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बेहतर कुकिंग ऑयल को चुनकर करें अपने दिल की हिफाजत, इन तेल को करें डायट में शामिल

राइस ब्रैन और कैनोला ऑयल के सेवन से जीवनशैली से जुड़ी तमाम समस्याओं का खतरा कम हो जाता है खासकर दिल की कार्यशीलता बेहतर होती है और मोटापा भी नहीं बढ़ता।

भारतीय व्यंजनों को अधिक लजीज और स्वादिष्ट बनाने में कुकिंग ऑयल की भूमिका अहम होती है, क्योंकि तेल व्यंजन के ऊपर गर्माहट को एक समान स्तर पर फैलाने में सहायक होता है। अगर सही प्रकार के तेल का चुनाव किया जाए तो यह आपके शरीर में स्वस्थ फैट उपलब्ध कराने का काम भी करता है। अस्वस्थ फैट उन रक्त नलिकाओं में जमा हो जाता है, जो दिल से रक्त को शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंचाते हैं। ऐसे में ये रक्त नलिकाएं पतली होती जाती हैं और एक वक्त बाद पूरी तरह बंद हो जाती हैं। इस स्थिति में दिल से सम्बंधित तमाम तरह की समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं, जिनका सबसे बेहतरीन इलाज है बचाव। बचाव की शुरुआत कुछ साधारण उपायों से की जा सकती है जैसे कि आपकी सब्जियां और अनाज पकाने हेतु इस्तेमाल के लिए सही तेल का चयन। (इसे भी पढ़ें- वर्ल्ड हार्ट डे 2018: दिल को स्वस्थ रखना है, तो आजमाएं ये 5 स्मार्ट उपाय)

दिल और संपूर्ण सेहत के लिए राइस ब्रैन और कैनोला ऑयल कैसे बेहतर है, इसके बारे में संपूर्ण जानकारी दे रही हैं पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया की पब्लिक हेल्थ न्यूट्रिशन, एजुकेटर और मोदी नेचुरल्स लिमिटेड की सीनियर ब्रांड मैनेजर प्रियंका खरबंदा-

आहार में तेल की अनिवार्यता और राइस ब्रैन ऑयल

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शरीर में फैट का इस्तेमाल पोषक तत्वों को एब्जॉर्ब करने के लिए होता है। जब आप व्यायाम कर रहे होते हैं तब ये आपकी मांसपेशियों को शक्ति देते हैं और ये ही वे तत्व हैं जो भोजन करने के बाद आपको संतुष्टि का एहसास कराते हैं। कोई भी फैट के इस्तेमाल से पूरी तरह परहेज नहीं कर सकता है। यहां तक कि अमेरिकन डाइटरी गाइडलाइंस के अनुसार, आपके शरीर को 20-25% फैट लेने की जरूरत होती है। हालांकि, सिर्फ पोषक तत्वों से मिलने वाला फैट ही शरीर की बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, राइस ब्रैन ऑयल जिसे चावल के कण से निकाला जाता है, इसमें बड़ी मात्रा में गामा ऑराइजन मौजूद होता है, जो कि एंटीऑक्सिडेंट कम्पाउंड का मिश्रण होता है। ऑराइजन का सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल लाभ यह होता है कि आपके बैड कोलेस्ट्रॉल स्तर को प्रभावित करता है। यह आपके शरीर में अस्वस्थ फैट को जमा होने से रोकता है। ऐसे में, यह ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है और आपके सम्पूर्ण सेहत में सुधार लाता है। राइस ब्रैन का इस्तेमाल जब कुकिंग ऑयल के रूप में किया जाता है। इसे एक हाई-स्मोक पॉइंट ऑयल के रूप में जाना जाता है और जब इसे तेज आंच पर गर्म किया जाता है, तब इसमें से धुआं कम निकलता है। ऐसे में यह डीप फ्राइंग के लिए बेहतर विकल्प साबित होता है।

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हाई कोलेस्ट्रॉल कैसे करता है दिल को प्रभावित

कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक होने के परिणामस्वरूप रक्त नलिकाओं में फैटी तत्व जमा हो जाते हैं। इस तरह के जमाव आगे चलकर उन नसों में रुकावट पैदा कर देते हैं जो दिल से रक्त को शरीर के बाकी अंगों, टिशू और आर्टरीज तक पहुंचाते हैं। ऐसे में दिल पर्याप्त ऑक्सिजन से भरपूर रक्त नहीं पाता है जिसके चलते हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। अगर ब्रेन में रक्त संचार कम होता है तो ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। (इसे भी पढ़ें- थकान, सांस में तकलीफ हो सकते हैं हार्ट डिजीज के लक्षण : एक्सपर्ट)

दिल की बीमारियों से बचना है तो करें हेल्दी ऑयल का सेवन

सीवीडी से पीड़ित अधिकतर लोग अपनी शारीरिक निष्क्रियता और अस्वस्थ आहार के जरिए अपनी स्थिति का पता लगा सकते हैं। एक भारतीय के तौर पर, हम सबको सब्जियों को तेल में पकाने की आदत है। खाने की चीजों को तेल में फ्राई करने से तेल फ्लूड कंडक्टर का काम करता है और यह बेतरतीब आकार के भोजन को एक समान पकने हेतु गर्माहट को समान रूप से इनमें पहुंचाता है। हम जो भी खाते हैं, उससे हमें कार्बोहाइड्रेट्स, फैट, प्रोटीन, वॉटर बेस्ड मैक्रोन्यूट्रिएंट्स, विटामिन और मिनरल माइक्रोन्यूट्रिएंट जैसे सभी तत्व मिलने चाहिए। हमारे शरीर को मोनोसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड की जरूरत होती है, लेकिन आंतरिक रूप से सैचुरेटेड फैट भी उत्पादित हो सकता है जो कि बुरा होता है। अधिक मात्रा में इसका इस्तेमाल करने से आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।

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कैनोला ऑयल और दिल की सेहत के लिए इसके लाभ

सभी उपलब्ध कुकिंग ऑयल में से सबसे हेल्दी माने जाने वाले कैनोला ऑयल में दो महत्वपूर्ण फैटी एसिड होते हैं- अल्फा लिनोलिक एसिड (एएलए), जो कि एक ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है। इसे नवजात शिशुओं के दिमाग के विकास के लिए जाना जाता है। यूएस एफडीए के अनुसार, कैनोला ऑयल में मूफा होता है जो कि एलडीएल (अस्वस्थ कोलेस्ट्रॉल) को कम करता है और ब्लड-ग्लूकोज स्तर को नियंत्रण में रखता है। कैनोला ऑयल कुकिंग में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध सभी वेजिटेबल ऑयल्स के मुकाबले सबसे कम सैचुरेटेड फैट होता है। यही इकलौता ऐसा ऑयल है, जिसे जीरो-ट्रांस फैट के रूप में रेटिंग मिली है। नियमित रूप से एक खास मात्रा में कैनोला ऑयल इस्तेमाल करने से व्यक्ति के लिए आवश्यक मात्रा में जरूरी विटामिन ई मिलता है। विटामिन ई एक एंटीऑक्सिडेंट है जो आपके शरीर के फैट और प्रोटीन को रैडिकल डैमेज से सुरक्षित करता है। यह दिल की बीमारियों को कम करने, कैंसर और याददाश्त में कमी जैसी समस्याओं से बचाव में सहायक होता है।

साथ में करें राइस और कैनोला ऑयल का यूज

राइस ब्रैन और कैनोला ऑयल, दोनों में ही एलडीएल कोलेस्ट्रॉल कम और एचडीएल कोलेस्ट्रॉल अधिक होता है। ये दोनों ही तेल बेहतरीन कुकिंग ऑयल का काम काम करते हैं। दोनो तेलों को मिलाकर इस्तेमाल करने से इनके फायदे बढ़ जाते हैं। इनके सेवन से जीवनशैली से जुड़ी तमाम समस्याओं का खतरा कम हो जाता है खासकर दिल की कार्यशीलता बेहतर होती है, मोटापा नहीं बढ़ता। ये दोनों तेल खाने को नर्म और इन्हें चबाने में आसान बनाते हैं, जिससे भोजन को पचाने में आसानी होती है। यह मिश्रण खासतौर से दिल के लिए अच्छा होता है क्योंकि यह ओमेगा 3, 6 और 9 फैटी एसिड का मिश्रण होता है। इसमें मूफा व पूफा भी होता है।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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