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Written By: Atul Modi | Published : February 28, 2023 3:02 PM IST
आप चाहे काला चना बनाएं या फिर काबुली चना (सफेद चना) दोनों ही हमारी सेहत के लिए काफी अच्छे होते हैं और दोनों का ही स्वाद काफी अच्छा होता है। बहुत से लोगों का यह सवाल रहता है कि उन्हें ज्यादा लाभ काले चने में मिल सकेगा या फिर काबुली चने में इसलिए वह हमेशा इस प्रश्न का उत्तर ढूंढने में लगे रहते हैं कि काले चने को ज्यादा प्राथमिकता दे या फिर सफेद चने को। आज हम दोनों प्रकार के चने को एक दूसरे के साथ कंपेयर करेंगे और बताएंगे कि कौन से चने में ज्यादा पौष्टिक तत्व (Which Type of Chana is Best) पाए जाते हैं और कौन सा चना आप की सेहत और स्वाद के लिए ज्यादा बेहतर होगा।
काले चने में 100 ग्राम की मात्रा में 7 से 8 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है और काबुली चने की 100 ग्राम मात्रा में 10 से 11 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। तो इस मामले में तो काबुली चना ही विजेता बनेगा। हालांकि अधिकतर लोग प्रोटीन किसमें ज्यादा है इस आधार पर ही किसी एक तरह के चने को प्राथमिकता देते हैं। चूंकि प्रोटीन हमारे शरीर के लिए काफी जरूरी होता है और शाकाहारी लोगों के लिए तो और भी ज्यादा क्योंकि उन्हें प्रोटीन के बहुत ज्यादा स्रोत नहीं मिल पाते हैं।
100 ग्राम काले चने में 13 ग्राम में डाइटरी फाइबर पाया जाता है और सौ ग्राम काबुली चने में 17 से 18 ग्राम डाइटरी फाइबर पाया जाता है। काले चने में किसी तरह का आयरन नहीं पाया जाता है और 100 ग्राम काबुली चने में 6.2 ग्राम फायरिंग पाया जाता है।
हड्डियों के स्वास्थ्य की बात करें तो काबुली चना आपकी हड्डियों को मजबूत बनाने में ज्यादा लाभदायक माना जाता है क्योंकि इसमें आयरन और कैल्शियम की अच्छी खासी मात्रा पाई जाती है। कैल्शियम की कमी की वजह से आपकी हड्डियां कमजोर हो सकती हैं इसलिए कैल्शियम से भरपूर चीजों का सेवन जरूर करें।
दिल की सेहत के लिए भी काले चने के मुकाबले काबुली चने को ही प्राथमिकता दी जा सकती है क्योंकि काबुली चने में काफी सारे विटामिन मिनरल आयरन सेलेनियम जैसे तत्व पाए जाते हैं जो हृदय के स्वास्थ्य को प्रमोट करने में सहायक है। काबुली चना दिल को बीमारियों से भी काफी दूर रखने में सहायक है क्योंकि इसमें जीरो कोलेस्ट्रोल पाया जाता है और यह आपके कोलेस्ट्रोल या फिर ब्लड प्रेशर को नहीं बढ़ाता है।
दोनों तरह की चने में ही डाइटरी फाइबर पाया जाता है जो कब्ज को ठीक करने में काफी सहायक माना जाता है। फाइबर से युक्त चीजों का सेवन करने से स्टूल सॉफ्ट होने में मदद मिलती है जिससे कब्ज धीरे धीरे ठीक होने लगती है।
निष्कर्ष: अगर ऊपर के मुकाबले को देखे तो काबुली चना ही हर चीज में विजेता बना है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको काले चने के लाभों को नजरअंदाज कर देना चाहिए।