
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Medically Verified By: Dr Shrey Sharma, Dr. Shrey Srivastava, Divya Rawat
tulsi for health
आयुर्वेद में तुलसी को 'क्वीन ऑफ हर्ब्स' कहा गया है। इसका वैज्ञानिक नाम Ocimum tenuiflorum है। यह Lamiaceae (मिंट) परिवार का पौधा है। इसमें यूजेनॉल (Eugenol), उर्सोलिक एसिड (Ursolic Acid), रोजमेरीनिक एसिड (Rosmarinic Acid) और फ्लेवोनॉयड्स (Flavonoids) जैसे कई एक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं, जिन पर वैज्ञानिक लगातार रिसर्च कर रहे हैं। कई अध्ययनों में तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-माइक्रोबियल और तनाव कम करने वाले गुण भी मिले हैं।
ऐसे में कई लोगों के मन में तुलसी को लेकर तरह-तरह के सवाल आते हैं, जैसे- क्या रोज तुलसी की पत्तियां खाना सच में फायदेमंद है? क्या तुलसी इम्यूनिटी बढ़ाने, ब्लड शुगर कंट्रोल करने या दिल की सेहत सुधारने में मदद कर सकती है? किन लोगों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए? और अब तक हुई वैज्ञानिक रिसर्च इसके बारे में क्या कहती है? आइए, जानते हैं इन सवालों के जवाब।

तुलसी में कई गुण मौजूद होते हैं, जो अलग-अलग तरीकों से शरीर को लाभ पहुंचाते हैं, जैसे-
| तुलसी में मौजूद गुण | एक्टिव कंपाउंड | लाभ |
|---|---|---|
| एंटीऑक्सीडेंट | यूजेनॉल, रोजमेरीनिक एसिड, एपिजेनिन | फ्री रेडिकल्स से कोशिकाओं को बचाने और ऑक्सीडेटिव तनाव कम करने में मदद |
| एंटीमाइक्रोबियल | यूजेनॉल, उर्सोलिक एसिड | कुछ बैक्टीरिया, फंगस और वायरस की वृद्धि को रोकने में सहायक |
| एंटीडायबिटिक | फ्लेवोनॉयड्स, उर्सोलिक एसिड | ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने और इंसुलिन की कार्यक्षमता में सुधार करने में मदद |
| एंटी-इंफ्लेमेटरी | उर्सोलिक एसिड, बीटा-कैरियोफिलीन | शरीर में सूजन और उससे जुड़े दर्द को कम करने में मददगार |
| एडाप्टोजेनिक | यूजेनॉल, ओसिमुमोसाइड्स A और B | तनाव, चिंता और मानसिक थकान को कम करने में असरदार |
| इम्यूनोमॉड्यूलेटरी | पॉलीफेनॉल्स | शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और एंटीबॉडी प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने में सहायक |
| कार्डियोप्रोटेक्टिव | यूजेनॉल, बीटा-सिटोस्टेरॉल | हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाने और कोलेस्ट्रॉल कम करने में मददगार |
| हेपाटोप्रोटेक्टिव | लिनालूल, फ्लेवोनॉयड्स | विषैले पदार्थों और कुछ दवाओं से होने वाले लिवर नुकसान से बचाने में मदद |
| कैंसर-रोधी क्षमता | एपिजेनिन, उर्सोलिक एसिड | शुरुआती लैब और पशु अध्ययनों में कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोकने के संकेत मिले हैं, लेकिन इंसानों में पर्याप्त प्रमाण अभी उपलब्ध नहीं हैं। |
| Source: Journal of Ayurveda and Integrated Medical Sciences (JAIMS) |
तुलसी का सेवन या उपयोग कई अलग-अलग तरीकों से किया जाता है। कोई तुलसी की पत्तियां चबाता है, तो कोई तुलसी की पत्तियों का काढ़ा पीना पसंद करता है। कई लोग तुलसी के बीजों का भी उपयोग करते हैं। वहीं, अगर आयुर्वेद की बात करें तो डॉक्टर तुलसी पाउडर, अर्क और क्वाथ के रूप में इसका सेवन करने की सलाह देते हैं। लेकिन, तुलसी से बने किसी भी दवा का सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के बिल्कुल न करें।
National Library of Medicine के अनुसार, तुलसी को सेहत के लिए फायदेमंद बताया गया है। सिर्फ आयुर्वेद ही नहीं, कुछ अध्ययनों में वैज्ञानिक दृष्टि से भी इसे लाभकारी बताया गया है। तुलसी में पाए जाने वाले पोषक तत्व और औषधीय गुण ही इसे सेहत के लिए फायदेमंद बनाते हैं। जैसे-
तुलसी में मौजूद यूजेनॉल (Eugenol) सबसे ज्यादा एक्टिव कंपाउंड है। यह एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है और सूजन को कम करने में मदद करता है। कुछ अध्ययनों में यह भी साबित हुआ है कि तुलसी खाने से हृदय और मेटाबॉलिक हेल्थ को भी लाभ मिलता है। इसलिए हार्ट हेल्थ में सुधार करने के लिए आप अपनी रोज की डाइट में तुलसी की पत्तियों को शामिल कर सकते हैं।
इसमें उर्सोलिक एसिड (Ursolic Acid) होता है, यह एक नेचुरल ट्राइटरपेन कंपाउंड (पौधों और कुछ समुद्री जीवों में पाया जाता है) है। यह कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से होने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने और इसकी वजह से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने में मदद कर सकता है। कुछ अध्ययनों में साबित हुआ है कि तुलसी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण सेल्स को सुरक्षा प्रदान करने में मददगार हो सकते हैं। हालांकि, इनकी पुष्टि करने के लिए अभी बड़े अध्ययनों की जरूरत है।
इसमें ओरिएंटिन (orientin) होता है, जो आमतौर पर तुलसी, बांस के पत्तों और पैसिफ्लोरा जैसे पौधों में पाया जाने वाला एक नेचुरल फ्लेवोनोइड है। यह एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी के रूप में काम करता है। यह हार्ट हेल्थ में सुधार करता है और शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। तुलसी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर को सूजन से बचाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, तुलसी शरीर की सूजन को पूरी तरह से ठीक कर देता है, इसके बारे में अभी ज्यादा वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
blood sugar
तुलसी को डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद माना जाता है। कई शोधों में साबित हुआ है कि तुलसी का अर्क लेने वाले लोगों में ब्लड शुगर लेवल कम हो सकता है। हालांकि, इस पर अभी वैज्ञानिक अध्ययन सीमित हैं। इस पर अभी और शोधों की जरूरत है। अगर आपको डायबिटीज है, तो आप सीमित मात्रा में तुलसी का सेवन कर सकते हैं। लेकिन, अगर हर वक्त ब्लड शुगर लेवल बढ़ा हुआ रहता है तो तुलसी की पत्तियों का सेवन एक्सपर्ट की सलाह पर ही लें।
Vohra आयुर्वेदिक हॉस्पिटल की फाउंडर और डॉ. उपासना वोहरा बताती हैं कि तुलसी त्वचा के लिए भी फायदेमंद होती है। तुलसी झाइयों को मिटाने में असरदार हो सकती है। अगर आप झाइयों से परेशान हैं, तो इसके लिए 8-10 तुलसी की पत्तियां लें और इन्हें रातभर आधे गिलास पानी में भिगोकर रख दें। सुबह इन पत्तियों को पेस्ट बनाएं और दिनभर में इसे 3 से 4 बार चेहरे पर लगाएं। इससे त्वचा की रेडनेस और झाइयों को कम करने में काफी मदद मिल सकती है। हालांकि, इस पर कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
आपको बता दें कि तुलसी पर अब तक कई वैज्ञानिक अध्ययन किए जा चुके हैं। National Library of Medicine (nlm) के अनुसार, तुलसी में मौजूद नेचुरल कंपाउंड शरीर को तनाव कम करने में मदद कर सकते हैं। इससे हार्ट हेल्थ में सुधार हो सकता है और ब्लड शुगर-कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित हो सकता है। इतना ही नहीं, तुलसी को इम्यूनिटी बढ़ाने और सूजन कम करने में भी प्रभावी माना गया है।
हालांकि, तुलसी के इन लाभों की पूरी तरह से पुष्टि करने के लिए बड़े स्तर पर शोध की जरूरत है। हेल्थ एक्सपर्ट्स और वैज्ञानिकों का कहना है कि तुलसी को स्वस्थ जीवन के लिए आहार में शामिल किया जा सकता है। लेकिन, यह किसी बीमारी का इलाज नहीं है और इसे किसी दवा की जगह देना सही नहीं है।
HCL हेल्थकेयर की डाइटिशियन दिव्या रावत बताती हैं कि अगर कोई व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ है, तो वह सीमित मात्रा में तुलसी का सेवन कर सकता है। हालांकि, इसकी अधिक मात्रा लेने से बचना चाहिए। उनके अनुसार, तुलसी की ताजी पत्तियां खाना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है। वहीं, तुलसी की चाय या काढ़ा भी सीमित मात्रा में लिया जा सकता है।
तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट्स और अन्य कई बायोएक्टिव यौगिक पाए जाते हैं, जो शरीर के सामान्य स्वास्थ्य को सपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं। कई वैज्ञानिक अध्ययनों में यह भी संकेत मिले हैं कि तुलसी इम्यून सिस्टम के सामान्य कार्य को सपोर्ट करने और तनाव कम करने में सहायक हो सकती है। हालांकि, इसे वेट लॉस का उपाय या किसी बीमारी का इलाज मानना सही नहीं है। डाइटिशियन दिव्या रावत सलाह देती हैं कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या ब्लड थिनर की दवाएं लेने वाले लोगों को तुलसी का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
शारदा हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा के सीनियर कंसल्टेंट-इंटरनल मेडिसिन डॉ. श्रेय श्रीवास्तव बताते हैं कि तुलसी में यूजेनॉल (Eugenol), फ्लेवोनॉयड्स (Flavonoids) और रोजमेरीनिक एसिड (Rosmarinic Acid) जैसे कई बायोएक्टिव यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में संकेत मिले हैं कि तुलसी शरीर के इम्यून सिस्टम के सामान्य कार्य को सपोर्ट करने में मदद कर सकती है। हालांकि, इसे 'इम्यूनिटी बूस्टर' या 'नेचुरल मेडिसिन' कहना पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।
dr shrey shrivastava
डॉ. श्रेय श्रीवास्तव बताते हैं कि तुलसी सेहत के लिए लाभकारी हो सकती है और स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बन सकती है, लेकिन इसे किसी भी बीमारी का इलाज नहीं माना जा सकता है। तुलसी, डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का विकल्प भी नहीं हो सकता है। सिर्फ तुलसी की पत्तियां चबाने या इसका काढ़ा पीने से कैंसर, डायबिटीज या बीपी जैसी गंभीर बीमारियां ठीक नहीं हो सकती हैं।
डॉ. श्रेय आगे बताते हैं कि जो लोग डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या ब्लड थिनर की दवाएं ले रहे हैं, उन्हें नियमित रूप से तुलसी का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल, सिरसा के आयुर्वेदाचार्य डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, आपको अपनी प्रकृति के आधार पर ही तुलसी की पत्तियों का सेवन करना चाहिए। जैसे
| शरीर की प्रकृति | तुलसी की पत्तियों की संख्या |
| कफ प्रकृति | 10-12 |
| वात प्रकृति | 4-5 |
| पित्त प्रकृति | 2-3 |

हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि तुलसी किसी बीमारी का इलाज नहीं है। लेकिन, इसे रोज की डाइट में शामिल किया जा सकता है, क्योंकि यह इम्यूनोमॉड्यूलेटर है। हालांकि, कुछ लोगों को तुलसी के सेवन से परहेज करना चाहिए। जैसे-
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कई लोगों के मन में तुलसी से जुड़े अलग-अलग सवाल होते हैं, आइए जानते हैं इस सवालों के जवाब-
डॉ. श्रेय शर्मा बताते हैं कि तुलसी खाने से डायबिटीज खत्म नहीं हो सकती है। यह इम्यूनोमॉड्यूलेटर होती है, जो शरीर को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर बीमारी से लड़ने में मदद कर सकती है। डायबिटीज रोगी तुलसी की पत्तियों और बीज दोनों का उपयोग कर सकते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि अब आपको शुगर कम करने की दवा नहीं लेनी है। आपको डायबिटीज की दवाइयां भी नियमित रूप से लेनी जरूरी हैं।
जी हां, तुलसी की पत्तियों का सेवन खाली पेट किया जा सकता है। दूध के साथ तुलसी की पत्तियों का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। एक स्वस्थ व्यक्ति रोजाना 4 से 5 तुलसी की पत्तियां चबा सकता है।
डॉ. श्रेय बताते हैं कि तुलसी की चाय सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती है। लेकिन, इस चाय को हेमंत और वसंत ऋतु में पीना लाभकारी माना जाता है। पित्त दोष बढ़ने पर तुलसी का काढ़ा पीने से परहेज करना सही है।
आयुर्वेद के अनुसार, तुलसी की तासीर गर्म होती है और यह पित्त दोष को बढ़ा सकती है। इसलिए प्रेग्नेंट महिलाओं को तुलसी का सेवन करने से परहेज करना चाहिए।

डॉ. श्रेय शर्मा बताते हैं कि सर्दी-जुकाम होने पर तुलसी का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। अगर आपको अक्सर ही सर्दी-जुकाम जैसी समस्याएं रहती हैं, तो तुलसी की चाय या काढ़ा पीना फायदेमंद हो सकता है। इससे गले की खराश में भी आराम मिल सकता है।
तुलसी सिर्फ इम्यून सिस्टम के सामान्य कार्य को सपोर्ट करने में मदद कर सकती है। लेकिन, यह खांसी या किसी भी बीमारी का इलाज नहीं है। इसलिए खांसी जैसे लक्षण को लंबे समय तक सिर्फ घरेलू नुस्खों के भरोसे ठीक करना सही नहीं है। लंबे समय तक होने वाली खांसी टीबी, अस्थमा समेत कई रोगों का संकेत हो सकता है। इसलिए अगर आपको सर्दी-जुकाम, खांसी या गले में खराश जैसी समस्याएं हो तो भी डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।
Disclaimer: तुलसी भले ही औषधीय गुणों से भरपूर होती है। आयुर्वेद में इसे सेहत के लिए बेहद लाभकारी भी बताया गया है। लेकिन, तुलसी को किसी बीमारी के इलाज के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता है। तुलसी को लेकर अभी वैज्ञानिक प्रमाण भी सीमित हैं। हालांकि, तुलसी को इम्यूनोमॉड्यूलेटर माना जाता है जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है। लेकिन, तुलसी का सेवन बिना एक्सपर्ट की सलाह के लंबे समय तक बिल्कुल नहीं करना चाहिए।