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बहुत से लोग रोटी बनाने की बजाय ब्रेड से काम चला लेते हैं। वहीं कुछ लोगों का मानना होता है कि ब्रेड रोटी से ज्यादा बेहतर है, लेकिन इसके पीछे का सच क्या है? दरअसल, ब्रेड को आटे से बेक करके या स्टीम और फ्राई करके बनाया जाता है, जबकि रोटी को बनाने के लिए आटे को गूंद कर तवे पर सेंका जाता है। न्यूट्रिशनिस्ट कविता देवगन कहती हैं कि ब्रेड को तैयार करने की प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में फाइबर निकाल लिया जाता है। वहीं दूसरी तरफ, रोटी को पकाने पर उसमें मौजूद फाइबर को निकाला नहीं जाता। इस वजह से रोटी को स्वास्थ्य और पोषण के लिहाज से बेहतर माना जाता है। ब्रेड को बनाने के लिए यीस्ट का प्रयोग किया जाता है, जबकि रोटी के लिए यीस्ट की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे में जिन लोगों के लिए यीस्ट को पचाना मुश्किल होता है, उनके लिए रोटी बेहद फायदेमंद है।
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रोटी बेहतर या ब्रेड ?
आजकल बाजार में कई तरह के ब्रेड उपलब्ध हैं, जिनकी गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उनमें कई प्रकार के अनाज और दूसरी चीजें मिलाई जाती हैं। इसके अलावा ब्रेड को कुछ दिनों तक खाने योग्य बनाए रखने के लिए उसमें प्रिजरवेटिव्स भी मिलाए जाते हैं। मल्टीग्रेन ब्रेड सादा ब्रेड की अपेक्षा महंगी होती है और हर जगह उपलब्ध भी नहीं होती। वहीं दूसरी तरफ, रोटी हम घर पर कभी भी, किसी भी समय आसानी से बना सकते हैं। ऐसे में हम हमेशा ताजा रोटी खाएंगे, जबकि ब्रेड कुछ समय पहले की बनी हुई होती है। रोटी को हम जौ, ज्वार, बाजरा, गेंहू और हर तरह के स्वास्थ्यवर्धक अनाज से बना सकते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि ब्रेड की अपेक्षा रोटी अधिक फायदेमंद होती है।
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ब्रेड से कैंसर का खतरा
सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट द्वारा किए गए एक अध्ययन में दिल्ली के कई इलाकों से ब्रेड और दूसरे बेकरी प्रोडक्ट्स के सैंपल लिए गए। उन सैंपल में से 84 प्रतिशत में रासायनिक फूड एडिटिव्स के अवशेष पाए गए। इन रसायनों में पोटैशियम ब्रोमेट, पोटैशियम आयोडेट जैसी चीजें शामिल थीं, जिनसे कैंसर हो सकता है। बहुत से देशों में इन दोनों एडिटिव पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है, लेकिन भारत और अमेरिका में अभी भी इनका उपयोग किया जा रहा है। इस तरह के अध्ययनों को ध्यान में रखते हुए बेहतर यही होगा कि ब्रेड का जितना हो सके उतना कम प्रयोग करें। घर में हाथों से बनी ताजा रोटी का मुकाबला बेकरी में बनी हुई कई दिन पुरानी ब्रेड बिल्कुल नहीं कर सकती।