डायबिटीज की बीमारी सिर्फ इंसुलिन की वजह से नहीं इन कारणों से भी हो सकती है

डायिटीज की बीमारी एक मेटाबॉलिक डिसआर्डर की बीमारी है. विश्वस्तर पर देखा जाये तो टाइप 2 डायबिटीज एक महामारी के स्तर पर पहुंच गया है. डायबिटीज रोग इंसुलिन प्रतिरोध कम होने के कारण होती है. जनेवा यूनिवर्सिटी में हुए हाल के अध्ययन में पाया गया है कि सिर्फ इंसुलिन प्रतिरोध से ही डायबिटीज की बीमारी होती है यह सच नहीं हैं.

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : September 13, 2019 11:55 AM IST

डायबिटीज की बीमारी एक मेटाबॉलिक डिसआर्डर की बीमारी है. विश्वस्तर पर देखा जाये तो टाइप 2 डायबिटीज एक महामारी के स्तर पर पहुंच गया है. डायबिटीज रोग इंसुलिन प्रतिरोध कम होने के कारण होती है. जनेवा यूनिवर्सिटी में हुए हाल के अध्ययन में पाया गया है कि सिर्फ इंसुलिन प्रतिरोध से ही डायबिटीज की बीमारी होती है यह सच नहीं हैं. डायबिटीज फैटी लीवर (Diabetes and Fatty Liver) की वजह से भी हो सकती है.

शोधकर्ताओं के अनुसार मोटापा और फैटी लीवर भी इंसुलिन प्रतिरोध को बढ़ाते हैं. फैटी लीवर की वजह से हार्मोन में जो बदलाव आते हैं वो ज्यादा ग्लूकोज बना सकते हैं. ग्लूकोज के अधिक उत्पादन से टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है. इसका संबंध किसी हार्मोनल बदलाव से भी नहीं होता है. इस अध्ययन को बायोलॉजिकल केमिस्ट्री में प्रकाशित किया गया है.

फैटी लीवर से डायबिटीज का खतरा क्यों ?

जब फैटी लीवर की परेशानी होती है तो शरीर के हार्मोन के व्यवहार में बदलाव होता है. शरीर में ग्लूकोज का स्तर दो विरोधी हार्मोन से नियंत्रित होता है. एक हार्मोन शरीर में ग्लूकोज के स्तर को बढ़ाने का काम करता है तो दूसरा इसे बढ़ाने का काम करता है. लीवर इन दोनों हार्मोन की मदद से शरीर में ग्लूकोज के स्तर को नियमित करके ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करता है.

जो लोग मोटापा के शिकार होते हैं उनमें इंसुलिन प्रतिरोध विकसित होने लगता है और लीवर में फैट जमा होने का खतरा बढ़ जाता है. फैटी लीवर होने की वजह से माइटोकॉन्ड्रिया का कार्य प्रभावित होता है. शरीर में ऊर्जा संरक्षण और वितरण का काम माइटोकॉन्ड्रिया द्वारा ही किया जाता है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि इन परिवर्तनों के कारण माइटोकॉन्ड्रियल फंक्शन प्रभावित होता है. शोध में इस बात की खोज करने की कोशिश की गयी कि माइटोकॉन्ड्रिया, मोटापा और मधुमेह की बीच क्या संबंध है.

फैटी लीवर और डायबिटीज से कैसे बचें 

इस शोध से एक बात तो स्पष्ट हो जाती है कि अगर फैटी लीवर की बीमारी किसी को होती है, तो टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है. मोटापा और फैटी लीवर की बीमारी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. इन दोनों ही परेशानियों से बचा जा सकता है. अगर फैटी लीवर और मोटापा को रोकने में सफल रहें तो टाइप 2 डायबिटीज से भी बचा जा सकता है. इन दोनों ही चीजों से बचने के लिए कुछ आसान उपाय भी हैं.

वजन कम करें 

अगर आप मोटापा के शिकार हैं, आपका वजन जरूरत से ज्यादा है, तो आपको सतर्क होने की जरूरत है. वजन कम करने के लिए तुरंत प्रयास करें. इसके लिए खराब खान-पान को बंद करें. हेल्दी डाइट प्लान अपनाएं और रोजाना एक्सरसाइज करें.

हेल्दी डाइट लें 

वजन कम करने के साथ शरीर के मेटाबॉलिक रेट को नियमित करने के लिए हेल्दी डाइट प्लान अपनाएं. खाने में फाइबर, प्रोटीन और विटामिन वाले खाद्य पदार्थ लें. शुगर वाले खाद्य पदार्थ का नियंत्रित सेवन करें. फल और सब्जियों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें.

वर्कआउट और एक्सरसाइज जरूर करें 

वजन कम करने और हेल्दी डाइट के साथ रोजाना व्यायाम भी जरूरी है. अगर आप जिम नहीं जा सकते हैं तो रोजाना कम से कम 10 हजार कदम पैदल चलें. सुबह की सैर पर जाएं. नियमित तौर पर कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज जरूर करें.

डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए डेली डाइट चार्ट.

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