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Written By: Jitendra Gupta | Published : August 10, 2022 5:17 PM IST
सावन के बाद बदला मौसम बिगाड़ सकता है आपकी सेहत! डाइट में इन 9 चीजों को शामिल कर रोगों से बचें
हमारा शरीर मौसम में होने वाले बदलावों से प्रभावित होता है। इसलिए हमें मौसम के अनुसार अपने खानपान का प्रबंधन करना चाहिए ताकि हम निरोगी रहे सके और मौसमी बीमारियों से भी बच सके। सावन के मौसम के बाद एक बार फिर से मौसम करवट लेगा और ऐसे में बहुत सी संक्रामक बीमारियों को फैलने के लिए एक अच्छा वातावरण मिलता है। जिसके कारण इस मौसम में सर्दी, खांसी, जुकाम और वायरल बुखार का खतरा सबसे ज्यादा होता है। ऐसे में हम अगर अपने खानपान में आयुर्वेद के अनुसार बदलाव लाये तो तो स्वस्थ रह सकते हैं। वेदास क्योर के संस्थापक एवं निदेशक, आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट विकास चावला आयुर्वेद में सुझाई गई कुछ चीजों को अपने आहार में शामिल करने के बारे में बता रहे हैं, जो हमें भरपूर पोषण के साथ ही संक्रमण से भी बचाए रखे।
शहद आयुर्वेद में एक औषधि के रूप में जाना जाता है। इसका उपयोग कई प्रकार के रोगों में किया जाता है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है उन्हें बरसात के मौसम में आयुर्वेद के अनुसार शहद का उपयोग करना चाहिए। शहद का सेवन पाचन तंत्र को दुरूस्त करता है और विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालता है। सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जिससे सर्दी, खांसी और जुकाम जैसे मौसमी रोगो से बचने में मदद मिलती है। इसके साथ ही गुनगुने पानी में शहद मिलाकर पीने से शरीर का वजन भी नियंत्रित रहता है।
हल्दी आयुर्वेद में एक गुणकारी औषधि है और हर भारतीय घर में मौजूद एक आम मसाला है। हल्दी में करक्यूमिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो कैंसर को बढ़ने से रोकता है। बरसात के दिनों में अगर इसे दूध में मिलाकर पीया जाये जो यह शरीर को अंदर से मजबूत करता है। एक गिलास दूध में एक चम्मच हल्दी उबालकर पीना सर्दी, जुकाम और शरीर के दर्द से राहत देता है। हल्दी एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक है
आयुर्वेद में पथ्य आहार-विहार सुझाया गया है। इस समय ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जो वात शांत करते हों। इस तरह बरसात के मौसम में साबुत अनाज को अपनी डाइट में शामिल करना काफी लाभदायक होता है। इसमें मिनरल्स, विटामिंस, एंटीऑक्सीडेंट्स, आयरन, मैंगनीज, मैग्नीशियम, और फाइबर से भरपूर मात्रा में होते हैं। इसके सेवन से पाचन तंत्र सही रहता है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी संतुलित रहता है। इन साबुत अनाजों में मक्का, जौ, गेहू, दाले हैं इसके साथ ही बरसात में आसानी से मिलने वाला मक्का (भुट्टा) का भी सेवन कर सकते हैं।
हर मौसम में मौसमी फलों की भरमार होती है। जो हमारी इम्यूनिटी के लिए भी बहुत अच्छे होते हैं। इसलिए हमें इन फलों का सेवन करना चाहिए। इन फलों में नाशपाती, जामुन, अनार, मौसम्बी, सेब, पपीता, स्ट्रॉबेरी, आम, आदि प्रमुख हैं। ये सभी फल विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होते हैं जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद भी करते हैं। इस समय जामुन और आम विशेष तौर पर लाभकारी है। आयुर्वेद के अनुसार आम का दूध से साथ सेवन करना शरीर को पुष्ट करता है। जामुन के सेवन से प्रमेह रोगों के साथ साथ त्वचा रोगों से भी बचाता है।
इस दौरान मौसमी सब्जियों का सेवन करना सेहत के लिए अच्छा होता है मगर आयुर्वेद में वर्षा ऋतु के अपथ्य आहार विहार के अनुसार इस दौरान हमें हरी पत्तेदार सब्जियों से परहेज करना चााहिए और तली हुई चीजों, बेसन से बने पदार्थ, तेज-मिर्च मसाले वाले, बासी भोजन, खट्टे व पित्त बढ़ाने वाले खाद्यों पदार्थों का उपयोग नहीं करना चाहिए। बरसात में पत्तेदार सब्जियों के सेवन से पेट संबंधी बीमारियों के होने की ज्यादा संभावना रहती है। इसलिए इस मौसम में घीया, बींस, टिडा, परवल, तोरई आदि सब्जियों का सेवन करना चाहिए।
आयुर्वेद के अनुसार हमें बरसात के मौसम है हमें सुपाच्य खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। सूप इसका एक बहुत अच्छा विकल्प है। यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है और अगर इसमें अदरक, लहसुन एवं गरम मसाला डालकर पिया जाए तो यह हमारी प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। स्वाद के नजरिए से भी सूप लाजवाब है क्योंकि ये कई सब्जियों के फ्लेवर में बनाये जा सकते हैं।
बरसात के मौसम में पानी सबसे पहले संक्रमित होता है इसलिए हमें पानी को उबालकर पीना चाहिए। क्योंकि पानी को उबालने से उसमें मौजूद बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं अगर हम इस तरह गुनगुने पानी का उपयोग करें तो इससे हमारा मेटाबॉलिज्म भी ठीक रखता है।
ग्रीन टी, हर्बल टी, ग्रीन कॉफी जैसे ऊर्जावर्धक पेय के रूप में जाने जाते हैं इसके साथ ही ये शरीर को डिटॉक्स करने का भी काम करते हैं। इसके आलावा ब्लैक टी में अदरक और काली मिर्च आदि मिलाकर पीने से शरीर को एक अच्छी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसका सेवन सर्दी-जुकाम में भी राहत देता है।
बरसात के मौसम में वातावरण में आद्रता बहुत ज्यादा मात्रा में होती है जिसके कारण कई तरह के फफूंद भोजन पर पनपते हैं। इसलिए बारिश के मौसम में हमेशा ताजा या गर्म भोजन का ही सेवन करना हमें कई तरह के संक्रमण से बचा सकता है।