फास्ट रख रहे लिवर के मरीज तो सावधान, ये गलतियां बढ़ा सकती हैं लिवर फेलियर का खतरा
फास्ट रख रहे लिवर के मरीज तो सावधान, ये गलतियां बढ़ा सकती हैं लिवर फेलियर का खतरा
Kya Liver Ke Marij Fast Kar Sakte Hain: अगर किसी व्यक्ति को लिवर की बीमारी है और व फास्ट रखना चाहता है, तो उसे कुछ खास बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, जिसके बारे में हम आगे इस लेख में जानेंगे।
Written By:
Mukesh Sharma
| Published : February 26, 2026 3:13 PM IST
Can Liver Patients Have Fasting: लिवर हमारे शरीर का एक बहुत महत्वपूर्ण अंग है, जो भोजन पचाने, शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालने और ऊर्जा को स्टोर करने का काम करता है। यदि किसी व्यक्ति को लिवर से जुड़ी बीमारी है जैसे फैटी लिवर, हेपेटाइटिस, लिवर सिरोसिस या लिवर फेल्योर, तो रोजा या व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है। हर मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए एक जैसा नियम सभी पर लागू नहीं होता। हल्की समस्या जैसे फैटी लिवर या नियंत्रित हेपेटाइटिस के मरीज, यदि उनकी रिपोर्ट सामान्य है और कोई गंभीर लक्षण नहीं हैं, तो डॉक्टर की निगरानी में फास्ट रख सकते हैं। लेकिन जिन लोगों को लिवर सिरोसिस, बार-बार पीलिया, पेट में पानी भरना (एसाइटिस), बार-बार उल्टी या कमजोरी की शिकायत है, उन्हें रोजा रखने से पहले पूरी जांच करानी चाहिए। गंभीर स्थिति में लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहना नुकसानदायक हो सकता है। ShardaCare-Healthcity के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के अटेंडिंग कंसल्टेंट, डॉ. वसीम रमजान डार ने बताया किन बातों का खासतौर पर ध्यान रखना चाहिए।
फास्ट में खाया गया खाना संतुलित हो
अगर आप फास्ट रखते हैं तो उस दौरान कुछ भी तला-भुना, मसालेदार और ज्यादा मीठा खाना न खाएं, क्योंकि यह लिवर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
व्रत के खाने में ध्यान रखें कि खाना हल्का हो, उसमें प्रोटीन व फाइबर जैसे जरूरी पोषक तत्व हों। इसके लिए आप डॉक्टर की सलाह के अनुसार दाल, ओट्स, दलिया, फल और साबुत अनाज।
पर्याप्त पानी पीएं और दवाओं का ध्यान रखें
अगर लिवर से जुड़ी कोई समस्या है या लिवर की बीमारी है, तो शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। खासतौर पर जो लोग फास्ट रखते हैं तो उनमें डिहाइड्रेशन होने का खरा और ज्यादा बढ़ सकता है।
इसलिए फास्ट के दौरान ऐसी चीजों का सेवन करें जिनमें आपके शरीर को पर्याप्त पानी मिलता रहे। किसी भी ऐसी चीज का सेवन न करें जो शरीर में पानी की कमी का कारण बन सकती हो।
खासतौर पर अगर किसी व्यक्ति को लिवर सिरोसिस की समस्या है, तो उसे व्रत या रोजा रखने के लिए डॉक्टर से अनुमति लेने की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि लिवर सिरोसिस के मरीजों के लिए डिहाइड्रेशन गंभीर समस्या पैदा कर सकती है।
डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयां समय पर लें। यदि दवा दिन में कई बार लेनी है, तो डॉक्टर की मदद से अपने फास्ट के अनुसार दवा की टाइमिंग एडजस्ट करने के बारे में बात करें।
लिवर के मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई हर्बल या सप्लीमेंट लेने की सलाह नहीं दी जाती है, क्योंकि ये लिवर को और ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।
लक्षणों को नजरअंदाज न करें
यदि व्रत या रोजे के दौरान चक्कर आना, बहुत ज्यादा कमजोरी, उल्टी, पेट दर्द, पीलिया बढ़ना या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें, तो हो सकता है कि आपको फास्ट बीच में ही छोड़ना पड़े क्योंकि इन लक्षणों को इग्नोर करना जानलेवा हो सकता है।
डॉ. वसीम रमजान डार का कहना है, “धार्मिक आस्था महत्वपूर्ण है, लेकिन स्वास्थ्य उससे भी ज्यादा जरूरी है। इस्लाम में भी गंभीर बीमारी की स्थिति में रोजा न रखने की अनुमति दी गई है। इसलिए लिवर के मरीज बिना चिकित्सीय सलाह के निर्णय न लें।”
अंत में, यह समझना जरूरी है कि यदि आपकी लिवर बीमारी नियंत्रित है और डॉक्टर अनुमति देते हैं, तो सही खानपान और सावधानी के साथ फास्ट रखा जा सकता है। लेकिन यदि बीमारी गंभीर है, तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना ही समझदारी है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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