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Pathri mein kya khaye : किडनी स्टोन यानि गुर्दे में पथरी बहुत हद तक आपके खान-पान से जुड़ी होती है। इसका एक मुख्य कारण है यूरीन में कैल्शियम का अधिक होना। इसका असर शरीर के कैल्शियम मैटाबोलिज़्म पर पड़ता है। नोएडा के जेपी हॉस्पिटल में डायटिटिक्स एचओडी, डॉ. करूना चतुर्वेदी का कहना है कि जरूरी नहीं कि यह हमेशा कैल्शियम की वजह से ही हो। कई बार कैल्शियम का सेवन बंद करने के बाद भी पथरी बनती रहती है। अध्ययनों से पता चला है कि आहार में कैल्शियम का सेवन बंद कर देने हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और किडनी स्टोन की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए डॉक्टर आमतौर पर कैल्शियम का सेवन बंद करने की सलाह नहीं देते। हालांकि बहुत ज्यादा मात्रा में कैल्शियम का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
डॉ. करूना चतुर्वेदी कहती हैं कि आहार में कैल्शियम कम करने के बजाए आपका डॉक्टर यह कोशिश करता है कि यूरीन में कैल्शियम कम रहे, इसके लिए सोडियम यानि नमक का सेवन कम किया जाता है। ज्यादा नमक के सेवन से कैल्शियम की पथरी बनने की संभावना बढ़ती है क्योंकि यूरीन में बहुत ज्यादा नमक होने पर ब्लड कैल्शियम को फिर से अवशोषित नहीं कर पाता। ऐसे में नमक का सेवन कम करने से यूरीन में कैल्शियम का स्तर कम हो जाता है। इससे कैल्शियम की पथरी बनने की संभावना कम होती है।
डॉ. करूना चतुर्वेदी का कहना है कि किडनी स्टोन बनने की संभावना तब भी बढ़ जाती है जब आप आहार में ज्यादा ऑक्जेलेट का सेवन करते हैं। अगर कोई व्यक्ति अपने आहार में ज्यादा एनिमल प्रोटीन जैसे बीफ, फिश, पोल्ट्री, हॉग का सेवन करता है तो शरीर और यूरीन में एसिड का स्तर बढ़ जाता है। इससे कैल्शियम ऑक्जेलेट और यूरिक एसिड स्टोन बनने की संभावना बढ़ती है। मीट से बनने वाला यूरिक एसिड कैल्शियम और यूरिक एसिड स्टोन की संभावना का बढ़ाता है।
इनोसिटोल हेक्जाफॉस्फेट और इनोसिटोल से युक्त आहार जैसे फलियां/ लैग्यूम, स्प्राउट/ अंकुरित दालें, लाल/पीली शिमला मिर्च, टमाटर, आलू, एस्पेरेगस, मेवे और बीज का सेवन करें।
एल-मेथिओनाईन से युक्त आहार जैसे मेवे, बीफ, लैम्ब, चीज़, टर्की, पोक्र, फिश, शैलफिश, सॉय, अण्डा, डेयरी प्रोडक्ट और फलियों/ बीन्स का सेवन करें।
मैग्निशियम सिट्रेट से युक्त आहार जैसे कद्दू के बीज, बादाम, पालक, काजू, मूंगफली, काले बीन्स, एवोकेडो, भूरे चावल और आलू का सेवन करें।
विटामिन बी कॉम्पलेक्स जैसे ब्रॉकली, ब्रूसेल के स्प्राउट, पत्तेदार सब्ज़ियां, छोले, राजमा, लिवर मटर, मशरूम, अण्डे, मीट और मछली का सेवन करें।
जिंक से युक्त आहार जैसे कद्दे के बीज, बादाम, चीज़, ओट, काजू, दूध, रॉक ऑयस्टर, मीट, शैलफिश, लेग्यूम, बीज और मेवों का सेवन करें।
एल-आर्जिनिन से युक्त आहार जैसे चिकन, कद्दू के बीज, सोयाबीन, मूंगफली, स्पिरूलिना, छोले, दालों का सेवन करें।
विटामिन ए से युक्त आहार जैसे पत्तेदार सब्ज़ि़यों, टमाटर, लाल शिमला मिर्च, नारंगी और पीली सब्ज़ियों, कैंटालोप, आम, मछली के तेल, दूध और अण्डे का सेवन करें।
विटामिन ई से युक्त आहार जैसे सूरजमुखी, सैफलावर, सोयाबीन का तेल, सुरजमुखी के बीज, बादाम, मूंगफली, कद्दू, लाल शिमला मिर्च, एस्पेरेगस, आम और एवोकेडो का सेवन करें।
विटामिन सी से युक्त आहार जैसे अमरूद, मीठी पीली मिर्च, ब्लैक करेंट, कैंटालोप, सरसों, पालक, ब्रॉकली, ब्रुसेल्स स्प्राउट, नींबू, पपीता और संतरा का सेवन करें।