ज्‍वाइंट पेन है, तो आहार में शामिल करें चौलाई

सिर्फ साग नहीं, गुणों का खजाना है चौलाई।

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Written By: Yogita Yadav | Published : July 5, 2018 12:46 PM IST

मध्‍यम आकार के नर्म पत्‍तोंं वाली चौलाई सिर्फ साग नहीं, बल्कि  बेशुमार गूणों का खजाना है।  इससे एसेशिंयल ऑयल, आटा आदि प्राप्त होता है। चौलाई या राजगिामें एंटी-ऑक्सीडेंट और साइटोस्टिरॉल जैसे महत्‍वपूर्ण तत्‍व मौजूद होते हैं। इसके अलावा प्रोटीन, फोलेट और विटामिन का भी खजाना है चौलाई।

सब जगह हर मौसम में 

चौलाई का पौधा दुनिया भर में पाया जाता है और खास बात ये कि हर मौसम में आसानी से मिलने वाली चौलाई किसी भी मौसम में खाई जा सकती है। लाल और हरे दो रंगों में मिलने वाले इस पौधे की दुनिया भर में 27 प्रजातियां हैं । इस पर उगने वाले छोटे-छोटे दानोंं जिन्‍हें राजगिरा कहा जाता है, से भी कई स्‍वादिष्‍ट व्‍यंजन बनाए जाते हैं।

स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक चौलाई

चौलाई या राजगिरा स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। इसके आटे का उपयोग लड्डू बनाने, रोटी बनाने और कई तरह के अन्य व्यंजन बनाने के लिए भारतीय घरों में बनाया जाता है। राजगिरा का सेवन स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक लाभकारी होता है क्योंकि इसमें बहुत सारे पोषक तत्व होते हैं। यह ज्‍वाइंट को रिपेयर करने, सूजन को कम करने, ब्लड प्रेशर को कम करने,  इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए और वेरिकोस वेंस जैसी समस्याओं को भी कम करता है।

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विटामिन

चौलाई में विटामिन `सी´, विटामिन `बी´ व विटामिन `ए´ की अधिकता होती है। विटामिनों की कमी से होने वाले सारे रोगों में चौलाई का रस विशेष लाभ प्रदान करता है। चौलाई का रस शरीर को स्वस्थ करता है तथा शरीर को तरावट देता है। गर्मी को शान्त करती है तथा शुद्ध खून पैदा करती है।

प्रोटीन 

प्रोटीन नई सेल्स के निर्माण में, नए टिश्‍यू बनाने के लिए प्रोटीन काफी लाभकारी होता है। राजगिरा में प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में होता है इसलिए राजगिरा खाना लाभकारी होता है।

एंटी ऑक्सीडेंट 

चौलाई में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट अर्थराइटिस, गठिया और सूजन जैसी बीमारियों से राहत देता है।

ज्‍वाइंट के लिए

राजगिरा में मिनरल्स पर्याप्त मात्रा में होते है साथ ही इसमें कैल्शियम भी होता है जो कि हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। ऑस्टीयोपोरोसिस, हड्डियों की कमजोरी को कम करने जैसी परेशानियों के लिए इसका सेवन लाभकारी होता है।

पाचन के लिए

राजगिरा में फाईबर पर्याप्त मात्रा में होते है इसलिए यह पाचन के लिए लाभकारी होता है। इसे खाने से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं नहीं होती। इसलिए राजगिरा खाना पाचन तंत्र के लिए लाभकारी होता है। पर ध्‍यान रहे इसे पचाने में समय लगता है , इसलिए रात के समय इसे खाने से परहेज करना चाहिए।

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कोलेस्ट्रोल को कम 

राजगिरा में विʔఀटामिन के पर्याप्‍त मात्रा में होता है। जिससे कोलेस्ट्रोल नियंत्रित रहता है।  इसमें मौजूद फाईबर कार्डियोवस्कुलर सिस्टम को भी ठीक रखता है।

वेरिकोज वेंस के लिए 

वेरिकोज वेंस की समस्या में वेंस स्किन के बाहर से दिखाई देती हैं। चौलाई में मौजूद फ्लेवेनॉइड वेंस के आउटर कवर और ब्लड वैसल्स को मजबूत करता है। जिससे  वेरिकोज वेंस के मरीजों को चौलाई खाने की सलाह दी जाती है।

आंखों के लिए 

चौलाई में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट आंखों की रोशनी बढ़ाने में लाभकारी होते हैं।

गर्भवती महिलाओं के लिए

चौलाई में फोलेट पर्याप्त मात्रा में होता है यह गर्भावस्था के लिए काफी लाभकारी होता है।

बरतें सावधानी

कुछ लोगों को चौलाई से एजर्ली होती है। उन्‍हें चौलाई का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ गालस्टोन और किडनी स्टोन (पथरी) की परेशानी से जूझ रहे लोगों को भी इसके सेवन से परहेज करना चाहिए।

चित्रस्रोत:Shutterstock.

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