सिर्फ पेट भर के खाना खा लेना ही काफी नहीं है, जानें कौन सी गलतियां आपको अंदर से कर रही कमजोर
Dietary Mistakes in Hindi: खाना शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन खाने में आप क्या खा रहे हैं और उससे आपको कौन से पोषक तत्व मिल रहे हैं इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है, जिसके बारे में हम इस लेख में जानेंगे।
Unhealthy Diet Habits: यह बहुत ही संवेदनशील और पेचीदा मुद्दा है, जिसे भारतीय रसोई में ज्यादातर लोग इग्नोर कर रहे हैं। ग्रामीण भारत हो या शहरी जीवन, दोनों का खान पान अलग-अलग हो सकता है लेकिन सोच एक ही तर्क को फॉलो करती है। वह तर्क है कि खाने से पेट भरना जरूरी है, लेकिन इस बात पर बहुत ही कम ध्यान दिया जाता है कि पेट भरने के लिए आपने जो खाया है उसमें पोषक तत्वों की मात्रा आखिर कितनी है। डॉ. महाबुर रहमान, एम.एस, डी.जी.ओ, फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, ऑब्सटेट्रिशियन और गायनेकोलॉजिस्ट, सिटी मैटरनिटी एवं फर्टिलिटी क्लिनिक, कृष्णा नगर, अगरतला, त्रिपुरा ने इस बारे में काफी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की, उन्होनें बताया कि भारत के विकिसत होते हुए शहरों में आधुिनक जीवन का मतलब है, अलग-अलग तरह का भोजन करना और आरामदायक जीवनशैली में जीवन यापन करना। आम धारणा होती है कि जिन लोगों को अलग-अलग तरह का खाना और रेस्टोरेंट उपलब्ध होते हैं, उन्हें पूरा पोषण मिलता है। लेकिन सच्चाई यह नहीं है। पेट भरा हुआ होने का मतलब यह नहीं होता कि शरीर को पूरा पोषण मिल रहा है। शहरों में रहने वाले कई लोग, खासकर महिलाएं पोषण की कमी से जूझ रही हैं, जो अक्सर सामने नहीं आती है।
स्वस्थ आहार के बारे में गलत धारणा
भारत में काफी संख्या में लोग पोषण की कमी से क्यों जूझ रहे हैं? इस कमी का कारण है स्वस्थ आहार के बारे में गलत धारणा। अपने व्यस्त जीवन और बदलते स्वाद के कारण लोगों का झुकाव आरामदायक खाने, प्रोसेस्ड आहार, और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स की ओर हो गया है। हो सकता है कि इस तरह का खाना स्वादिष्ट हो और आसानी से बन सकता हो लेकिन इसमें शरूर के लिए जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स नहीं होते हैं और वे सिर्फ शरीर को कैलोरी ही दे पाते हैं। लोग खाना तो भरपूर खाते हैं, लेकिन उसकी क्वालिटी को नजरअंदाज कर देते हैं। इसलिए पूरा खाना खाने के बाद भी शरीर में पोषण की कमी रह जाती है।
महिलाओं में बढ़ता एनीमिया
रिसर्च के आंकड़ों में लोगों में तेजी से हो रही पोषण की कमी को उजागर किया है। खासतौर पर शहरों में रहने वाली महिलाएं एनीमिया का शिकार बनती जा रही हैं, जिसका कारण आयरन का पर्याप्त सेवन न करना है। समस्या यहीं तक सीमित नहीं है और भी बहुत से न्यूट्रिएंट्स व माइक्रोन्यूट्रिएंट्स हैं जो शरीर को सही आहार व लाइफस्टाइल की मदद से पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहे हैं और शरीर में उनकी कमी होती जा रही है -
- विटामिन डी की कमी - कैल्शियम को अवशोषित करने के लिए जरूरी
- विटामिन बी12 - लाल रक्त कोशिकाएं, डीएनए और नर्वस सिस्टम के लिए जरूरी
- फोलिक एसिड - नए सेल्स बनाने और डीएनए को हेल्दी रखने के लिए जरूरी
- कैल्शियम - हड्डियों के लिए जरूरी
- ओमेगा-3 फैटी एसिड - सेल्स मेम्बरेन फंक्शन को हेल्दी रखने, ट्राइग्लिसराइड को कम करने के लिए जरूरी
- कोलीन - दिमाग के विकास के लिए महत्वपूर्ण
- आयोडीन - नवर्स सिस्टम को हेल्दी रखने के लिए जरूरी
- जिंक - इम्यूनिटी और सेल्स के विकास के लिए जरूरी
- विटामिन सी - आयरन को शरीर में अवशोषित करने के लिए जरूरी
- मैग्नीशियम - न्यूरोट्रांसमीटर को हेल्दी रखने और शरीर में एनर्जी बनाने के लिए जरूरी
खान-पान का लगातार पड़ता असर
ऊपर बताए गए ये पोषक तत्व अलग-अलग कार्यों के लिए बेहद जरूरी होते हैं और शरीर में इनकी कमी होना कोई छोटी बात नहीं। शरीर में इनकी कमी होना एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन रही है और ऐसा सिर्फ खाने-पीने की बदलती आदतों के कारण हो रहा है। जो खाना हम खा रहे हैं वह एक बार के लिए पेट तो भर देता है लेकिन शरीर के लिए जरूरी विटामिन और मिनरल्स की आपूर्ति नहीं कर पाती हैं।
महिलाओं में ज्यादा असर
देखा गया है कि इन पोषक तत्वों से होने वाली समस्याएं महिलाओं में ज्यादा पाई जाती हैं और उनमें इनसे होने वाली समस्याएं लंबे समय तक देखी जाती हैं। इनके कारण लगातार थकान और कमजोरी बनी रहती है, जिसे अक्सर तनाव और वर्क लोड का नतीजा मान लिया जाता है। ये कमियां इम्युनिटी को कमजोर कर देती हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए ये कमियां और अधिक खतरनाक होती हैं, जिसका असर उनके गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ता है। उसके मानसिक विकास में दिक्कत आती है, इम्युनिटी कमजोर रह जाती है, तथा गभार्वस्था एवं प्रसव के दौरान खतरा बढ़ जाता है। शिशु को स्वास्थ्य की ऐसी समस्याएं हो सकती हैं, जो आजीवन ठीक नहीं होती हैं और अगली पीढ़ी को भी प्रभावित करती हैं।
नजरअंदाज करना बंद करें
भारत के शहरों में फैली यह धारणा कि पेट भर लेने या पूरी कैलोरी लेने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है, यह एक अधूरी जानकारी है जो खतरनाक हो सकती है। लोगों के बीच एक हैल्थ केयर प्रोफेशनल यानी डॉक्टर व डाईटीशियन आदि की सही सलाह होनी चाहिए ताकि खाने और उनमें मौजूद पोषक तत्वों की प्रति उचित रूप से जागरूकता बढ़ाई जा सके। पेट भरा होने का मतलब यह नहीं कि शरीर को पूरा पोषण मिल रहा है, यह जागरूकता एक स्वस्थ और मजबूत भारत के निमार्ण की ओर पहला कदम है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।