
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By: Dr. Neelam Bisht
वेट लॉस
आजकल वजन कम करने के लिए लोग तरह-तरह के तरीके अपना रहे हैं। इनमें इंटरमिटेंट फास्टिंग सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से एक बन गई है। सोशल मीडिया पर कई लोग दावा करते हैं कि बिना ज्यादा एक्सरसाइज किए केवल इंटरमिटेंट फास्टिंग से तेजी से वजन कम किया जा सकता है। लेकिन क्या सच में यह तरीका सभी लोगों के लिए सेफ और असरदार है?
इस सवाल का जवाब देते हुए पारस हेल्थ, गुरुग्राम की चीफ डाइटिशियन डॉक्टर नीलिमा बिष्ट कहती हैं कि इसका जवाब व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, खानपान और जीवनशैली पर निर्भर करता है। एक्सपर्ट के अनुसार इंटरमिटेंट फास्टिंग कोई डाइट नहीं बल्कि खाने का एक पैटर्न है। इसमें यह तय किया जाता है कि दिन के किस समय खाना खाना है और किस समय उपवास रखना है। आइए हम वजन कम करने के इन दोनों तरीकों को थोड़ा विस्तार से जानते हैं।
डाइटिशियन बताती हैं कि वजन कम करने का सबसे पॉपुलर तरीका 16:8 है, जिसमें 16 घंटे उपवास रखा जाता है और 8 घंटे के अंदर खाना खाया जाता है। इसके अलावा 14:10 और 5:2 जैसे मॉडल भी अपनाए जाते हैं। एक्सपर्ट के अनुसार "इंटरमिटेंट फास्टिंग से कुल कैलोरी का सेवन कम हो सकता है, जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है। कुछ स्टडीज में यह भी पाया गया है कि यह इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करने और शरीर में जमा एक्सट्रा फैट को कम करने में मददगार हो सकती है। हालांकि इसका असर तभी दिखाई देता है, जब भोजन संतुलित और पौष्टिक हो।"
डाइटिशियन नीलिमा बिष्ट के अनुसार, "इंटरमिटेंट फास्टिंग वजन कम करने का एक असरदार तरीका हो सकता है, लेकिन इसे किसी जादुई उपाय की तरह नहीं देखना चाहिए। अगर फास्टिंग के दौरान व्यक्ति खाने के समय जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेता है या जंक फूड खाता है, तो वजन कम होने की संभावना कम हो जाती है। इसलिए बैलेंस डाइट, प्रोटीन, फाइबर और नियमित शारीरिक गतिविधि इसके साथ जरूरी है। डायबिटीज, प्रेग्नेंसी, ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं या गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू नहीं करनी चाहिए।"
इंटरमिटेंट फास्टिंग से वजन और शरीर की एक्सट्रा चर्बी कम करने में मदद मिल सकती है, इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर हो सकती है, मेटाबॉलिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है, देर रात खाने की आदत कम हो सकती है और कुछ लोगों में ऊर्जा और अनुशासन बनाए रखने में मदद मिलती है।
एक्सपर्ट के अनुसार, टाइप-1 डायबिटीज, बार-बार लो ब्लड शुगर की समस्या, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली मांएं, खाने से जुड़े मानसिक विकार वाले लोग और गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बिना इंटरमिटेंट फास्टिंग नहीं अपनानी चाहिए।
डाइटीशियन बताती हैं “वजन कम करने का मूल सिद्धांत आज भी वही है- शरीर जितनी कैलोरी खर्च करता है, उससे कम कैलोरी का सेवन करना। यानी अगर फास्टिंग के दौरान तली-भुनी चीजें, मिठाइयां और शक्कर वाले पेय का अधिक सेवन किया जाता है, तो इंटरमिटेंट फास्टिंग का फायदा काफी कम हो सकता है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग वजन कम करने में फायदेमंद हो सकती है, लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए समान रूप से लाभदायक नहीं होती।
डिस्क्लेमर: हेल्दी तरीके से वजन घटाने का सबसे सेफ तरीका बैलेंस डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और हेल्दी लाइफस्टाइल का मिक्सचर है। अगर किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी है या वह नियमित दवाएं ले रहा है, तो इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना सबसे बेहतर विकल्प है।