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मीठा और तीखा तो लगभग हर रोज हो जाता है पर याद कीजिए कि कड़वा कितने दिनों से नहीं खाया। प्रकृति में मौजूद पांचों स्वाद हमारे शरीर के लिए अत्यावश्यक है। इसलिए जीभ पर इन्हें पहचानने की खास जगह भी निर्धारित है। अगर वजन बहुत बढ़ गया है तो हो सकता है कि आपके आहार में कड़वा स्वाद नदारद हो। आइए जानें क्या है स्वाद का फंड और क्यों है यह सेहत के लिए जरूरी। किशमिश से भी ज्यादा फायदेमंद है, किशमिश जैसा दिखने वाला यह मेवा
आपकी जीभ को सब पता है
जीभ स्वाद अनुभव करने का प्राथमिक अंग है, जीभ की ऊपरी सतह पेपिला और स्वाद कलिकाओं से ढंकी होती है। इसकी ऊपरी सतह को देखने पर हमें कुछ दानेदार उभार दिखाई देते हैं, जिन्हें स्वाद कलिकाएं कहते हैं। ये स्वाद कलिकाएं कोशिकाओं से बनी है। इनके ऊपरी सिरे से बाल के समान तंतु निकले होते हैं। ये स्वाद कलिकाएं चार प्रकार की होती है, जिनके द्वारा हमें चार प्रकार की मुख्य स्वादों का पता चलता है। नमकीन, मीठा, कड़वा, खट्टा, तीखा और कसैला । जीभ का आगे का भाग नमकीन, मीठे और तीखे स्वाद का अनुभव कराता है। पीछे का भाग कसैले तथा कड़वे स्वाद का और किनारे का भाग खट्टे स्वाद का अनुभव कराता है। जानिए क्या है जिलेटिन और कैसे किया जाता है सेहत के लिए इसका इस्तेमाल
सेहत के लिए स्वाद के लाभ
मीठा
मीठे में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा और पानी काफी मात्रा में होता है। यह शरीर के सात प्रमुख घटक प्लाज्मा, रक्त, वसा, मांसपेशियां, हड्डियां, मज्जा और प्रजनन द्रव के निर्माण में उपयोगी है। मीठा, दूध, क्रीम, घी, साबुत अनाज, चावल, गेहूं, पके फलों, सब्जियों जैसे गाजर, शकरकंद आदि में होता है। मीठे खाद्य पदार्थ उतकों को पोषण प्रदान करते हैं, तंत्रिकाओं को शांत कर मूड अच्छा करते हैं और ऊर्जा बढ़ातें हैं। यह त्वचा, बाल और आवाज के लिए भी अच्छे होते हैं। अपनाएंगे ये टिप्स तो इस बार सर्दियों में नहीं बढ़ेगा आपका वजन
नमकीन
नमक के बिना न खाने में स्वाद आता है, न ही शरीर ढंग से काम कर पाता है। यह तंत्रिका तंत्र, मांसपेशियों की गति और कोशिकाओं में पोषक तत्वों के परिवहन के लिए आवश्यक है। उतकों में चिकनाई बनाए रखने और पाचन तंत्र को सही रखने के लिए भी यह जरूरी है। इन दिनों कोल्ड स्टोर में रखे जाने वाले खाद्य पदार्थ, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, पिज्जा, चीज, सूप व फास्ट फूड का सेवन बढ़ गया है, जिसमें सोडियम अधिक होता है, जो नमक का ही घटक है।
खट्टा
इमली, आंवला, अचार, नींबू, संतरा, दही, सिरका जैसी खट्टी चीजों को लोग चटखारे लेकर खाते हैं। खट्टा भोजन भूख बढ़ाता है और पाचक रसों का स्राव बढ़ाकर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है, उतकों को पोषण देता है और लवणों के अवशोषण में मदद करता है। यह शरीर को एनर्जी देता है, प्यास बुझाता है और अम्लता बनाए रखता है। खट्टे खाद्य पदार्थ उतकों की सफाई करते हैं। जब लंबी बीमारी के बाद मुंह का स्वाद बिगड़ जाता है, तो खट्टा खाने से टेस्ट बड्स में नई जान आती है। खट्टा भोजन दिल के लिए भी अच्छा होता है, यह हृदय को बल देकर रोगों से बचाता है। खट्टा भोजन गर्मियों के ताप में आराम पहुंचाता है, इसलिए गर्मियों में खट्टा खाने की सलाह दी जाती है। सर्दियों में जब गर्म तासीर का खाना लगातार खाने से शरीर की हीट बढ़ने लगती है तब भी खट्टा खाने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेद के अनुसार जिनमें खून की कमी होती है, उन्हें खट्टा खाने का अधिक मन करता है। जानिए क्यों वजन घटाने में मददगार है ग्लूटेन फ्री डायट
तीखा
हमारे देश की पहचान है, यहां के मसाले और उनकी महक। हम भारतीय मसालेदार भोजन के बेहद शौकीन हैं। वैसे मसाले शरीर के लिए सेहतमंद नुस्खे की तरह हैं। रक्त को साफ करते हैं, प्रतिरोधक तंत्र को मजबूत बनाते हैं, शरीर में एंटीबॉडी की मात्रा बढ़ाकर शरीर को बाहरी रोगाणुओं से बचाते हैं। तीखा भोजन मांसपेशियों में दर्द को भी कम करता है।
कसैला
कच्चे आलू का स्वाद कसैला होता है। भोजन का यह स्वाद अन्य पाचक रसों को संतुलित करने का काम करता है। इस स्वाद की खासियत यह है कि यह किसी भी तरह के स्वाद में ढल जाता है। इसलिए विशेषज्ञ कभी कभी बिना अतिरिक्त स्वाद के सादा भोजन करने की सलाह देते हैं।
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मेथी, करेला और नीम तो बहुत खास हैं। इनका काम शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का है। @Shutterstock.[/caption]
कड़वा
अन्य सभी स्वाद तो हम अपने भोजन में ग्रहण कर लेते हैं पर कड़वा उस तरह शामिल नहीं हो पाता। इसलिए आयुर्वेद में कड़वे स्वाद को विशेष स्थान दिया गया है। इनमें मेथी, करेला और नीम तो बहुत खास हैं। इनका काम शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का है। आधुनिक चिकित्सा शास्त्र के अनुसार कड़वे भोजन में कई अमीनो एसिड, विटामिन और मिनरल होते हैं, जो दिमाग को तरोताजा करते हैं। कड़वे खाद्य पदार्थ उतकों से विषैले पदार्थों को बाहर निकाल पेट हल्का करते हैं। लीवर दुरुस्त रहता है। इससे वजन करनेे में भी मदद मिलती है।
ऐसे करें डायट में शामिल
इसलिए यदि आप कड़वा स्वाद अपने भोजन में शामिल नहीं कर पा रहे हैं तो माह में एक बार इसे उपचार की तरह जरूर शामिल करें। इसके लिए आप चाहें तो नीम का रस पी सकते हैं या करेले की सब्जी बना सकते हैं। भरवां करेले डीप फ्राई और मसालों से भरपूर होने के कारण बहुत अच्छा विकल्प नहीं हैं। बच्चों को हरी मेथी के परांठे या रोटी खिलाई जा सकती है। कढ़ी, खट्टे आलू की सब्जी में मेथी दाने का तड़का लगाया जा सकता है। पर इसे फेंके नहीं, भोजन के साथ ग्रहण भी करें तभी इसका फायदा है।