डेंगू बुखार क्या है, वैक्सीनेशन, लक्षण और उपचार

डेंगू बुखार का सबसे आम लक्षण तेज दर्द के साथ बुखार आना है. डेंगु में शरीर के जोड़ों सहित पूरे शरीर में तेज दर्द हो सकता है. कुछ लोगों में डेंगू की समस्या होने पर उल्टी जैसी समस्या भी देखी जाती है. डेंगू में हड्डियों और मांसपेशियों में तेज दर्द के साथ बुखार होता है. डेंगू के मरीज के स्किन पर भी कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं. डेंगू के मरीज में लाल चकत्ते या रैशज हो सकते हैं.

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : September 23, 2019 4:43 PM IST

डेंगू बुखार मच्छर काटने से होने वाली बीमारी है. डेंगू का वायरस मच्छर के काटने से इंसान के शरीर में जाता है और डेंगू फीवर होता है. डेंगू बुखार का समय पर सही इलाज जरूरी होता है. डेंगू एक जानलेवा बीमारी है. डेंगू वायरस का असर शरीर में 7 दिनों तक रहता है. डेंगू फीवर शुरुआत के 3 दिनों तक ज्यादा खतरनाक होता है. चौथे दिन से डेंगू वायरस का असर कम होने लगता है. डेंगू मच्छर की विशेष पहचान है कि यह ज्यादातर दिन के समय में काटता है. डेंगू का वायरस इंसान में Aedes aegypti mosquitoes के काटने से पहुंचता है.

डेंगू क्या है ?

डेंगू को सामान्य भाषा में कहा जाए तो वायरस की वजह से होने वाला एक वायरल बुखार है. डेंगू के वायरस मच्छरों द्वारा इंसान तक पहुंचते हैं. डेंगू बुखार होने पर शरीर में बहुत तेज दर्द होता है. भारत के कुछ इलाकों में इसे हड्डी-तोड़ बुखार भी कहते हैं. ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि डेंगू बुखार होने पर लगता है कि हड्डियां टूट गयी हैं.

डेंगू वैक्सीन/डेंगू टीका 

डेंगू वैक्सीन बनाने का दवा कई देश कर चुके हैं. लेकिन अभी उनका इस्तेमाल शुरु नहीं किया जा सका है. डेंगू वायरस के कई प्रकार होने की वजह से अभी तक कोई सटीक डेंगू वैक्सीन या डेंगू टीका नहीं बनाया जा सका है. डेंगू से बचने के लिए कुछ टीके उपलब्ध हैं लेकिन उनकी वजह से जीका वायरस का खतरा बढ़ जाता है. डेंगू वैक्सीन पर वैज्ञानिक काम कर रहे हैं.

किसी भी बीमारी के फैलने के खतरे से बचने के लिए वैक्सीन या टीका का इस्तेमाल किया जाता है. अन्य टीकों की तरह ही डेंगू वैक्सीन या डेंगू टीका पर शोध चल रहा है. जिस तरह की अपेक्षा थी अभी तक उस तरह का कोई खास टीका बाजार में हीं आ सका है.

डेंगू के लक्षण

डेंगू बुखार का सबसे आम लक्षण तेज दर्द के साथ बुखार आना है. डेंगु में शरीर के जोड़ों सहित पूरे शरीर में तेज दर्द हो सकता है. कुछ लोगों में डेंगू की समस्या होने पर उल्टी जैसी समस्या भी देखी जाती है. डेंगू में हड्डियों और मांसपेशियों में तेज दर्द के साथ बुखार होता है. डेंगू के मरीज के स्किन पर भी कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं. डेंगू के मरीज में लाल चकत्ते या रैशज हो सकते हैं. डेंगू के लक्षण में तेज बुखार को सबसे ज्यादा प्रमुखता दी जाती है.

डेंगू का उपचार 

डेंगू बुखार में ऐसी किसी विशेष दवा का सेवन नहीं किया जाता है. क्योंकि अभी तक डेंगू के लिए कोई स्पेशल दवा नहीं बनाई गयी है. हां, डेंगू बुखार की वजह से होने वाली परेशानी के लिए दवा दी जाती है. डेंगू बुखार में पैरासिटामोल का इस्तेमाल किया जाता है. दर्द के लिए कोई दवा नहीं खानी चाहिए. क्योंकि दर्द की दवा की वजह से डेंगू में मरीज का प्लेटलेट्स कम होने लगता है.

डेंगू वायरस का 7 दिनों तक असर रहता है पहले के तीन दिन ज्यादा खतरनाक होते हैं. इसके लिए पहले तीन दिन विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है. डेंगू मरीज को शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना चाहिए. डेंगू का इलाज प्राकृतिक और आयुर्वेदिक इलाज के भरोसे न रहें. अगर डेंगू के लक्षण दिखाई दें तो किसी कुशल डॉक्टर से सलाह लेकर जांच करा लें.

डेंगू के घरेलू उपचार 

भारत ही नहीं हर देश में घरेलू उपचार का विशेष महत्व माना जाता है. डेंगू में भी घरेलू उपचार प्रचलित हैं. डेंगू में सबसे ज्यादा प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए खाद्य पदार्थों का सेवन बताया जाता है.

डेंगू के मरीज को कीवी फल खाना चाहिए. क्योंकि इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है. इससे प्लेटलेट्स काउंट बढ़ाने में भी आसानी होती है.

डेंगू में अन्य घरेलू उपचार भी प्रचलित हैं. इनमें नारियल पानी पीना और पपीता खाने जैसी चीजें शामिल हैं. डेंगू बुखार में असरदार घरेलू उपचार.

डेंगू बुखार में गिलोय का सेवन भी किया जाता है. गिलोय एक आयुर्वेदिक दवा है. इसका सेवन बिना किसी डॉक्टर के सलाह के नहीं करना चाहिए.

डेंगू वायरस का 7 दिन तक रहता है असर, जानें लक्षण व सावधानी.