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बच्चों में डायबिटीज (Diabetes in Children) का खतरा वर्तमान समय में बढ़ता जा रहा है. स्वस्थ्य दिखने वाले बच्चे भी डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं. शहरी क्षेत्र में यह परेशानी ज्यादा है. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि यह समस्या शहरों तक ही सीमित है. गांव के बच्चों में डायबिटीज की बीमारी होने लगी है. बच्चों में डायबिटीज (Diabetes in Children)की बीमारी बड़ों से थोड़ा अलग होती है. डॉक्टर के अनुसार बच्चों में डायबिटीज (Diabetes in Children) के लक्षणों को समय पर अगर पहचान लिया जाए तो इलाज बहुत आसान हो जाता है.
लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि माता-पिता इसे पहचान ही नहीं पाते हैं. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि वो बिल्कुल ऐसा नहीं कर सकते हैं. बच्चों में डायबिटीज (Diabetes in Children) की समस्या अचानक से नहीं आती है. इसके शुरुआती लक्षण भी होते हैं. अगर शुरुआती लक्षणों को पहचान लिया जाय तो उम्रभर की डायबिटीज से बच्चों को बचाया जा सकता है.
बड़ों में डायबिटीज के कई कारण होते हैं लेकिन बच्चों में डायबिटीज का क्या कारण है, यह अभी तक पता नहीं लगाया जा सका है. लेकिन चार साल से 18 साल के बच्चों को ज्यादातर टाइप 1 डायबिटीज होती है. वहीं 18 साल से अधिक उम्र वाले युवा को टाइप 2 डायबिटीज का खतरा ज्यादा होता है.
एक खास बात और ध्यान में रखनी चाहिए कि बच्चों में डायबिटीज (Diabetes in Children) माता-पिता के डायबिटीक होने की वजह से नहीं होती है. बच्चों में डायबिटीज होने का मुख्य कारण ऑटोइम्यून की बीमारी मानी जाती है.
बच्चों को ऑटोइम्यून बीमारी तब होती है जब उनके शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होता है. डॉक्टर इससे बचने के लिए पोषक तत्व वाला खाना और अच्छी लाइफस्टाइल के साथ एक्सरसाइज की सलाह देते हैं.
टाइप 1 डायबिटीज में पैंक्रियाज ग्रंथि में शुगर को नियंत्रित करने वाले हार्मोन अर्थात इंसुलिन का स्राव कम होना होता है. जब पैंक्रियाज ग्रंथि में इंसुलिन का स्राव कम होता है तो खून में ग्लूकोज की मात्रा तेजी से बढ़ने लगती है.
अगर इस परेशानी का सही समय पर इलाज न किया जाय तो बच्चे को गंभीर परेशानी हो सकती है. बच्चों में डायबिटीज का इलाज सही समय पर न किया जाए तो किडनी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. बच्चे का शारीरिक विकास भी रूक जाता है.
बच्चा अगर बार-बार पेशाब करने जाए तो डायबिटीज के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं.
बार-बार भूख और प्यास लगना भी एक प्रमुख लक्षण है.
थकान बहुत जल्दी लगती है तो भी डायबिटीज का खतरा हो सकता है.
अगर बच्चे का वजन कम हो रहा हो तो भी डायबिटीज का खतरा हो सकता है.
अगर बच्चों में मधुमेह (Diabetes in Children) अर्थात डायबिटीज के लक्षण दिखाई देते हैं, तो सबसे पहले डॉक्टर से सलाह लेकर शुगर की जांच कराएं. अगर टाइप 1 डायबिटीज पायी जाती है तो डॉक्टर द्वारा सुझाए गये सलाह का पालन करें.
मधुमेह की बीमारी बच्चों में होने के बाद उनकी लाइफस्टाइल को बदलना होगा. डाइट प्लान के साथ एक्ससाइज पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है.
डायबिटीज होने के बाद बच्चे को जीवनभर इसका इलाज करना होता है. बच्चों में डायबिटीज (Diabetes in Children) होनेे के बाद उनको इंसुलिन का इंजेक्शन जीवनभर लेना होता है. दिन में यह दो से तीन बार भी लेना पड़ सकता है.
वैसे अब डायबिटीज के इलाज के लिए इंसुलिन पम्प या आर्टिफिशियल पैंक्रियाज भी आ गये हैं. बिना इंजेक्शन के भी इससे इंसुलिन की दवा दी जा सकती है.