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गाय और बकरी के दूध में से कौन है ज्यादा फायदेमंद, आयुर्वेद के अनुसार जानिए किन रोगों में कौन सा दूध पीना है लाभदायक

आयुर्वेद में गाय और बकरी के दूध को औषधि माना गया है। गाय और बकरी के दूध को रोगों के उपचार में सेवन करने की सलाह दी जाती है। अगर आप इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि गाय और बकरी के दूध (Goat Milk vs Cow Milk Ayurveda) में कौन ज्यादा फायदेमंद है, तो इस लेख को विस्तार से पढ़ें।

Goat Milk vs Cow Milk in Hindi: दूध पीना स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है। स्वास्थ विशेषज्ञ भी रोजाना धूप पीने की सलाह देते हैं, क्योंकि इसमें प्रोटीन, कैल्शियम के साथ ही कई विटामिन और मिनरल्स मौजूद होते हैं। जो हमारे शरीर को पोषण प्रदान करने के साथ ही हड्डियों को भी मजबूत बनाते हैं। आयुर्वेद में औषधीय रूप से कई डेयरी उत्पादों का उपयोग किया जाता है, विशेष रूप से रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार के लिए, और स्वास्थ्य लाभ और उत्थान को बढ़ावा देने के लिए। इनमें दूध का काढ़ा, औषधीय मक्खन और घी, और अन्य विशेष उत्पाद शामिल हैं। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ. श्याम वीएल (Dr. Shyam VL) बीएएमएस, एमडी, एमफिल मानें तो सिर्फ युवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि बुजुर्गों के लिए और उन लोगों को भी डेयरी उत्पादों का सेवन करना चाहिए जो किसी भी तरह से शारीरिक रूप से कमजोर हैं या उन्हें ताकत की जरूरत है।

आयुर्वेद के अनुसार दूध पीने का सही तरीका - How to Drink Milk According to Ayurveda

जब दूध पीने की बात है तो विशेषज्ञ गाय या बकरी का दूध पीने का सुझाव अधिक देते हैं। मगर अक्सर लोग इसको लेकर काफी कंफ्यूज रहते हैं की गाय या बकरी दोनों में से किसका दूध ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक है? चिंता न करें, हम आपको इसकी पूरी जानकारी देंगे। लेकिन इससे पहले कि हम आगे बढ़ें आइए जानते हैं आयुर्वेद ग्रंथों के अनुसार दूध के सेवन को लेकर कुछ सामान्य दिशानिर्देश:

  • दूध को इस्तेमाल करने से पहले उबालना चाहिए क्योंकि कच्चा दूध पचने में भारी होता है।
  • अत्यधिक उबला हुआ दूध बहुत भारी होता है, इसलिए कभी-कभी अग्नि (Agni) का उचित ध्यान रखते हुए इसका उपयोग करना चाहिए।
  • दूध में आधी मात्रा में पानी डालकर उसे उबालकर, ठंडा करके गुनगुना होने पर पीना अमृत के समान होता है।
  • सुबह के समय निकाला गया दूध भारी होता है क्योंकि पशु रात में न्यूनतम शारीरिक गतिविधि करते हैं, जबकि शाम को निकाला गया दूध हल्का होता है क्योंकि दिन में पशु शारीरिक गतिविधियों से लिप्त होता है।
  • खट्टे स्वाद, दुर्गंध और असामान्य रंग वाले दूध का सेवन न करें।

गाय का दूध कैसे फायदेमंद है - Health Benefits Of Cow Milk In Hindi

  • गाय का दूध मानसिक क्षमता और शारीरिक शक्ति में सुधार करता है। इसका उपयोग वाइटलाइजर (Vitalizer) के रूप में किया जाता है।
  • जो लोग शारीरिक रूप से कमजोर और दुर्बल हैं उनके लिए गाय का दूध फायदेमंद होता है।
  • गाय का दूध वात (Vata) और पित्त (Pitta) को शांत करता है और कफ (Kapha) को बढ़ाता है।
  • गाय का दूध स्वाद में मीठा होता है, यह ओजस (Ojas) में सुधार करता है और शरीर के टिशू (Tissues) को पोषण देता है।
  • गाय का दूध थकान और प्यास को दूर करता है।
  • गाय के दूध में एंटी-एजिंग गुण होते हैं। इसका दैनिक आधार पर सेवन किया जा सकता है और इसका घी के साथ सेवन करने पर यह एक बेहतरीन एंटी-एजिंग एजेंट के रूप में काम करता है।

बकरी के दूध के स्वास्थ्य लाभ - Health Benefits Of Goat Milk In Hindi

गाय के दूध की तुलना में बकरी के दूध में कुछ ख़ासियतें होती हैं। ऋषि वाग्भट्ट (Vagbhatta) ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बकरी को स्वभाव से ही कम पानी पीने की आदत होती है, वे तीखे और कड़वे स्वाद के पत्ते खाती हैं और काफी शारीरिक गतिविधि करती हैं। इसलिए बकरी का दूध गाय के दूध से हल्का होता है।

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  • बकरी का दूध कम कफ (Kapha) पैदा करता है और आसानी से पचने योग्य होता है। हालांकि, इससे शरीर पर कोई ठंडा प्रभाव नहीं पड़ता है।
  • नवजात शिशु या छोटे बच्चों को बकरी का दूध पिलाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह हल्का और पचाने में आसान होता है।
  • बकरी का दूध पाचन में सुधार करता है और हल्के दस्त की समस्या से राहत पाने में भी मदद करता है।
  • बकरी के दूध का उपयोग रक्तस्राव विकारों (Bleeding Disorders), अपव्यय (Wasting) और टीबी (TB) में भी किया जाता है।
  • डेंगू बुखार में बकरी का दूध पीने से (चिकित्सक की सलाह पर) प्लेटलेट्स काउंट में तेजी से सुधार होता है।

जानिए आयुर्वेद के अनुसार गाय या बकरी के दूध में कौन है ज्यादा फायदेमंद - Which Milk Is Good Goat Milk Or Cow Milk

आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ. श्याम वीएल बताते हैं कि, आयुर्वेद में गाय को दूध को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। क्रुएल्टी फ्री फार्म्स (Cruelty-Free Farms) से प्राप्त गाय के दूध की तुलना में, स्थानीय रूप से खेतों में पाली गईं गायों का दूध प्राकृतिक रूप से ज्यादा अच्छा होता है। क्रुएल्टी फ्री फार्म्स में, जब बछड़ा अपनी जरूरत के अनुसार दूध पी लेता है, उसके बाद ही उसका उपयोग मानव उपभोग के लिए किया जाता है।

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