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If you fail to get yourself checked and treated on time, you may go through complications like severe abdominal pain, persistent vomiting, blood in your urine, bleeding from your gums, difficulty in breathing etc. © Shutterstock
तेलंगाना के अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ है, जिसमें डेंगू के लक्षणों के (Dengue in telangana) मरीज भी शामिल हैं, लेकिन राज्य सरकार इससे इनकार कर रही है और निजी अस्पतालों को भी डेंगू मरीजों की संख्या नहीं बताने को कहा गया है। राज्य सरकार का कहना है कि ऐसा वह इसे लेकर दहशत फैलने से रोकने के लिए कर रही है। राज्य के प्रमुख सरकारी अस्पतालों व हैदराबाद (telangana Dengue) में निजी स्वास्थ्य सुविधाओं व दूसरे हिस्सों में सैंकड़ों लोगों का वायरल बुखार, मलेरिया और मौसमी बीमारियों व डेंगू के लक्षणों का इलाज चल रहा है।
हैदराबाद का फीवर अस्पताल मरीजों से भरा पड़ा है, जिसमें बहुत सारे संदिग्ध डेंगू के लक्षणों वाले मरीज हैं। फीवर अस्पताल को सर रोनाल्ड रॉस इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल एंड कम्युनिकेबल डिजीज के नाम से भी जाना जाता है।
इसी तरह की स्थिति उस्मानिया अस्पताल, गांधी अस्पताल, नीलोफर बाल एवं प्रसूति अस्पताल पेटलाबुर्ज में है। हैदराबाद के सभी सरकारी अस्पतालों में राज्य भर से मरीज आ रहे हैं।
उत्तराखंड में डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं, जानें कारण और बचाव
अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर व मेडिकल स्टाफ बड़ी संख्या में मरीजों से निपटने में नाकाफी साबित हो रहे हैं। कुछ अस्पतालों में दो मरीजों को एक बेड पर समायोजित किया जा रहा है। कुछ मरीजों का इलाज फर्श पर भी किया जा रहा है।
मौजूदा महीने में राज्य में करीब 3,000 डेंगू के मामले सामने आए हैं। इस तरह से जनवरी अब तक सामने आए मामलों की कुल संख्या 4,500 हो गई है।
राज्य भर में अनाधिकारिक तौर पर डेंगू से मौत के 56 मामले रिपोर्ट किए गए हैं, जबकि सरकार ने डेंगू से सिर्फ एक मौत होने का दावा किया है।
दो दिन पहले स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू से पहली मौत की पुष्टि की है। मेडचल जिले के 35 साल के व्यक्ति की मौत हैदराबाद के बाहरी इलाके में एक निजी अस्पताल में हुई है।