मेनोपॉज में सूजन और जलन को दूर करने के लिए खाएं ये 4 फूड, 40 पार महिलाओं के लिए खास हैं ये फूड

मेनोपॉज से जुड़ी कुछ स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जिनके बारे में महिलाओं को जानकारी होनी चाहिए। इन्हें रोकने के लिए आपको 40 की उम्र के बाद इन 4 फूड का सेवन शुरू कर देना चाहिए।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : February 27, 2021 2:18 PM IST

मेनोपॉज, जिसे हिंदी भाषा में रजोनिवृत्ति कहते है, तब उत्पन्न होती है, जब किसी महिला का मासिक धर्म चक्र रुक जाता है। इस स्टेज पर आकर अक्सर महिलाओं में पीरियड्स अनियंत्रित हो जाते हैं, जैसे कुछ महिलाओं को कुछ महीनों में पीरियड्स होते हैं, कुछ महिलाओं को वर्षों में एक बार होते हैं तो कुछ को पीरियड्स पूरी तरह रुक जाते हैं। ऐसा आमतौर पर 45 और 55 की उम्र के बीच की महिलाओं के साथ होता है। हालांकि ये जरूरी नहीं है ऐसा किसी भी उम्र की महिला के साथ हो सकता है। मेनोपॉज के लक्षणों में पसीना आना, गर्म-गर्म महसूस होना, ध्यान न लगना, चिंता, योनि का सूखना और मिजाज में बदलाव शामिल है। हेल्दी और नियमित रूप से वर्कआउट करना न केवल महिलाओं को बेहतर महसूस कराने में मदद करता है बल्कि लंबे समय तक उनके संपूर्ण स्वास्थ्य को बढ़ाने में भी मदद करता है। हालांकि मेनोपॉज से जुड़ी कुछ स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जिनके बारे में महिलाओं को जानकारी होनी चाहिए। खुशी की बात ये है कि इनमें से अधिकांश को सही देखभाल से हल किया जा सकता है। हालांकि मेनोपॉज वाली महिलाओ को इन लक्षणों को ध्यान रखना चाहिएः

शार्ट टर्म मेनोपॉज की स्थिति में क्या करें

मसालेदार भोजन, धूम्रपान, शराब, हाई-कैलोरी फूड्स और फिजी ड्रिंक से बचें क्योंकि ये मेनोपॉज के लक्षणों को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा सोया उत्पादों के सेवन से मेनोपॉज के लक्षणों में मदद मिल सकती है क्योंकि सोया में आइसोफ्लेवोन्स नाम का एक यौगिक होता है, जो एस्ट्रोजेन के काम की नकल करता है।

लॉन्ग टर्म मेनोपॉज की स्थिति में क्या करें

लॉन्ग टर्म मेनोपॉज के कारण ऑस्टियोपोरोसिस और हृदय संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए इस स्थिति में अच्छी नींद की आदतों के साथ भरपूर आराम करना बहुत जरूरी है। कीगल जैसे वर्कआउट से पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जो मूत्र / आंत्र में होने वाली परेशानियों को रोकने या कम करने में मदद करती है।

इन 4 फूड्स को खाने से मेनोपॉज वाली महिलाओं को मिलता है आराम

बेरी

बेरी को प्राकृतिक रूप से एक एंटी-इंफ्लेमेटरी पावरहाउस के रूप में जाना जाता है। बेरी आपके मस्तिष्क स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ-साथ ब्लड प्रेशर को कम करता है। मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजेन की कमीके कारण कार्डियोप्रोटेक्टिव लाभ के साथ बेरी आपके हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में बहुत लाभकारी है। बेरी एंटीऑक्सिडेंट में भी हाई होती हैं, जो तनाव से निपटने में मदद करती हैं। इतना ही नहीं मेनोपॉज वाली महिलाओं को नींद न आने की समस्या भी रहती है, जिसमें बेरी के सेवन से इस समस्या का समाधान करने में मदद मिलती है।

सैल्मन

सैल्मन विटामिन डी, ओमेगा -3 और अन्य फैटी एसिड का एक अच्छा स्रोत है, जो ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करता है और आपके हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। कई शोध में चिंता, अवसाद और 30 से 40 की उम्र की महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करने में ओमेगा -3 फैटी एसिड को लाभकारी बताया गया है। शाकाहारी महिलाएं ओमेगा -3 सप्लीमेंट को विकल्प के रूप में चुन सकती हैं।

फलियां

छोले, काले बीन्स और राजमा जैसे फूड्स ब्लड शुगर को कम करने और इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाने में मदद करता है। कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर फलियां हड्डियों के घनत्व को कम करने में भी मदद कर सकती हैं।

साबुत अनाज

मेनोपॉज वाली महिलाओं के लिए साबुत अनाज हेल्दी डाइट का हिस्सा होना चाहिए। क्विनोआ जैसे साबुत अनाज में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन बी और मैग्नीशियम पाया जाता है। साथ ही ये अनाज ग्लूटेन मुक्त भी होते हैं, जिनमें दूसरे अनाज की तुलना में अधिक पोषण मूल्य होता है। इसमें मौजूद फाइबर और प्रोटीन की मात्रा आपको तृप्त करने के लिए काफी है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह आपक अधिक समय तक फुल रखने में मदद करती है।

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