
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Medically Verified By: Dr. Rajinder Kumar Singal, Dr. Vineeta Singh Tandon, Dr. Chanchal Sharma
कई बार ऐसा होता है कि खाने-पीने की कोई चीज जो हम रोज खाते हैं, उसे हम अक्सर आम समझ लेते हैं चाहे उसमें कितने ही ज्यादा पोषक तत्व क्यों न हों। ठीक ऐसा ही होता है जब कोई आम खाने-पीने की चीज जैसे कोई सब्जी अगर कभी-कभी मिलती हो यानी दुर्लभ हो तो उसे अक्सर स्वास्थ्यवर्धक समझ लिया जाता है और हो सकता है कि वह सिर्फ एक सामान्य खाने-पीने की चीज हो। लहसुन भी ऐसी ही एक सब्जी है, जो हमारे देश में आमतौर पर मिल जाती है और हम अक्सर रोजाना के खानपान में इसका सेवन करते हैं। लेकिन जब बात इसके गुणों की आती है, तो यह किसी जड़ी-बूटी से कम नहीं होता क्योंकि स्वास्थ्य के लिए अनेक गुण पाए जाते हैं। इस लेख में आज हम लहसुन के बारे में जानेंगे कि लहसुन स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद है और कितनी मात्रा में इसका सेवन किया जाना चाहिए।
जिसे आप रोजाना अपने खाने में खाते हैं, उसके बारे में अच्छे से समझना भी बेहद जरूरी है। अमेरिका के National Centre For Complementary And Integrative Health के अनुसार इसका वैज्ञानिक नाम एलियम सैटिवम (Allium sativum) है और सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई अलग-अलग देशों में इसकी खेती की जाती है। लहसुन कोई आम सब्जी नहीं है, बल्कि भारत, ग्रीस और मिस्र जैसे देशों में सदियों से कई स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया है। भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों में भी लहसुन का उल्लेख मिलता है जिसमें बताया गया है कि लहसुन सिरदर्द, निमोनिया, गले की समस्याओं और पाचन संबंधी विकारों जैसी कई स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में मदद करता है।

कच्चा लहसुन स्वाद में तीखा और चटपता होता है और इसमें मौजूद खास यौगिक इसकी गंध को भी बहुत तेज बनाते हैं। वहीं पकने के बाद लहसुन का स्वाद बहुत हल्का पड़ जाता है, इससे निकलने वाली गंध तेज नहीं होती और स्वाद में भी यह हल्का मीठा व नरम हो जाता है। लहसुन का सेवन लोग दोनों अलग-अलग तरीके से करते हैं। हालांकि, भारत में लोग लहसुन को खाने के साथ पकाकर ही खाते हैं और दवा के रूप में कई बार इसे कच्चा भी चबाकर खाया जाता है। आयुर्वेद के कुछ नुस्खों के अनुसार लहसुन को भूनकर भी खाया जाता है।
भले ही लहसुन दिखने में एक बेहद छोटी सी सब्जी हो और खाने के फ्लेवर देने के लिए एक मसाले की तरह इसका सेवन किया जाता है, लेकिन इसमें कई अलग-अलग तरह के खास तत्व पाए जाते हैं। जिनके बारे में आपको इस लेख में हम बताने वाले हैं।
| संख्या | सल्फर कंपाउंड | लहसुन में इसका काम / महत्व |
| 1 | एलिन (Alliin) | यह सिर्फ कच्चे लहसुन में पाया जाता है। जब लहसुन को काटते या कुचलते हैं तो यह एलिसिन में बदल जाता है। |
| 2 | एलिसिन (Allicin) | लहसुन में तेज गंध इसी की होती है और इसमें एंटीमाइक्रोबियल और एंटीऑक्सीडेंट प्रोपर्टीज पाई जाती हैं। |
| 3 | एजोइनी (Ajoene) | यह एलिसिन से बनता है और ब्लड क्लॉट बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करने और इन्फेक्शन से लड़ने में मदद करता है। |
| 4 | डायलिल सल्फाइड (Diallyl Sulfide) | यह शरीर में एंटीऑक्सीडेंट एक्टिविटी को बढ़ाने और कुछ प्रोटेक्टिव एंजाइम्स को एक्टिवेट करने में मदद कर सकता है। |
| 5 | डायलिल डिसल्फाइड (Diallyl Disulfide) | यह एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट इफेक्ट्स के रूप की तरह काम करता है, जो सूजन ल लालिमा कम करता है। |
| 6 | डायलिल ट्राइसल्फाइड | लहसुन का एक शक्तिशाली सल्फर कंपाउंड है, जो हार्ट के लिए अच्छा माना जाता है। |
| 7 | एस-एलिल सिस्टीन (S-allyl Cysteine) | यह एक तरह का एज रिलेटेड एक्सट्रेक्ट है, जो कि एक स्टेबल एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड होता है। |
| 8 | एस-एलिल मेरकैप्टोसिस्टीन (S-allyl Mercaptocysteine) | यह खासतौर पर पुराने लहसुन में पाया जाता है, जो एक खास तरह का एंटीऑक्सीडेंट है और लिवर को हेल्दी रखने में मदद करता है। |
| 9 | मिथाइल एलिल सल्फाइड (Methyl Allyl Sulfide) | यह भी लहसुन पाने जाने वाला एक खास तरह का तत्व होता है, जो लहसुन को उसकी गंध प्रदान करता है। |
सिर्फ प्राचीन चिकित्सा पद्धतियां ही नहीं बल्कि आज का मॉडर्न मेडिकल साइंस भी लहसुन के फायदेमंद मानता है और इस पर एक नहीं बल्कि कई रिसर्च किए जा चुके हैं, जिनके बारे में हम इस लेख में जानेंगे
Scincedirectकी एक रिपोर्ट के अनुसार लहसुन पर 2026 में ही एक स्टडी की गई थी, जिसमें 1619 लोगों ने हिस्सा लिया था। इस स्टडी में यह पाया गया है कि एक निश्चित मात्रा में लहसुन का सेवन करने से Fasting Blood Glucose में कुछ हद तक कमी देखी गई और HbA1c लेवल में भी 0.53% प्रतिशत कमी देखी गई। हालांकि, कमी का आंकड़ा बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन इससे यह साबित होता है कि डायबिटीज के मरीजों के लिए लहसुन पूरी तरह से सेफ है और कहीं न कहीं ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में ही मदद करता है।
PubMed द्वारा पब्लिश की गई एक रिपोर्ट में यह साबित हुआ कि लहसुन का सही और निश्चित सेवन करना शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में मदद करता है। रिसर्च में पाया गया कि लहसुन बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और कुछ लोगों में गुल कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है। यहां तक कि कुछ हद तक लहसुन का सेवन करना ट्राइग्लिसराइड्स लेवल को कम करने में भी मदद कर सकता है।
Online Library की रिपोर्ट के अनुसार मेटा एनालिसिस के आधार पर एक रिसर्च की गई, यानी पहले की गई रिसर्चों के आधार पर एक फिर से रिसर्च कई गई। इसमें पाया गया कि हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए लहसुन अच्छा विकल्प है, जो कुछ हद तक ब्लड प्रेशर लेवल को कम करने में मदद कर सकता है। ऑनलाइन लाइब्रेरी के शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि बीपी के मरीजों के लिए लहसुन का सेवन करना अच्छा विकल्प हो सकता है।
दुनिया की सबसे भरोसेमंद मेडिकल रिसर्च संस्थाओं में से एक Cochrane द्वारा कई गई एक स्टडी में यह पाया गया है कि लहसुन का सेवन करना सर्दी-खांसी और जुकाम जैसी समस्याओं का इलाज करने में मदद करता है। इस रिसर्च में 146 स्वस्थ लोगों को 12 सप्ताह तक रोजाना या तो एलिसिन (Allicin) युक्त लहसुन का सप्लीमेंट दिया गया या फिर प्लेसीबो (डमी कैप्सूल) दिया गया। इसके बाद रिसर्च में यह पाया गया है कि जिन समूह को लहसुन दिया गया था उसमें सर्दी-जुकाम के 24 मामले आए जबकि जिन्हें डमी कैप्सूल दिए गए थे उनमें सर्दी-जुकाम के मामले 65 दर्ज किए गए। विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि यह एक अध्ययन सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं में लहसुन के इस्तेमाल से मिलने वाले फायदों की ओर संकेत करता है।

डॉ. राजेंद्र कुमार सिंगल, प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं विभागाध्यक्ष, इंटरनल मेडिसिन, बीएलके मैक्स अस्पताल के अनुसार इसमें कोई शक है कि लहसुन हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है और इससे हेल्थ को अनेक फायदे मिलते हैं। इसका उपयोग सदियों से खाने के स्वाद और प्राकृतिक इलाज के लिए किया जाता रहा है। यह हमारी इम्यूनिटी को बढ़ाता है और दिल को स्वस्थ रखता है। लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा सेवन करना स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है जो इस प्रकार हैं -
स्वास्थ्य के लिए कोई कितनी भी हेल्दी चीज क्यों न हो वह सिर्फ तब तक ही फायदेमंद होती है, जब तक उसका सेवन सही मात्रा में किया जाए। किसी भी हेल्दी समझी जाने वाली चीज का सेवन अगर जरूरत से ज्यादा मात्रा किया जा रहा है और लंबे समय से ऐसा हो रहा है, तो काफी संभावना हो सकती है कि उससे हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकती है। लहसुन के मामले में भी ठीक ऐसे ही होता है, यह सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है लेकिन अगर आप इसका जरूरत से ज्यादा मात्रा में सेवन करते हैं तो इससे स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं होने का खतरा बढ़ जाता है जिसके बारे में हमने आपको ऊपर भी बताया है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर लहसुन का सही सेवन कितना होना चाहिए, जो इस प्रकार है
डॉ. विनीता सिंह टंडन, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, ISIC मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के अनुसार लहसुन का जो सबसे बड़ा गुण होता है और वही कई बार हेल्थ को नुकसान भी पहुंचा सकता है और वह है लहसुन का ब्लड थाइनिंग वाला गुण। लहसुन में खास तरह के गुण होते है, जो खून को पतला करने का काम करते हैं। अगर जरूरत से ज्यादा खून पतला हो रहा है तो उससे स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ समस्याएं पैदा हो सकती हैं जो इस प्रकार हैं। हालांकि, Pubmed द्वारा पब्लिश की गई एक रिपोर्ट में यह तो पाया गया कि लहसुन में एंटीप्लेटलेट तत्व होते हैं, लेकिन इसका प्रभाव बहुत हम होता है और यह किसी ब्लड थिनर दवा के जितना खून पतला नहीं कर पाता है। हालांकि, लहसुन का प्रभाव हर व्यक्ति के शरीर के अनुसार अलग-अलग हो सकता है और यह भी जानना भी महत्वपूर्ण है कि अगर कोई व्यक्ति पहले से ही किसी कारण से ब्लड थिनर दवाएं ले रहा है तो ऐसे में लहसुन का सेवन करना खून पतला करने में और ज्यादा समस्याएं पैदा कर सकता है।

दिल्ली के आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और फर्टिलिटी डॉ. चंचल शर्मा के अनुसार गर्भवती महिलाओं के लिए लहसुन पूरी तरह से सुरक्षित होता है, लेकिन हर महिला को इसकी सही मात्रा का पता होना चाहिए, यानी उनके लिए कितनी मात्रा में इसका सेवन करना सुरक्षित है। अगर गर्भवती महिलाएं सही मात्रा में लहसुन का सेवन करती हैं, तो इससे उन्हें कई फायदे मिल सकते हैं क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो मां की इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। साथ ही लहसुन का सही सेवन ब्लड प्रेशर आदि को नियमित रखने में भी मदद कर सकता है।
गर्भवती महिलाएं रोजाना एक या दो कली लहसुन की खा सकती हैं, लेकिन ध्यान रहें कि लहसुन कच्चा नहीं होना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को हमेशा या लहसुन को भूनकर या फिर खाने के साथ उबालकर ही इसका सेवन करना चाहिए। क्योंकि अगर आप कच्चा लहसुन खाते हैं, तो इससे एसिडिटी यानी सीने में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
बच्चों के लिए लहसुन पूरी तरह से फायदेमंद माना जाता है और इसका सही मात्रा में सेवन करना बेहद जरूरी है, अगर जरूरत से ज्यादा लहसुन का सेवन किया जाए तो स्वास्थ्य के लिए यह नुकसानदायक भी हो सकता है। औषधी के रूप में भी बच्चे को दिन में लहसुन की दो कली से ऊपर न दें और लगातार 3 से 4 दिन तक न लें। लहसुन का अगर सही तरीके से सेवन किया जाए तो बच्चों की पाचन क्रिया को अच्छा बनाए रखने में मदद करता है और साथ ही इम्यूनिटी में भी सुधार करता है।
के चिकित्सीय समीक्षा डेटा के अनुसार, बच्चों के लिए भोजन में मसाले या सामग्री के रूप में लहसुन का सेवन पूरी तरह से सुरक्षित माना जाता है। आंकड़ों के अनुसार, बच्चों को औषधीय खुराक के तौर पर 8 सप्ताह तक प्रतिदिन 300 mg तक की सीमित मात्रा में लहसुन देना सुरक्षित पाया गया है।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य लहसुन के बारे में जानकारी देना है, जो पूरी तरह से रिसर्च पर आधारित है और डॉक्टर द्वारा बताई गई है। हालांकि, इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।