबायोटिक्स होते हैं और इनुलिन(Inulin) व ओलिगोफराक्टोज (Oligofructose) जैसे यौगिक होते हैं। इन यौगिकों को एंजाइम पचा नहीं पाते हैं और न ही पेट में एसिड द्वारा तोड़ा जा सकता है। हालांकि ये यौगिक पेट में मौजूद लैक्टोबैसिलस और बिफिडोबैक्टीरिया द्वारा फर्मेन्टड होते हैं।
इन चीजों में होते हैं प्रीबायोटिक्स
जर्नल क्रिटिकल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, रोजाना प्रीबायोटिक्स की 1 से 10 ग्राम खपत करनी चाहिए। हालांकि यह व्यक्ति की भौगोलिक, जनसांख्यिकीय और अन्य स्वास्थ्य संबंधी मापदंडों पर निर्भर है।
हालांकि जर्नल फ्रंटियर्स इन बिहेव्यरल न्यूरोसाइंस में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला है कि प्रीबायोटिक्स से ना केवल आपका पाचन बेहतर होता है बल्कि इम्युनिटी सिस्टम भी मजबूत बनता है। इसे खाने से नॉन-रैपिड आई मूवमेंट (REM) बेहतर होता है और तनाव कम होता है।