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विश्‍व मधुमेह दिवस  : जानते हैं, तो मानिए भी, तभी हारेगी यह बीमारी

दि हेल्‍थ साइट के फेसबुक पोल में अधिकांश लोगों ने यह माना कि डायबिटीज अनहेल्‍दी लाइफस्‍टाइल के कारण होती है।

विश्‍व मधुमेह दिवस  : जानते हैं, तो मानिए भी, तभी हारेगी यह बीमारी

Written by Yogita Yadav |Updated : November 14, 2018 6:07 PM IST

14 नवम्बर चाटर्रा, बेन्टिंग का जन्मदिन है जिन्होंने कानाडा के टोरन्टो शहर में बेन्ट के साथ मिलकर सन 1921 में इन्सुलिन की खोज की थी। इतिहास की इस महान खोज को अक्षुण रखने के लिए इन्टरनेशनल डायबिटीज फेडेरेशन (आईडीएफ) द्वारा 14 नवम्बर को पिछले दो दशको से विश्व डायबिटीज दिवस के तौर पर मनाया जाने लगा है। यह दिन डायबिटीज की खतरनाक दस्तक के प्रति लोगों को जागरुक करने के उद्देश्‍य से मनाया जा रहा है। यह भी पढ़ें - यह भी पढ़ें – वर्ल्‍ड डायबिटीज डे : डायबिटीज से हैं पीड़ित, तो ऐसें बनाएं अपना डायट चार्ट

जानें क्‍या कहता है नीला छल्‍ला

सन 2007 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस दिवस को अंगीकार करने के बाद इस का प्रतीक चिह्न नीला छल्ला चुना गया है। छल्ला या वृत्त, निरंतरता का प्रतीक है। वृत्त इस बात का प्रतीक है कि विश्व के सभी लोग इस पर काबू पाने के लिये एकजुट हों। नीला रंग आकाश, सहयोग और व्यापकता का प्रतीक है। इस प्रतीक चिह्न के साथ जो सूत्र वाक्य दिया गया है वह है- मधुमेह के लिए एकजुटता। यह भी पढ़ें – वर्ल्‍ड डायबिटीज डे : बचपन में न घुल जाए मधुमेह की कड़वाहट

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भारत में मधुमेह

भारत को मधुमेह की राजधानी कहा जाता है। खानपान की ख़राबी और शारीरिक श्रम की कमी के कारण पिछले दशक में मधुमेह होने की दर दुनिया के हर देश में बढ़ी है। भारत में इसका सबसे विकृत स्वरूप उभरा है जो बहुत भयावह है। जीवनशैली में अनियमितता मधुमेह का बड़ा कारण है। एक दशक पहले भारत में मधुमेह होने की औसत उम्र चालीस साल की थी जो अब घट कर 25 से 30 साल हो चुकी है। 15 साल के बाद ही बड़ी संख्या में लोगों को मधुमेह का रोग होने लगा है। कम उम्र में इस बीमारी के होने का सीधा मतलब है कि चालीस की उम्र आते-आते ही बीमारी के दुष्परिणामों को झेलना पड़ता है।

काटने पड़ सकते हैं अंग

दिल्ली मधुमेह अनुसंधान केन्द्र के अनुसार सभी तरह के निचले अंग विच्छेदन के मामले में 45 से 75 फ़ीसदी मधुमेह रोगी होते हैं। 2030 में मधुमेह रोगियों की अनुमानित संख्या क़रीब आठ करोड़ है, जिसमें एक करोड़ लोगों को डायबिटिक पैरों का ख़तरा होगा। यह मधुमेह रोगियों में सर्वाधिक गम्भीर, जटिल व खर्चीली बीमारी है। इस रोग के परिणामस्वरूप शरीर के निचले हिस्से के अंगों में विच्छेदन की संख्या बढ़ी है। मधुमेह (डायबिटीज) के कारण ही किडनी की ख़राबी, हृदय आघात, पैरों का गैन्ग्रीन और आंखों का अन्धापन अब भारत की मुख्य स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है।

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फेसबुक पोल

दि हेल्‍थ साइट ने जब अपने फेसबुक पोल में लोगों से पूछा कि डायबिटीज होने का मुख्‍य कारण क्‍या है। तब 68 फीसदी लोगों का जवाब था ‘अनहेल्‍दी लाइफ स्‍टाइल से’ । जबकि 32 फीसदी लोगों को अब तक यह लगता था कि मधुमेह यानी डायबिटीज अधिक मीठा खाने से होने वाली बीमारी है। असल में अनहेल्‍दी लाइफ स्‍टाइल का मतलब ही है असंयमित जीवन जीने का तरीका। जिसमें शरीर की आलस्‍यपूर्ण आदतें भी शामिल हैं और खानपान संबंधी गलत आदतें भीं। अगर आप चाहते हैं इस बीमारी से बचपना तो आपको अपनी जीवनशैली में पूर्ण रूप से सुधार करना होगा। यह सिर्फ आपके लिए ही नहीं, बल्कि आपके परिवार के लिए भी जरूरी है।

जानते हैं, तो मानिए भी

इस वर्ष की थीम है बच्‍चों और किशोरों को इस बीमारी के प्रकोप से बचाना। अगर आप जानते है कि यह बीमारी क्‍यों बढ़ रही है, तो इसे रोकने के उपाय भी आपको मानने होंगे।

ऐसे करें बचाव

  • जीवनशैली और खानपान दोनों संयमित रखें।
  • सोने और जागने के आदर्श नियमों का पालन करें। रात की नींद शरीर के लिए बेहतर है। इसी तरह सुबह जल्‍दी उठना भी एक हेल्‍दी आदत है।
  • व्‍यायाम और योग को अपने रूटीन में शामिल करें। सुबह व्‍यस्‍त हैं तो शाम को योग और व्‍यायाम कर सकते हैं।
  • तला-भुना बहुत ज्‍यादा न खाएं।
  • खाना कम और बार-बार खाएं।
  • टेस्ट नियमित करते रहें।
  • तनाव और गुस्‍सा दोनों को खुद से दूर रखें।
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