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गट या आँत हेल्थ क्या है ? अगर यह सवाल आपके भी मन में आता है ? क्या आप भी इस कंफ्यूजन में हैं कि हेल्दी गट के लिए किस तरह के भोजन का सेवन करना चाहिए ?सही डाइट क्या हो, इसके बारे में जानने से पहले यह पता करना जरूरी है कि गट या आँत हेल्थ क्या है और कितना जरूरी है। गट को हिंदी में आंत कहा जाता है। गट में सबसे अधिक माइक्रोब्स (Gut flora) पाए जाते हैं। बैक्टीरिया और अन्य रोगाणुओं को अक्सर बीमारी के स्रोत के रूप में देखा जाता है, लेकिन वास्तव में इनमें से कई आपको स्वस्थ रखने में आवश्यक भूमिका निभाते हैं।
गट या आंत हेल्थ से पूरे शरीर की हेल्थ प्रभावित होती है, क्योंकि यह पाया गया है कि शरीर की लगभग 90 प्रतिशत बीमारियां गट या आंत में आई गड़बड़ियों के कारण होती हैं। एक हैल्दी गट अच्छा पाचन तो दर्शाता है, लेकिन साथ में आपका मूड रेगुलेट करके मैंटल हेल्थ को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
बिलियन चीयर्स एंड फेरमेंटिस लाइफ साइंसेस के संस्थापक डॉ. प्रकाश चंद्र भट्ट कहते हैं “पेशे से एक बायोटेक्नोलॉजिस्ट होने के नाते मुझे यकीन है कि माइक्रोबायोम हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है और हमारे स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. मेरा मानना है कि मानव स्वास्थ्य के लिए भविष्य में जो भी शोध होंगे उनमें माइक्रोबायोम मुख्य होगा.
दिमाग के प्रमुख कार्यों को सही से करने के लिए आपके दूसरे दिमाग यानी गट का खुश रहना बेहद जरूरी है। आंत के माइक्रोब पाचन, इम्यूनिटी कार्य और वजन कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आप जो भी खा रहे हैं, वह आपकी पाचन क्रिया को प्रभावित करता है। ऐसे में इस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि आप अपनी आंत यानी गट की हैल्थ के लिए सही खाद्य पदार्थ खा रहे हैं या नहीं। गट हैल्थ के लिए कौन से खाद्य पदार्थ सही हैं, इस बारे में हम आगे बता रहे हैं…
सेब का सिरका आपके शरीर को हाइड्रोक्लोरिक एसिड बनाने में मदद करता है। यह पेट के लिए लाभकारी एसिड होता है, जो वसा, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन को पचाने में मदद करता है। यह वजन घटाने में सहायक होता है और गट को हैल्दी बनाने में भी मदद करता है।
आम हमारी आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को जिंदा रखने में मदद करता है। आम को भोजन में शामिल करने से आप अपने पेट के स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं, क्योंकि यह शरीर में वसा को कम करने और ब्लड शुगर को कम करने में मदद करता है। आम में कई पोषक तत्व और अन्य बायोटिक्स होते हैं जो शरीर को कई तरह से स्वास्थ्य लाभ देते हैं।
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ऐसे प्रोडक्ट्स जो बादाम, सोयाबीन, राइस मिल्क से बने होते हैं, उन्हें लैक्टोस मुक्त उत्पाद कहते हैं और ये आसानी से पच जाते हैं। लैक्टोस मुक्त दही का सेवन करना गट हैल्थ के लिए लाभदायक है। इनका सेवन करने से पहले इन प्रोडक्ट्स का पोषण लेबल पढ़ लेना चाहिए। क्योंकि ऐसे कई उत्पादों में प्रोटीन की मात्रा कम हो सकती है। अगर प्रोटीन कम है तो नट्स और बीजों का सेवन साथ में कियाजा सकता है।
हम पढ़ चुके हैं कि नॉन डेयरी योगर्ट स्वास्थ्यवर्धन के लिए महत्वपूर्ण ऑप्शन है। लेकिन असली योगर्ट यानी दही भी स्वास्थ्यवर्धक है। योगर्ट में लाभदायक प्रोबायोटिक्स की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स हानिकारक फंगस और बैक्टीरिया को निकालने में मदद करते हैं। ये हमारी गट हैल्थ को सुधारते हैं और हमारे चिड़चिड़पन को भी कम करते हैं।
लिक्विड योगर्ट को केफिर कहा जाता है। दही को प्रोसेस करके उसमें से चिकनाई को निकाल लिया जाता है और बचा हुआ उत्पाद केफिर कहलाता है। इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व गट को हैल्दी बनाते हैं, जिससे इसे बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
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अंकुरित अनाज को पचाना बेहद आसान माना जाता है। इससे बने ब्रैड पारंपरिक ब्रैड की बजाय अधिक फायदेमंद होते हैं। पचाने में आसान होने की वजह से पोषक तत्वों को अवशोषित करने में शरीर को आसानी होती है। अंकुरित अनाज में कार्बोहाइड्रेट कम मात्रा में पाया जाता है। यह गट हैल्थ के लिए फायदेमंद आहार है।
यह एक ऐसा मीडियम चेन फैटी एसिड उत्पाद है जो एंटीवायरल, एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल है। इसमें पाया जाने वाला फैटी एसिड पेट की एसिडिटी को कम करता है और हानिकारक खमीर और बैक्टीरिया को खत्म करता है।
ऐसी मछली का सेवन करना जो प्राकृतिक वातावरण में पकड़ी गई हो, गट हैल्थ के लिए लाभदायक है। ऐसी मछली को जंगली मछली भी कहा जाता है, जिसकी फार्मिंग न की गई हो। ऐसी मछली में ओमेगा 3 एसिड पाया जाता है जो आंत के रोगों में राहत देता है। मछली के मीट को लीन मीट भी कहा जाता है।
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लहसुन एक प्रीबायोटिक उत्पाद है, जिसे कच्चा खाना बेहतर रहता है। प्रीबायाेटिक हमारी आंत में माैजूद पोषक तत्वों को अवशोषित करने मदद करते हैं। लहसुन का सेवन पेट के स्वास्थ्य और गट हैल्थ में लाभदायक है।
उच्च फाइबर वाले खाद्य पदार्थों को हमें अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। हरी मटर, दाल, राजमा, बादाम, सेब आदि ऐसे उत्पाद हैं जिनमें फाइबर अधिक मात्रा में पाया जाता है।
अधिक फाइबर होने के कारण ये कब्ज, पाइल्स, पाचन व अन्य आंत संबंधी रोगों को रोकने में मदद करते हैं। इसके अलावा अधिक फाइबर वाले उत्पाद ह्रदय रोग, डायबिटीज तथा वजन बढ़ने से रोकने में भी मदद करते हैं।