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Written By: Anshumala | Updated : December 2, 2019 6:17 PM IST
क्या चावल खाने से बढ़ता है मोटापा ? जानिए चावल से जुड़े ये 8 मिथक। © Shutterstock.
कुछ लोगों को चावल खाना पसंद तो होता है, मगर वे खाते नहीं या फिर बहुत कम खाते हैं। उन्हें डर लगता है कि कहीं चावल खाने से वे मोटे न हो जाएं। शरीर में फैट न बढ़ जाए। चावल को लेकर बहुत सारी भ्रांतियां (Rice Myths) लोगों के मन में हैं। इस वजह से वे अपनी थाली से चावल को हटा देते हैं, जबकि सच मानिए तो ऐसा कुछ भी नहीं है। यह महज मिथक (Rice Myths and facts) है, जिसे खुद लोगों ने ही फैलाया है।
न्यूट्रिशनिस्ट, वेट मैनेजमेंट कंसल्टेंट और हेल्थ राइटर कविता देवगन का कहना है कि हद से ज्यादा कुछ भी खाने से वजन (rice increases weight) बढ़ सकता है, इसलिए हेल्दी रहने के लिए किसी भी चीज को सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए। चावल को लेकर कुछ लोगों में कई तरह के मिथ्स हैं। सही मायने में चावल बैलेंस डायट का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ये मिथक (Myths about white rice) कितने सही और कितने गलत हैं, बता रही हैं न्यूट्रिशनिस्ट कविता देवगन-
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नहीं, चावल खाने से बिल्कुल भी मोटापा नहीं बढ़ता है, क्योंकि इसमें कैलोरी अधिक नहीं होती है। पके हुए आधा कप चावल में लगभग 120 कैलोरी होती है, जो कि अन्य कार्बोहाइड्रेट से भरपूर अनाज जैसे गेहूं से बनी रोटी और ब्रेड में होती है। एक छोटी रोटी या एक ब्रेड लगभग 80-90 कैलोरी प्रदान करता है। आप देख सकते हैं कि जापान में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा चावल से बनने वाले भोजन करते हैं, लेकिन दुनिया भर में मोटापे की दर वहां सबसे कम है। भारत में भी उत्तर पूर्वी राज्यों के लोग हर समय चावल खाते हैं, लेकिन वे संभवतः देश में सबसे पतले लोग हैं।
नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। चावल (Rice Myths) एक स्वादिष्ट भोजन है, लेकिन कई बार दूसरे स्वादिष्ट भोजन की ही तरह लोग इस बात पर नियंत्रण नहीं कर पाते कि इसे कितना खाएं या कितना नहीं। यह पूरी तरह से खाने वाले की इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है। जिस तरह आप एक अधिक परांठा खाने की इच्छा को दबाते हैं, ठीक चावल खाते समय भी आपको ऐसा ही करना होगा।
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यदि आपका काम बैठकर करने वाला है या फिर आप सेडेंटरी लाइफस्टाइल के आदि हो चुके हैं, तो भी आप चावल (Rice Myths in hindi) खा सकते हैं। इसे वे लोग अपने आहार में बुद्धिमानी से शामिल कर सकते हैं, जिन्हें कम कैलोरी युक्त आहार खाने की सलाह दी जाती है।
आपने गौर किया होगा कि जब भी आप बीमार पड़ते हैं, तो आपकी मां या दादी मां आपको चावल से बनी खिचड़ी खाने को देती हैं। छोटे शिशुओं को भी सबसे पहले खाने में पतली सी चावल की खिचड़ी ही दी जाती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि चावल सबसे आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थों में से एक है। यह आसानी से पचाने योग्य और ग्लूटेन फ्री भी होता है। ऐसे में जिन्हें सेलियैक रोग (celiac) होता है, वे भी चावल को खा सकते हैं। इसलिए, यह कहना गलत है कि चावल खाने से गैस की समस्या उत्पन्न होती है।
हां, यह एक आसानी से पचाने वाला भोजन है, लेकिन यह एक अच्छी बात है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यह आंतों में अधिक देर तक नहीं रहता है। इसकी संतृप्ति वैल्यू (satiety value) को बढ़ाने के लिए आप इसे किसी भी हाई फाइबर और हाई प्रोटीन फूड के साथ खा सकते हैं।
ऐसा होता तो अधिकांश शेफ इसे क्यों पसंद करते? ऐसा इसलिए है, क्योंकि यह बेहद फ्लेक्सिबल और वर्सेटाइल है। इसे आप किसी भी तरीके से पका सकते हैं फिर चाहे वह कोई डेजर्ट ही क्यों न हो। चावल पकाने के कई तरीके हैं। आप इसके साथ मीठे या स्वादिष्ट व्यंजन पका सकते हैं। मुगलई बिरयानी, वाइल्ड मशरूम रिसोट्टो, क्रंची राइस पकोड़ा, चावल भरवां बेक्ड पेपर्स, वनिला राइस पुडिंग, खारी या फिर स्वादिष्ट फिरनी।
यह एक सबसे बड़ी मिथक है। चावल (Myths About Rice) हेल्दी कार्बोहाइड्रेट का एक अच्छा स्रोत है। दिन भर ऊर्जावान बने रहने के लिए एक आवश्यक ईंधन की तरह काम करता है। वास्तव में चावल को तो आप किसी भी सब्जी, मांस, बींस, दाल आदि के साथ मिलाकर खाते हैं, जिससे यह और भी पौष्टिक हो जाता है।
नहीं, इसे बेहद ध्यान से चुनना चाहिए। हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले लॉन्ग-ग्रेन राइस का चयन करें, क्योंकि इसमें शॉर्ट-ग्रेन राइस के मुकाबले कम ग्लाइसेमिक लोड होता है। लंबे-लंबे बासमती चावल एक अच्छी पसंद हो सकती है, क्योंकि इसमें आर्सेनिक कम होता है। सस्ते दामों में उपलब्ध चावलों में आर्सेनिक की मात्रा अधिक होती है। तो इन सभी गलत धारणाओं को भूलकर सही और संतुलित मात्रा में हर दिन चावल खाने का आनंद लें।