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Written By: Yogita Yadav | Published : January 29, 2019 2:01 PM IST
ऐसा भी देखने में आया है कि ब्रोकोली और एवाकाडो जैसे विदेशी फल-सब्जियां तो हमारी रसोई में आ जाते हैं, लेकिन शकरकंद और बाजरा जैसे देसी स्वास्थ्यवर्धक फूड रसोई से गायब होने लगते हैं। ©Shutterstock.
मल्टी कल्चर और इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी के कारण हमारे पास बहुत सी सूचनाएं आ रहीं हैं। हम खाने में तरह-तरह के प्रयोग भी करते हैं। इसमें कई बार ऐसा भी देखने में आया है कि ब्रोकोली और एवाकाडो जैसे विदेशी फल-सब्जियां तो हमारी रसोई में आ जाते हैं, लेकिन शकरकंद और बाजरा जैसे देसी स्वास्थ्यवर्धक फूड रसोई से गायब होने लगते हैं। इसके पीछे की बड़ी वजह मॉल संस्कृति है। पर सतर्क लोग जानना चाहते हैं कि सेहत के लिए इनमें से क्या बेहतर है। क्या ये फूड एक-दूसरे के प्रतिस्पद्धी हैं अथवा दोनों तरह के फूड मिलकर देते हैं सेहत को सही पोषण। आइए जानते हैं क्या है सही।
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पोषण युक्त आहार
पोषण में प्रत्येक खाद्य की अपनी भूमिका है। वास्तव में किसी भी न्यूनतम प्रसंस्करित, अच्छी तरह से उपजाये गये खाद्यान्न को सुपर खाद्य के रूप में बदला जा सकता है। उच्च फाइबर, कैल्शियम और फाइटोकेमिकल तत्व के कारण कोई भारत से‘फिंगर मिलेट’ या रागी को सुपर खाद्य कह जा सकता है। भारत में, लेबल सुपर खाद्य को बाजरा, राजजीरा, तुलसी के बीज और इसी तरह के अन्य खाद्यों जैसे बिसरा दिये गये खाद्य के साथ जोड़ा जा रहा है।
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क्या है और बेहतर
क्विनोआ बनाम राजगीरा - क्विनोआ और राजजीरा, दोनों अनाज हैं। इन्हें छद्म अनाज भी कहा जा सकता है। क्विनोआ जहाँ एक दुर्लभ और विदेशी भोजन के रूप में देखा जाता है, जबकि राजगीरा पर लोग ध्यान नहीं देते। राजगीरा, जिसे रामदाना भी कहा जाता है, जैन और अन्य समुदायों में उपवास और अन्य अनुष्ठानों के दौरान पसंदीदा खाद्य है।
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चिआ बीज बनाम बीज
चिआ पश्चिम के विपणन प्रयासों का एक क्लासिक सह उत्पाद है। आमतौर पर, चिआ तुलसी के समान है क्योंकि दोनों ओमेगा-3 फैटी एसिड और आहार फाइबर के समृद्ध स्रोत हैं। हालाँकि, जब कीमत की बात आती है, तो तुलसी बीज की कीमत 145 रुपये (250 ग्राम) के मुकाबले चिआ बीज की कीमत 350 रुपये (250 ग्राम) है।
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काएल बनाम गोभी
गोभी भारत में कोई लुभावना खाद्य नहीं है और घरों में एक आम भोजन है। काएल और गोभी दोनों को एक ही जाति ब्रासिका ओलेरासिया से निकली हैं। गोभी विटामिन सी और फाइटोकेमिकल का एक समृद्ध स्रोत है, जबकि काएल में बी कॉम्प्लेक्स विटामिन का अच्छा स्रोत है।
मोटा अनाज बनाम जई
बाजरा अपेक्षाकृत मोटे अनाज में शामिल है। छोटे अनाजों की नौ किस्म है, जिन्हें अनाज की फसलों के रूप में भी उगाया जाता है। ग्लोबल वार्मिंग और पानी की कमी बढ़ने के साथ, बाजरा भोजन की कमी को समाप्त कर सकता है और आबादी को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने वाली फसलों में से एक हो सकता है। यद्यपि पूरे भारत में शुष्क भूमि के किसानों द्वारा नौ किस्म का मोटा अनाज उगाया जाता है। लेकिन उनमें से कुछ विलुप्त होने के कगार पर हैं। यद्यपि पश्चिम में जई का विपणन एक स्वास्थ्यवर्धक नाश्ता दलिया के रूप में अच्छी तरह से किया गया है, लेकिन जई की तुलना में बाजरा में दो गुना अधिक आहार फाइबर होता है जो बेहतर तृप्ति मूल्य प्रदान करता है।
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