... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: akhilesh dwivedi | Updated : January 10, 2020 1:45 PM IST
Older adults and those already taking other diabetes medications were more likely to decline insulin therapy.
डायबिटीज या मधुमेह की जब भी बात होती है तो वह टाइप 2 डायबिटीज की ही ज्यादातर होती है. लेकिन क्या आपको पता है कि टाइप 1.5 डायबिटीज (Type 1.5 Diabetes) भी होता है. हाल के वर्षों में टाइप 2 डायबिटीज के साथ ही टाइप 1.5 डायबिटीज के भी मरीज बढ़ने लगे हैं. मधुमेह का यह प्रकार डायबिटीज के अन्य प्रकारों से ज्यादा खतरनाक होता है. डॉक्टर्स की माने तो टाइप 1.5 डायबिटीज का पता आसानी नहीं चलता है. इसके कारण मरीज को टाइप 2 डायबिटीज का इलाज दिया जाता रहता है. कई बार टाइप 1.5 का इलाज न मिलने की वजह से मरीज की मौत भी हो जाती है.
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार टाइप 1.5 डायबिटीज लेटेंट ऑटोइम्यून डायबिटीज ऑफ एडल्टहुड है. टाइप 1.5 डायबिटीज होने पर आंखों और दिल पर सीधा असर होता है. कई शोध और डॉक्टर्स मानते हैं कि इस बीमारी का सबसे बड़ा खतरा यह है कि इसका पता आसानी से नहीं चलता है. टाइप 1.5 डायबिटीज का सही समय पर पता न चलने की वजह से ठीक इलाज मरीज को नहीं मिल पाता है.
टाइप 1.5 डायबिटीज को लाडा के नाम से भी जाना जाता है. लेटेंट ऑटोइम्यून डायबिटीज ऑफ एडल्टहुड शॉर्ट फार्म है. ज्यादातर मामलों में टाइप 1.5 की बीमारी युवाओं को होती है.4 तरीके जो कंट्रोल कर सकते हैं टाइप 2 डायबिटीज.
अभी तक के हुए शोध बताते हैं कि टाइप 1.5 डायबिटीज खराब लाइफस्टाइल और खान-पान की वजह से होती है. टाइप 1.5 डायबिटीज में शरीर के बीटा सेल्स काम करना बंद कर देते हैं. डॉक्टर्स मानते हैं की डायबिटीज के कुल मरीजों में लगभग 10 प्रतिशत लोग दरअसर लाडा या टाइप 1.5 डायबिटीज के शिकार होते हैं. टाइप 1 डायबिटीज के पांच सवाल, आप भी जान लें.
हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि टाइप 1.5 डायबिटीज को पकड़ना मुश्किल है. अगर समय पर टाइप 1.5 डायबिटीज का पता चल जाए तो लाइफस्टाइल और खान-पान से इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है.