रिफाइन्ड नहीं खाना तो इस तेल में पकाएं सब्जी-पूरी! सेहत को होंगे ये 5 बड़े नुकसान, ठीक होने में निकल जाएगी उम्र

रिफाइनिंग प्रक्रिया के कारण तेल में से बहुत सारे पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। जितना अधिक रिफाईंड उतना कम पोषण और तो और तेल में कुछ रसायन भी मिलाए जाते हैं।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : July 13, 2021 10:00 AM IST

अगर आप हेल्दी रहना चाहते हैं कि आपको अपने आहार में संतुलित मात्रा में विभिन्न प्रकार के पौष्टिक तैलीय बीजों-फलों को शामिल करना चाहिए। बादाम, अखरोट, पिस्ता, तिल, मूंगफली, सूरजमुखी के बीज, नारियल जैसे फूड्स के साथ-साथ आपको अपने खाने में कम तेल डालने चाहिए। अगर आप अपने खाने में रिफाइंड का सेवन करते हैं तो आपको ये बात पता होनी चाहिए कि रिफाइनिंग प्रक्रिया के कारण तेल में से बहुत सारे पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। जितना अधिक रिफाईंड उतना कम पोषण और तो और तेल में कुछ रसायन भी मिलाए जाते हैं। ये आपके शरीर के लिए कितने घातक हैं आइए बताते हैं आपको।

रिफाइंड ऑयल (Refined oil) के इस्तेमाल से होने वाली समस्याएं

शरीर को नहीं मिलता जरूरी फैटी एसिड

हमारे शरीर को सही प्रकार से काम करने के लिए फैटी एसिड (Fatty acid) की बहुत जरूरत होती है, जो रिफाइंड ऑयल से हमें नहीं मिल पाता है इसलिए अगर आप रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल लंबे समय तक करते हैं तो एक समय के बाद आपकेजोड़ो और अन्य अंगों में अलग-अलग प्रकार की समस्याएंहोने लगेंगी जबकि सामान्य तेल शरीर को पर्याप्त रूप से आवश्यक फैटी एसिड देने का काम करता है।

रिफाइंड तेल में नहीं होता प्रोटीन

जब भी बात प्रोटीन की होती है तो दूसरे तेलों में रिफाइंड के मुकाबले अधिक मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। वहीं रिफाइंड ऑयल को बनाते वक्त उससे बास निकाल लिया जाता है अब क्योंकि किसी भी तेल से बास निकालने से उसको प्रोटीन पूरी तरह से समाप्त हो जाता है इसलिए रिफाइंड ऑयल पूरी तरह से प्रोटीन रहित होता है जिससे शरीर को सही मात्रा में प्रोटीन नहीं मिल पाता है। लगातार रिफाइऩ्ड का सेवन करने से शरीर में प्रोटीन की कमी हो जाती है।

स्ट्रोक जैसी कई बीमारियां का कारण है रिफाइंड ऑयल

रिफाइंड ऑयल को अगर 200 डिग्री से 250 डिग्री पर लगभग आधे घंटे तक गर्म किया जाए तो ये एचएनआई (HNI) जहरीला पदार्थ बनाने लगता है, जो शरीर में जाकर प्रोटीन एवं अन्य आवश्यक पोषक तत्वों को नुकसान पहुंचा सकता हैं, जिससे लिवर, स्ट्रोक, पार्किंसन, अल्जाइमर जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

दिल संबंधी बीमारियों का कारण बनता है रिफाइंड

रिफाइंड ऑयल के इस्तेमाल से एचडीएल यानी के हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन (High-density lipoprotein ) नहीं प्राप्त हो पाता है क्योंकि रिफाइंड करने के लिए जिस प्रोसेस से ये तेल गुजरता है, उसके बाद तेल से सभी प्रकार के प्रोटीन खत्म हो जाते हैं और हमारे खाने के लिए केवल रंगहीन तरल पदार्थ ही बचता है, जो दिल संबंधी बीमारियों का कारण बनता है।

स्किन के लिए नुकसानदेह है रिफाइंड

रिफाइंड ऑयल से तेल की नेचुरल चिकनाई खत्म हो जाती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि दमकती त्वचा पाने के लिए यह चिकनाई कितनी जरूरी होती है। इस चिकनाई की वजह से त्वचा में झुर्रियां पडना एवं ड्राइनेस जैसी कई समस्याएं होने लगती है। रिफाइंड ऑयल के बढ़ते इस्तेमाल के कारण ही समय से पहले ही बुढ़ापा आने की समस्या आम हो चुकी है।

हड्डियों के लिए नुकसानदेह

जी हां, रिफाइंड ऑयल का अधिक इस्तेमाल हमारी हड्डियों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। एक रिसर्च के मुताबिक, लंबे समय तक रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल करने वाले लोगों में घुटनों एवं अन्य जोडों संबधी समस्याएं अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा थी। इसका कारण यह भी है कि रिफाइंड ऑयल को अधिक गर्म करने से उस तेल का क्षरण होने लगता है, जिससे कई प्रकार के जहरीले पदार्थ बनने लगते है। जो कि हमारे शरीर में जाकर हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है।

रिफाइंड ऑयल से बेहतर विकल्प क्या?

आप कच्ची घानी (kachi ghani) या कोल्ड प्रेस्ड तेल (Cold pressed oil) का इस्तेमाल कर सकते हैं। कच्ची घनी, तेल खाना पकाने के लिए बहुत ही बेहतरीन माना जाता है रिफाइंड ऑयल के विपरीत इस तेल में हमारे शरीर के लिए आवश्यक हेल्दी फैट्स उपस्थित होते हैं बहुत से बड़े-बड़े हेल्थ एक्सपर्ट एवं न्यूट्रीशनिस्ट कच्ची घानी तेल अर्थात कोल्ड प्रेस्ड ऑयल इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं।

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