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Diabetic Retinopathy : डायबिटिक रेटिनोपैथी को कितना जानते हैं आप? ये रहे इसके कारण, लक्षण और इलाज

डायबिटीज के कारण आंखों में एक गंभीर बीमारी हो सकती है, जिसे ‘डायबिटिक रेटिनोपैथी’ कहते हैं। यह इतनी गंभीर समस्या है कि एक बार आंखों की दृष्टि चली जाए, तो उसे वापस नहीं लाई जा सकती है। जानें, इसके लक्षण, कारण और उपचार...

Written By Anshumala
Updated : May 4, 2020 6:12 PM IST

What is Diabetic retinopathy?

Diabetic Retinopathy: डायबिटिक रेटिनोपैथी (Diabetic Retinopathy) टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) से संबंधित मुख्य संवहनी जटिलताओं (vascular complications) में से एक है और यह वयस्कों में दृष्टि दोष (visual deterioration) का सबसे आम कारण है। एक अध्ययन में कुछ शोधकर्ताओं ने शुरुआती डायबिटिक रेटिनोपैथी से पीड़ित लोगों पर एक खास माउस मॉडल का उपयोग करते हुए संभावित उपचार की बात की है। इस शुरुआती इलाज में मरीजों पर एंटी-इंफ्लेमेटरी और न्यूरोप्रोटेक्टिव एफेक्ट्स को साफ तौर पर देखा गया। द अमेरिकन जरनल ऑफ पैथोलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन की रिपोर्ट में कहा गया है कि डायबिटिक माउस मॉडल का उपयोग करके प्रारंभिक टाइप 2 डायबिटीज रेटिनोपैथी में रेटिना और ऑप्टिक नर्व पर एंटी-इंफ्लेमेटरी और न्यूरोप्रोटेक्टिव एफेक्ट्स देखा गया। इससे भविष्य में डायबिटिक रेटिनोपैथी का इलाज करना आसान होगा।

क्या है डायबिटिक रेटिनोपैथी (What is Diabetic Retinopathy) 

डायबिटीज शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों जैसे हार्ट, लिवर को नुकसान पहुंचाता है। यह तो आप जानते ही होंगे, लेकिन आपको ये पता है कि डायबिटीज आंखों को भी भारी क्षति पहुंचाता है। जी हां, डायबिटीज के कारण आंखों में एक गंभीर बीमारी हो सकती है, जिसे डायबिटिक रेटिनोपैथी’ कहते हैं। यह इतनी गंभीर समस्या है कि एक बार आंखों की दृष्टि चली जाए, तो उसे वापस नहीं लाई जा सकती है। डायबिटीक रेटिनोपैथी दो प्रकार के जैसे बैकग्राउंड डायबिटिक रेटिनोपैथी और मैक्‍यूलोपैथी होते हैं। डायबिटिक रेटिनोपैथी आंख (रेटिना) के पीछे के ऊतक में रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने के कारण होता है। खराब ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar level) इसका एक मुख्य जोखिम कारक है।

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इस रोग का पता शुरुआत में नहीं चल पाता है। इसके शुरुआती चरण के दौरान रेटिना में छोटी रक्त वाहिकाएं कमजोर हो जाती हैं और यह छोटे बुल्गेस को विकसित करती है। इस बीमारी में रक्त में शुगर की मात्रा अधिक हो जाती है, जो आंखों सहित पूरे शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है।

क्या हैं डायबिटिक रेटिनोपैथी के लक्षण (Diabetic Retinopathy Symptoms) 

शुरुआती लक्षणों में फ्लोटर्स, धुंधलापन, आंखों के सामने अंधेरा छाना, रंगों को समझने में कठिनाई के अलावा, गंभीर समस्या में दृष्टिहीनता शामिल है। जिनमें समस्या बहुत गंभीर नहीं होती, उनका इलाज डायबिटीज को मैनेज करके किया जाता है, जबकि गंभीर मामलों में लेजर उपचार या सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।

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क्यों होती है डायबिटिक रेटिनोपैथी

ब्लड में शुगर लेवल अधिक बढ़ने से रेटिना में रक्त वाहिकाओं को नुकसान होता है, जिसके कारण डायबिटिक रेटिनोपैथी हो सकती है। इस बीमारी से रेटिना के ऊतकों में सूजन हो जाती है, जिससे दृष्टि धुंधली होती है। जिन लोगों को अधिक वर्षों से डायबिटीज की समस्या होती है, उनमें डायबिटिक रेटिनोपैथी होने की आशंका बहुत होती है। यदि समय पर इसके लक्षणों को पहचानकर इसका इलाज ना कराया जाए, तो आंखों की रोशनी जा सकती है।

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कैसे करें बचाव (How to avoid Diabetic Retinopathy) 

1 डायबिटिक रेटिनोपैथी के लक्षणों में आंखों का बार-बार संक्रमित होना, चश्मे के नंबर में बार-बार परिवर्तन होना, सुबह उठने के बाद कम दिखाई देना, सिर में दर्द रहना, आंखों की रोशनी अचानक कम होना, रंग को पहचानने में कठिनाई इसके प्रमुख लक्षण होते हैं। बचाव में सबसे पहले लोगों को यही करना चाहिए कि डायबिटीज का पता लगते ही ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ने ना दें।

2 डॉक्टर जो दवाएं देते हैं, उन्हें समय पर लेते रहें। डायबिटीज होने पर एक साल में दो बार आंखों की जांच कराएं, ताकि पता चल सके कि डायबिटीज के कारण आंखों पर कोई नकारात्मक असर तो नहीं हो रहा है। इससे समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है।

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कैसे होता है इस रोग का इलाज (Diabetic Retinopathy Treatment) 

डायबिटिक रेटिनोपैथी का उपचार लेजर से किया जाता है। इस उपचार विधि के दौरान रेटिना के पीछे की नई रक्त वाहिकाओं के विकास के इलाज के लिए और आंखों में रक्त और द्रव के रिसाव को रोकने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, आंखों में इंफ्लेमेशन को कम करने या आंखों के पीछे नई रक्त वाहिकाओं को बनने से रोकने के लिए आंखों में ल्यूसेंटिस, अवास्टिन जैसे इंजेक्शन लगाए जाते हैं। दृष्टि स्थिर हो जाने पर इंजेक्शन लगाना बंद कर दिया जाता है। लेजर और इंजेक्शन प्रक्रिया से इलाज संभव नहीं होता है, तो व्रिटेक्टमी नामक सर्जरी से इलाज किया जाता है।

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