पांच झूठ जो डायबिटीज के मरीज डॉक्टर से बोलते हैं

डॉक्टर गुप्ता कहते हैं कि डायबिटीज में लापरवाही से मरीज की सही से स्क्रीनिंग नहीं हो पाती है. इसकी वजह से डायबिटीज रोगी ठीक होने के बजाय और भी मर्ज के गिरफ्त में आता जाता है. डायबिटीज रोगी अक्सर डॉक्टर से सही बात नहीं बताते हैं. ऐसे में मधुमेह रोगियों की परेशानी कई बार बढ़ जाती है.

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : November 29, 2019 11:08 AM IST

जब हम किसी रोग की से परेशान होते हैं तो हम डॉक्टर के पास जाते हैं और अपनी समस्या के बारे बात करते हैं। कुछ हेल्थ की समस्याएं ऐसी होती हैं जो दैनिक जीवन के खान पान को प्रभावित करती हैं. और उनके इलाज के लिए डॉक्टर भी खान-पान में परहेज करने के लिए बोलते हैं। उसी में से एक है डायबिटीज का रोग, जी हां इस समस्या से परेशान लोग अक्सर डाक्टर से झूठ बोलते हैं. क्योंकि लाइफस्टाइल और खान-पान के जरूरी परहेज न करने की वजह से वो ऐसा करते हैं। हम यहां पांच वो झूठ आपको बताने जा रहे हैं जो अक्सर एक डायबिटीज का मरीज अपने डॉक्टर से बोलता है।

स्वस्तिक मेडिकल सेंटर, वसुंधरा के कंसल्टेंट फिजिशियन एण्ड डायबेटोलॉजिस्ट डॉक्टर राहुल गुप्ता के अनुसार "कभी-कभी लोग डॉक्टर से सच नहीं बताते हैं क्योंकि लोग सोचते हैं कि डॉ. उनको पंसद करे या डॉ. उनको डांट न लगाये लेकिन ऐसा करने से लोग डॉक्टर की डांट से तो बच सकते हैं लेकिन वो अपने डायबिटीज के प्रति लापरवाह हो जाते हैं और इसका कभी-कभी गंभीर परिणाम होता है।''

ब्लड शुगर की नियमित जांच

डायबिटीज के मरीजों में अक्सर देखा गया है कि इस बारे में वो अपने डॉक्टर से झूठ बोलते हैं। मरीज के इस कदम से मरीजों का इलाज सही तरीके से नहीं हो पाता है। डॉक्टर गुप्ता कहते हैं कि इस विषय में लापरवाही से अक्सर मरीज की सही से स्क्रिनिंग नहीं हो पाती है और मरीज ठीक होने के बजाय और भी मर्ज के गिरफ्त में आता जाता है।

दवा टाइम पर लेना

डायबिटीज हो या अन्य किसी भी रोग का मरीज किसी को दवा खाना अच्छा नहीं लगता है। जहां उनके हेल्थ में थोड़ा सुधार दिखता है वो इसके प्रति लापरवाह हो जाते हैं। डायबिटीज के मरीजों को इस तरह के रवैये से बचना चाहिए इसकी वजह से उनके डायबिटीज में सुधार नहीं होता और उसका लेवल बढ़ने लगता है।

रोजाना व्यायाम

डायबिटीज के मरीज को रोजाना वर्कआउट की आवश्यकता होती है। अक्सर इस मामले में भी मरीज झूठ बोलते हैं और इसकी वजह से मरीज में सुधार की संभावना कम हो जाती है।

डॉ. गुप्ता कहते हैं कि ''रोजाना व्यायाम से इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ती हैं और व्यायाम से शरीर की मांसपेशियां ब्लड से ग्लूकोज को खींचती हैं और इसके परिणाम स्वरूप ब्लड शूगर के लेवल में सुधार की संभावना बढ़ती है।''

हेल्दी खान-पान

इस मामले में भी अक्सर मरीज डॉक्टर से झूठ बोलते हैं। कई रिसर्च में में इस बात का खुलासा हुआ है कि डायबिटीज के मरीज होने के बाद भी लोग अपने खान-पान में बहुत ज्यादा परिवर्तन नहीं करते हैं।

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एक्सपर्ट की माने तो डायबिटीज होने के बाद एक बेहतर डायट एक्सपर्ट से अपने दैनिक जीवन के लिए खान-पान के रूटीन को बनवाना चाहिए और फॉलो करना चाहिए।

सेक्स लाइफ

डायबिटीज के मरीज से डॉक्टर जब इस बारे में बात करता है तो वो उसे कहते हैं कि क्या हम अपने पैरों के बारे में बात कर सकते हैं। जबकि इसके लक्षण को डॉक्टर को जानना जरूरी होता है। डॉक्टर्स कहते हैं कि डायबिटीज की वजह से लोगों में सेक्स लाइफ में 50 प्रतिशत तक की गिरावट आ जाती है।

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