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Balanced Diet : जानें, स्वस्थ रहने के लिए क्यों जरूरी है बैलेंस्ड डाइट

संतुलित आहार (Balanced diet importance) अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, लेकिन बहुत से लोग इसका सही अर्थ नहीं जानते। एक संतुलित आहार का अर्थ भोजन की मात्रा से नहीं है, इसका अर्थ है सही मात्रा में सही पोषक तत्वों का सेवन करना।

Written by Anshumala |Updated : December 16, 2019 2:39 PM IST

अक्सर लोग बैलेंस्ड डायट (Balanced diet) यानि संतुलित आहार का गलत अर्थ निकालते हैं। संतुलित आहार (Balanced diet importance) अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, लेकिन बहुत से लोग इसका सही अर्थ नहीं जानते। एक संतुलित आहार का अर्थ भोजन की मात्रा से नहीं है, इसका अर्थ है सही मात्रा में सही पोषक तत्वों का सेवन करना। आज के दौर में सबसे बड़ी समस्या यही है कि हम जो कुछ भी खाते हैं, उसमें सेहतमंद पोषक पदार्थ हों, ऐसा जरूरी नहीं। जानें, बैलेंस्ड डायट से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट, लैक्टेशन कंसलटेंट एंड डायबिटीज एजुकेटर (चेन्नई) राम्या आर रामचंद्रण से...

करें डाइट में फलों-सब्जियों को शामिल

सभी को अपने आहार (Balanced diet) में हमेशा ताजा फल और सब्जियों को शामिल करना चाहिए, लेकिन अक्सर लोग अपने आहार में पोषक पदार्थों को शामिल करने से चूक जाते हैं। कुपोषण आज देश के लिए बड़ी समस्या है। कुपोषण की बात करें, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले वे लोग आते हैं, जो गरीबी रेखा से नीचे हैं। हालांकि, रोचक तथ्य यह है कि हमेशा ऐसा जरूरी नहीं। आज बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों में पोषक पदार्थों की कमी के कारण लोग कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। इसके मद्देनजर फूड फोर्टिफिकेशन एक महत्वपूर्ण अवधारणा के रूप में उभरी है।

क्या है फूड फोर्टिफिकेशन

इस प्रक्रिया में खाद्य पदार्थों में जरूरी पोषक पदार्थों (Balanced diet) को शामिल किया जाता है, जो पहले से उसमें मौजूद न हों। यह एक नई प्रक्रिया है, जिसमें कमर्शियल रूप से उपलब्ध उत्पादों में ऐसे अवयव शामिल किए जाते हैं, जो हमारी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के साथ ही आहार में पोषण की कमी को दूर कर सकें। इससे घर में पके आहार को अधिक पोषक बनाया जा सकता है। हमारे रोजमर्रा के आहार में माइक्रोन्युट्रिएन्ट्स एवं मैक्रोन्युट्रिएन्ट्स के महत्व को नकारा नहीं जा सकता।

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क्या है मैक्रोन्यूट्रिएन्ट (what is macronutrients)

ये वे पोषक तत्व हैं, जो हमें जीवित रहने के लिए ऊर्जा देते हैं। इनका सेवन हमें बड़ी मात्रा में करना होता है। मनुष्य को तीन प्रकार के मैक्रोन्यूट्रिएन्ट्स की जरूरत होती है- कार्बोहाइड्रेड, फैट, प्रोटीन।

कार्बोहाइड्रेड (Carbohydrates)

रोजमर्रा की गतिविधियों और व्यायाम आदि के लिए हमें बड़ी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत होती है। कार्बोहाइड्रेट ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। सैद्धान्तिक रूप से हमे रोजमर्रा में जितनी कैलोरीज का सेवन करते हैं, उसमें से औसतन 50 से 60 फीसदी कार्बोहाइड्रेट होने चाहिए। हमें 70 से 80 फीसदी कैलोरीज कार्बोहाइड्रेट से ही मिलते हैं।

प्रोटीन (Protein)

प्रोटीन पर निर्भर करता है कि हमारा शरीर कैसा दिखता है। प्रोटीन से युक्त आहार बहुत जरूरी है, खासतौर पर यह नवजात शिशुओं, बच्चों, गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। संक्रमण, बीमारी या तनाव ग्रस्त लोगों के लिए भी प्रोटीन का सेवन बेहद महत्वपूर्ण है। दालें, अंडा, मछली, चिकन आदि प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। इसके अलावा क्विनोआ, चिया सीड और बादाम में भी प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है।

फैट (Fat)

यह शरीर में ऊर्जा का भंडार बनाती है। अंगों की सुरक्षा एवं इन्सुलेशन के लिए भी महत्वपूर्ण है। रोजमर्रा की कैलोरीज में 20-30 फीसदी वसा होना जरूरी है। वसा की मात्रा के अलावा वसा की अच्छी गुणवत्ता भी मायने रखती है, आहार में पर्याप्त पाॅलीसैचुरेटेड फैटी एसिड से युक्त वसा होनी चाहिए। व्यस्कों को सैचुरेटेड वचा जैसे बटर, घी, हाइड्रोजेनेटेड फैट तथा काॅलेस्ट्राॅल (रैड मीट, अंडा, ओर्गेन मीट) का सेवन ध्यानपूर्वक करना चाहिए। हालांकि, बहुत अधिक मात्रा में वसा के सेवन से मोटापा, मधुमेह, दिल की बीमारियों और कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में संतुलित और सही मात्रा में वसा का सेवन करना चाहिए।

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क्या है माइक्रोन्यूट्रिएन्ट्स (What is micronutrients)

विटामिन (फैट सोल्युबल यानि वसा में घुलने वाले और वाटर सोल्युबल यानि पानी में घुलने वाले) और मिनरल्स माइक्रोन्यूट्रिएन्ट यानि सूक्ष्म पोषक तत्व कहलाते हैं। ये शरीर को कम मात्रा में चाहिए होते हैं इसलिए इन्हें ‘माइक्रो’ कहा जाता है। मनुष्य का शरीर विटामिन और मिनरल बनाने में सक्षम नहीं होता, इसलिए हमें ये अवयव अपने आहार से प्राप्त करने होते हैं। इन सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से हमारा शरीर बीमार हो जाता है। उदाहरण के लिए विटामिन ए की कमी से एक व्यक्ति अंधा हो सकता है, उसके बालों और शरीर के विकास पर बुरा असर पड़ सकता है, वह प्रजनन संबंधी समस्याओं का शिकार भी हो सकता है। हमारे आहार में डेयरी उत्पाद, मीट उत्पाद शामिल होने चाहिए। शाकाहारी लोगों को अपने आहार में आयरन जैसे लैग्यूम और फल- सब्ज़ियों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

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इन मैक्रो और माइक्रो पोषक तत्वों के अलावा शरीर की गतिविधियों के संचालन के लिए फाइबर और पानी भी उचित मात्रा में ज़रूरी होते है। ये अवयवर कब्ज़ जैसी समस्याओं से बचाते हैं। ये गट, बोवेल मुवमेन्ट्स के सामान्य बनाए रखने में मदद करते हैं और गट माइक्रोबायोम को सपोर्ट करते हैं। फल और सब्ज़ियां फाइबर के अच्छे स्रोत हैं, अपने गट (पाचन तंत्र) के अच्छे स्वास्थ्य के लिए हमारे आहार में पोषक पदार्थ उचित मात्रा में होने चाहिए। फाइबर के अलावा हमें रोज़ाना 6-8 गिलास पानी पीना चाहिए, ताकि शरीर की गतिविधियों का संचालन सुगमता से जारी रहे।

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