विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस 2019 के अवसर पर जानें सुसाइड से जुड़े भ्रम और बचाव के तरीके

हर साल 10 सितंबर को मनाया जाता है. वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे मनाने का मुख्य उद्देश्य है लोगों को आत्महत्या से जुड़े प्रश्नों और उनके उत्तर के बारे में जागरूक करना है. आत्महत्या के आंकड़े साल दर साल बढ़ते ही जा रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़े बताते हैं कि हर 40 सेकेंड में एक इंसान आत्महत्या कर रहा है. विश्वभर में 15 से 29 वर्ष के लोगों की मौत का दूसरा सबसे प्रमुख कारण आत्महत्या ही है. भारत में हर घंटे एक छात्र सुसाइड करता है. आत्महत्या की वजह से होने वाली इतनी मौतों के बाद भी हमारे समाज में इसके प्रति जागरूकता की कमी है. डिप्रेशन, तनाव और आर्थिक तंगी के अलावा गरीबी और पढ़ाई सुसाइड की मुख्य वजह मानी जाती हैं. आइए जानते हैं कुछ भ्रम और बचाव के तरीके के बारे में....

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : September 9, 2019 5:57 PM IST

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (World Suicide Prevention Day) हर साल 10 सितंबर को मनाया जाता है. वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे मनाने का मुख्य उद्देश्य है लोगों को आत्महत्या से जुड़े प्रश्नों और उनके उत्तर के बारे में जागरूक करना है. आत्महत्या के आंकड़े साल दर साल बढ़ते ही जा रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़े बताते हैं कि हर 40 सेकेंड में एक इंसान आत्महत्या कर रहा है. विश्वभर में 15 से 29 वर्ष के लोगों की मौत का दूसरा सबसे प्रमुख कारण आत्महत्या ही है. भारत में हर घंटे एक छात्र सुसाइड करता है. आत्महत्या की वजह से होने वाली इतनी मौतों के बाद भी हमारे समाज में इसके प्रति जागरूकता की कमी है. डिप्रेशन, तनाव और आर्थिक तंगी के अलावा गरीबी और पढ़ाई सुसाइड की मुख्य वजह मानी जाती हैं. आइए जानते हैं कुछ भ्रम और बचाव के तरीके के बारे में....

कैसे जानें कि इंसान आत्महत्या करने के बारे में सोच रहा है ?

World Suicide Prevention Day 2019 Suicide myth Prevention and Counselling

किसी भी इंसान के दिमाग में क्या चल रहा है, इसके बारे में जानना इतना आसान नहीं है. लेकिन कुछ लक्षणों या संकेतों के माध्यम से हम जान सकते हैं कि इंसान आत्महत्या के बारे में सोच रहा है. विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (World Suicide Prevention Day) पर हम आपको कुछ ऐसे तथ्य बता रहे हैं, जो आत्महत्या के लक्षण माने जाते हैं.

अगर इंसान बात-बात पर गुस्सा दिखाता है तो उसका मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं है. उससे सामान्य और हल्की-फुल्की बात करके उसकी परेशानी के बारे में जरूर जानें.

दैनिक जीवन में खतरे भरे काम करने की आदत या बिना सोचे समझे खतरनाक गतिविधियों में भाग लेने की लत भी आत्महत्या का लक्षण माना जाता है.

अपने में गुम रहने की आदत. घर-परिवार और दोस्तों से अचानक दूरी भी आत्महत्या की कोशिश करने का संकेत हो सकता है.

अचानक स्वभाव में बदलाव और नींद की कमी, व्याकुलता के लक्षण भी आत्महत्या के प्रमुख संकेत हैं.

डिप्रेशन, तनाव की बीमारी से परेशान लोगों में भी आत्महत्या की संभावना बहुत अधिक होती है.

कौन कर सकता है आत्महत्या ?

कुछ लोगों को आप कहते हुए सुनते हैं कि मैं आत्महत्या कर लूंगा. ऐसी बातें करने वाले लोगों में सुसाइड की संभावना बहुत अधिक होती है.

एक बार जो सुसाइड की कोशिश कर चुका हो और नाकाम हो चुका हो. उस इंसान में भी आत्महत्या की संभावना बहुत अधिक होती है.

अत्महत्या का इतिहास परिवार में पीढ़ी-दर-पीढ़ी जाता है. अगर किसी के परिवार में किसी ने आत्महत्या की है तो उसके परिवार के सदस्यों में इसकी संभावना बहुत अधिक होती है.

मानसिक बीमारी के शिकार लोगों में आत्महत्या की संभावना बहुत अधिक होती है. डिप्रेशन, तनाव जैसे मानसिक रोग आत्महत्या के प्रमुख कारक माने जाते हैं.

अचानक से दैनिक जीवन में कोई घटना जो सदमा देने वाली हो, यह भी सुसाइड का मुख्य कारण है. उदाहरण के तौर पर हम आर्थिक नुकसान, जानलेवा बीमारी का पता चलना और परीक्षा में फेल होने का डर या फेल हो जाने के बाद आत्महत्या की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है.

आत्महत्या के बारे में भ्रम या मिथक 

छात्रों की आत्महत्या के बारे में समाज में एक भ्रम यह है कि यह शैक्षिक संस्थान और पढ़ाई के दबाव की वजह से ऐसा होता है. जबकि यह हकिकत नहीं है. छात्रों की सुसाइड की कई वजह हो सकती हैं. इसके लिए परिवार और दोस्तों को बच्चों पर नजर रखनी होती है. जरूरत पड़ने पर उन्हें उचित सलाह के साथ काउंसलर, फिजीशियन और मनोचिकित्सक से मदद लेनी चाहिए.

दूसरा सबसे बढ़ा भ्रम लोगों के बीच में यह है कि आत्महत्या की वजह खराब परवरिश होती है. इस बारे में एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसा हर मामले में नहीं होता है. यह भी एक कारण हो सकता है, लेकिन इंसान को कब मानसिक तौर पर सहयोग की जरूरत है. इसकी जानकारी घर-परिवार, माता-पिता और दोस्तों को जरूर होनी चाहिए.

कुछ लोग मानते हैं कि आत्महत्या लोग शर्म और अपमान से बचने के लिए करते हैं. जबकि यह सच्चाई नहीं है. हकीकत यह है कि सुसाइड एक तरह से हादसा है जिसका शिकार इंसान का दिमाग हो जाता है. इस हादसे का शिकार किसी भी इंसान का दिमाग हो सकता है. विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (World Suicide Prevention Day) पर हमें इस हादसे को रोकने के लिए सतर्क रहना होगा.

अगर आपके परिवार, दोस्त और आस-पास रह रहे लोगों में ऐसे कोई बदलाव आते हैं, तो उनका पूरा सहयोग करें. जरूरत के अनुसार मनोचिकित्सक, काउंसलर और फिजीशियन की मदद लें.

शरीर में विटामिन और पोषक तत्वों की कमी से भी मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है. अपने परिवार और घर को आत्महत्या के हादसे से बचाने के लिए स्वस्थ्य व पोषण युक्त आहार पर जरूर जोर दें.

आत्महत्या की खबरें सुनकर खुदकुशी करना है एक बीमारी - सुसाइड कंटेजियन.