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दाल पकाने से जुड़ी ये 1 गलती बढ़ा देती है यूरिक एसिड, कहीं आप तो नहीं कर रहे ये मिस्टेक

Kis tarah ki dal khane se uric acid badhta hai: दाल पौष्टिक फूड है लेकिन, अगर दाल को सही तरीके से पकाया ना जाए तो इससे आपके जॉइंट्स में दर्द और यूरिक एसिड जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 20, 2024 6:56 PM IST

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Dal Causing high uric acid: दाल भारतीय घरों में लगभग रोज ही बनायी जाती है। दाल प्रोटीन और डाइटरी फाइबर के अलावा जिंकर और विटामिन बी12 जैसे तत्वों से भरपूर होती है। इसीलिए, हमारे घरों में बचपन से बच्चों को भी दाल का पानी (Dal ka pani) पिलाया जाता है और जैसे-जैसे बच्चे बड़े होने लगते हैं उन्हें चावल के साथ दाल (Dal-Chawal) या खिचड़ी (Khichadi) जैसी डिशेज के जरिए दाल खिलाने की शुरूआत की जाती है।

दाल खाने से पेट भी जल्दी भरता है और लोगों को बेहतर भी महसूस होता है। हालांकि, बहुत-से लोग दाल खाने के बाद कई तरह की समस्याएं (Problems due to eating dal) भी महसूस करते हैं। ऐसी ही एक समस्या है यूरिक एसिड बढ़ जाने की। कई बार दाल खाने से लोगों का यूरिक एसिड लेवल (Dal se uric acid acid bhadhna) बहुत हाई  हो जाता है। इसकी एक वजह आपका दाल पकाने का तरीका भी हो सकता है। जी हां, अगर आप  प्रेशर कुकर में दाल पकाते हैं तो इससे यूरिक एसिड बढ़ जाने का रिस्क भी बढ़ जाता है। आइए जाने क्यों प्रेशर कुकर में दाल पकाने से यूरिक एसिड बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है और क्या है दाल पकाने का सही तरीका।

क्यों कुकर में बनी दाल से बढ़ता है यूरिक एसिड (Can dal cooked in pressure cooker causes high uric acid level)

बता दें कि, शरीर में यूरिक एसिड का निर्माण प्यूरीन (Purine) नामक तत्व की वजह से होता है जो खाने-पीने की कई चीजों में पाया जाता है। दालों में भी थोड़ी मात्रा में प्यूरीन पाया जाता है लेकिन, यह उतना अधिक नहीं होता कि शरीर में यूरिक एसिड बढ़ सके। हालांकि, अगर दाल पकाने का तरीका गलत (wrong method of cooking dal) हो तो इससे आपको समस्या जरूर हो सकती है।

आपने भी देखा ही होगा कि दाल पकाते समय उसमें सफेद रंग का झाग (froth in dal) बनने लगता है और यह झाग ऊपर की तरफ जमा होने लगता है। खुले बर्तन में दाल पकाते समय यह झाग अलग कर दिया जाता है। लेकिन, जब कुकर में दाल बनती है तो यह झाग भी दाल (dal mein jhag) के साथ मिक्स हो जाता है। डाइट एक्सपर्ट कृष अशोक (Krish Ashok, Dietician) के अनुसार,  इस झाग में स्टार्च के साथ प्रोटीन और सैपोनिन पाया जाता है। यही सैपोनिन शरीर में पहुंचकर एंटीऑक्सीडेंट्स की तरह काम करता है और यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को भी कम करता है। इसीलिए, अगर आप सीमित मात्रा में दाल खाते हैं या बहुत अधिक दाल नहीं खाते तो इससे आपको कोई परेशानी नहीं हो सकती है। लेकिन, अगर आप बहुत अधिक मात्रा में सैपोनिन या प्यूरीन वाली दाल खा रहे हैं तो यूरिक एसिड की समस्या हो सकती है।

किन दालों में पाया जाता है यूरिक एसिड बढ़ाने वाला प्यूरिन (Lentils that can cause high uric acid)

राजमा, मटर, सोया, काली मटर जैसे अनाजों और इससे बनी दालों में सैपोनिन और प्यूरीन दोनों पाए जाते हैं। इसीलिए, इनका सेवन कम करना चाहिए।

वहीं, दाल में मिलायी जाने वाली प्याज, पालक, लहसुन जैसी चीजों में भी सैपोनिन पाया जाता है। यही सैपोनिन दाल में झाग बनाने का काम करता है।

यूरिक एसिड को बढ़ने से रोकने के उपाय (How to prevent high uric acid level by eating dal)

डाइटिशन कृष अशोक का कहना है कि, जब भी आप कुकर में दाल बनाएं तो नमक और हल्दी या टमाटर जैसी चीजें पहले ना मिलाएं। इन्हें दाल थोड़ा पक जाने के बाद मिलाएं।

कभी भी दाल बनाते समय उसमें थोड़ा-सा तेल मिला लें। इससे झाग कम बनेगा।

जिन भी दालों में प्यूरीन या सैपोनिन पाया जाता है उनका सेवन कम करें।

भूरे और हरे रंग की दालें (मूंग, उड़द) में प्यूरीन कम होता है। इन दालों को अपनी रोजमर्रा की डाइट में शामिल करें।

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