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हिंदू धर्म के बड़े त्यौहारों में से एक नवरात्रि की शुरुआत 7 अक्टूबर से हो चुकी है जो 15 अक्टूबर तक चलेंगे। नवरात्रों में पूरे 9 दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है और माता के भक्त भगवती का आर्शीवाद प्राप्त करने के लिए पूजा-अर्चना के साथ मां के नाम का व्रत रखते हैं। व्रत रखना धार्मिक काम के साथ-साथ हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है। जब कोई व्यक्ति व्रत रखता है और सुबह से शाम तक अन्न का सेवन न करने से हमारे पाचन तंत्र को घंटों के लिए आराम मिलता है। इसके अलावा बॉडी भी अच्छी तरह से डिटॉक्स होती है। हालांकि व्रत के रखने के जहां फायदे वहां नुकसान भी हैं। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो व्रत के दौरान पानी के अलावा कुछ भी नहीं खाते हैं। भक्तिभाव के नजरिए से ये विचार सही हो सकता है लेकिन इसका हमारे स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है। अगर व्रत के दौरान सही फूड्स का सेवन न किया जाए तो उल्टी, मतली, चक्कर आना, पेट में दर्द, धुंधला दिखना और कमजोरी महसूस हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि आप सही फूड्स का सेवन करें। कई लोगों के मन में ये सवाल आता है कि नवरात्रि व्रत में कार्बोहाइड्रेट का सेवन (Carbohydrates should be taken in Navratri fast or not) करना चाहिए या नहीं? अगर आपका भी ये सवाल है तो आइए जानते हैं इसका जवाब-
न्यूट्रिशनिस्ट शिवानी कंडवाल का कहना है कि क्योंकि कार्बोहाइड्रेट शरीर को एनर्जी देने का सबसे आसान और बेस्ट तरीका होता है इसलिए नवरात्रि व्रत में कार्ब को अवॉइड नहीं करना चाहिए। जब कभी हम ऐसी चीजों का सेवन करते हैं जिनमें कार्बोहाइड्रेट होता है तो हमारे शरीर को अपना काम करने में आसानी होती है। लेकिन हां, ये सच है कि आपको नवरात्रि व्रत के दौरान कार्ब के सही स्त्रोत चुनने चाहिए।
क्योंकि व्रत के दौरान हम सामान्य दिनों की तुलना में कम खाते हैं जिसके चलते भूख के कारण पेट में हल्का दर्द और क्रेविंग हो सकती है इसलिए व्रत में आप ऐसे स्लो /कॉम्प्लेक्स कार्ब का सेवन करें। कॉम्प्लेक्स कार्ब में आलू, साबुदाना, समक, कुट्टू, मूंगफली और नट्स आदि का सेवन किया जा सकता है। न्यूट्रिशनिस्ट शिवानी कंडवाल कहती हैं कि कोशिश करें कार्ब को फ्राई करने के बजाय रोस्ट करें। इनके अलावा व्रत के दौरान जूस की जगह फल का सेवन करना चाहिए। इससे बॉडी को विटामिंस के साथ ही प्रचुर मात्रा में फाइबर भी मिलता है।