... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: IANS | Updated : November 30, 2018 6:47 PM IST
खाद्य पदार्थ जहर कब हो जाता है ? ©Shutterstock.
खाद्य तेल में पाया जाने वाला ट्रांस फैट धीमा जहर है, जो हृदय और गुर्दा समेत शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर मौत का कारण बनता है। यह बात शुक्रवार को भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई ) द्वारा ट्रांस फैट को लेकर एक जन-जागरूकता अभियान को शुरू करने के मौके पर कही। विशेषज्ञों ने बताया कि ट्रांस फैट एक प्रकार का असंतृप्त वसा अम्ल (अनसैचुरेटेड फैटी एसिड) है जो प्रकृति में बहुत कम मात्रा में पाया जाता है और जिससे कोई नुकसान नहीं होता है। लेकिन, उद्योग द्वारा जब इसका उपयोग खाद्य में किया जाता है, तो यह जहर जैसा बन जाता है।
ये भी पढ़ेंः ज्यादातर लोग इन 4 वजहों से HIV का टेस्ट करवाने से कतराते हैं।
एफएसएसएआई के सीईओ डॉ. पवन अग्रवाल ने कहा कि ट्रांस फैट के कारण होने वाली दिल की बीमारी में दुनियाभर में हर साल करीब पांच लाख लोगों की मौत होती है। इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2022 तक दुनिया को ट्रांस फैट से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा, "भारत में इससे हर साल 60,000 लोगों की मौत होती है और हम विश्व स्वास्थ्य संगठन की समय सीमा से पहले इस लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश में जुटे हैं।"
ये भी पढ़ेंः एच.आई.वी. इंफेक्शन के बाद कैसे गुजारें साधारण जीवन।
एफएसएसएआई ने शुक्रवार को ट्रांस फैट के नुकसान को लेकर एक नया मास मीडिया अभियान शुरू किया। इस अभियान को 'हार्ट अटैक रिवांइड' नाम दिया गया है। इसमें 30 सेकंड का पब्लिक सर्विस अनाउंसमेंट (पीएसए) के अलावा बिलबोर्ड और सोशल मीडिया के जरिए जन-जागरूकता शामिल है।
ये भी पढ़ेंः एचआईवी संक्रमित इंसान अपने परिवार को इस संक्रमण से कैसे बचा सकता है ?
एक विशेषज्ञ ने बताया कि ट्रांस फैट को तरल वनस्पति तेल में हाइड्रोजन मिलाकर तैयार किया जाता है, ताकि उसे और भी ठोस बनाया जा सके और खाद्य पदार्थ की शेल्फ लाइफ बढ़ाई जा सके। ट्रांस फैट बड़े पैमाने पर वनस्पति तेल, कृत्रिम मक्खन और बेकरी के खाद्य पदार्थो में पाया जाता है।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि एफएसएसएआई साल 2022 तक चरणबद्ध रूप से औद्योगिक रूप से तैयार होने वाले ट्रांस फैटी एसिड को 2 प्रतिशत से भी कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
ये भी पढ़ेंः खाने का मन नहीं करता ? हो सकता है एनोरेक्सिया नर्वोसा, जानें बचाव के तरीके।
इस अभियान को वाइटल स्ट्रैटेजीज के विशेषज्ञों ने तैयार किया है। वाइटल स्ट्रैटेजीज की डॉ. नंदिता मुरुकुतला ने कहा, "ट्रांस फैट से सेहत को कोई भी लाभ नहीं होता है और भारतीयों में यह कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों व सेहत से जुड़ी अन्य परेशानियों का खतरा बढ़ा देता है।"