क्‍या आपको भी यह लगता है कि 'बच्‍चे खाना नहीं खाते', तो एक बार दोबारा सोचिए

बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की चिंता में कहीं हर मां वाली गलती आप भी तो नहीं कर रहीं ?

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Written By: Yogita Yadav | Updated : January 17, 2019 5:39 PM IST

आजकल हर घर में एक संवाद गूंजता रहता है कि बच्‍चे खाना नहीं खाते। ज्‍यादातर अभिभावक इस बात से परेशान रहते हैं कि बच्‍चे घर का बना खाना खाने की बजाए जंक फूड को पसंद करने लगे हैं। जिससे उनकी सेहत पर गलत असर पड़ रहा है। छोटी उम्र में ही बच्‍चे गंभीर और लाइफ स्‍टाइल संबंधी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। पर यहां हमारी जरूरत फि‍क्र करने की बजाए घर की खानपान की आदतों को बदलने की होनी चाहिए। जबकि हम उल्‍टा करने लगते हैं। क्‍या ज्‍यादातर अभिभावकों की तरह आप भी तो नहीं करते यह गलती।

विचार भी हैं महत्‍वपूर्ण

भारतीय चिंतन और दर्शन परंपरा में आहार के साथ विचारों का भी बहुत महत्‍व है। बच्‍चों की फि‍क्र में कई बार हम घर का माहौल ही इतना नकारात्‍मक बना देते हैं कि बच्‍चे ही नहीं बड़े भी पोषण से दूर होने लगते हैं। आइए जानते हैं कि वह कौन सी गलती है, जो हममें से ज्‍यादातर करते हैं।

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करते हैं यह गलती

अकसर बच्चों के पोषण की चिंता में हम यह भूल जाते हैं कि हम उन्हेंम क्याक सिखा रहे हैं। अगर टिफि‍न में आधी चपाती भी वापिस आ जाती हैं तो इसका दुख पूरे घर में बयां किया जाता है कि बच्चेप ने तो आजा खाना खाया ही नहीं , यही बात बढ़ते-बढ़ते खाता ही नहीं है पर पहुंच जाती है। जबकि असल में सिर्फ आधी चपाती बची थी। ऐसे में हमारे विचारों से, हमारी स्मृबतियों से उस आधी चपाती का पोषण भी गायब हो जाता है, जो बच्चेा ने ग्रहण की थी। यही विचार कुकिंग के समय भी साथ रहते हैं और घर भर की स्मृचतियों में दाखिल हो जाते हैं।

रखें सही जानकारी

यह हर माता –पिता की जिम्‍मेदारी है कि वह बच्‍चों के बारे में सही जानकारी रखें। उन्‍होंने क्‍या खाया है और उन्‍हें क्‍या खाना चाहिए यह भी। इसके साथ ही यह भी कि हम उन्‍हें क्‍या दे रहे हैं। अगर हम बच्‍चों के अच्‍छे व्‍यवहार पर कुकीज ईनाम में देंगे तो निश्चित ही यह सिद्ध हो जाता है कि कुकीज शेष सभी आहार से अच्‍छी है। बच्‍चे बहुत कुछ हमारे व्‍यवहार से भी सीखते हैं। इसलिए घर में बच्‍चों के खाना न खाने का शोर मचाने की बजाए जरूरी है कि घर की खानपान की आदतों को बदलने का प्रयास करें।

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बच्चों की डायट में रखें इन चीजों का ध्‍यान

कैलोरी- पांच साल से ऊपर के बच्चे को पूर्ण कैलोरी मिलनी चाहिए जिससे बच्चा अधिक से अधिक सक्रिय रह सकें। हाई कैलोरी देने का मतलब यह नहीं कि आप बच्चे को तला हुआ खाना खिलाएंगे बल्कि आपको बच्चे को दूध देना चाहिए और साथ ही अनाजयुक्त खाद्य पदार्थ देने चाहिए।

प्रोटीन- बढ़ते बच्चों के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी होता है।  बच्चे की मांसपेशियों के सही से विकास के लिए और हड्डियों में मजबूती लाने के लिए प्रोटीन बहुत आवश्यरक होता है। इसके लिए बच्चे को पनीरयुक्त  खाद्य पदार्थ और अंडे, मांस, मछली इत्यादि देने चाहिए।

विटामिंस एंड मिनरल्स- बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए जरूरी है उन्हें विटामिन और मिनरल भरपूर दिए जाएं। बच्चों को ऐसे पौष्टिक पदार्थ देने चाहिए जिनमें कैल्शियम भरपूर मात्रा में हो। विटामिन और आयरन के लिए बच्चों को अधिक से अधिक हरी पत्तेदार सब्जियां देनी चाहिए।

फल- फलों में विटामिन, आयरन और अन्य पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं। बच्चों को अधिक से अधिक फलों का जूस और मौसमी फलों का सेवन करवाना चाहिए। बच्चों को अंगुर फल, सेब, संतरा इत्‍यादि फलों की सलाद काटकर भी खिलाई जा सकती है।

पानी और फाइबर- बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए पानी का महत्‍व बहुत अधिक है, ऐसे में बच्चे को अधिक से अधिक पानी पिलाना चाहिए और सूप जैसे तरल पदार्थों का सेवन करवाना चाहिए। इसके साथ ही बच्चे को फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ देने चाहिए जिससे बच्चे में पानी की कमी न हो।

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