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Written By: Anshumala | Published : July 21, 2019 1:21 PM IST
कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएडी) के लिए हृदय रोग की फैमिली हिस्ट्री एक बड़ा रिस्क फैक्टर। © Shutterstock.
आंकड़े बताते हैं कि कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD in hindi) सहित दिल की बीमारियां भारत में होने वाली सभी मौतों के 60 प्रतिशत हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं। देश में दिल की बीमारियों से होने वाली 52 प्रतिशत से अधिक मौतें 70 साल से कम उम्र के लोगों की होती हैं। इस कंडीशन के पारिवारिक इतिहास वाले लोग अधिक सेंसेटिव होते हैं। इसलिए, समय की मांग है कि स्वस्थ जीवनशैली का पालन किया जाए और समय पर चेकअप कराने के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाए।
कोरोनरी आर्टरी डिजीज या सीएडी (CAD in hindi) दिल में ऑक्सीजन युक्त रक्त के प्रवाह को प्रभावित करता है, जो समय के साथ, व्यक्ति को दिल के दौरे का जोखिम खड़ा कर सकता है। हृदय संबंधी बीमारियां लोगों के जीवन में तेजी से प्रवेश करती हैं, खासकर उनमें जो इसके लिए अतिसंवेदनशील होते हैं। समय पर रोग की पहचान और इलाज महत्वपूर्ण है। ऐसे में लोगों को कम उम्र से ही अपनी जीवनशैली में हेल्दी बदलाव शुरू करना आवश्यक है।
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मैक्स सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज (नई दिल्ली) के डायरेक्टर एवं हेड-कार्डिएक कैथ लैब डॉ. मनोज कुमार का कहना है कि जिन लोगों के परिवार में पहले से ही किसी को दिल के रोग रह चुके हैं, उनकी धमनियों में कैल्शियम बिल्ड-अप की संभावना अधिक होती है। इस प्रकार यह महत्वपूर्ण है कि वे नियमित गैप के बाद अपनी कोरोनरी आर्टरी में कैल्शियम का लेवल चेक करवाएं। कोरोनरी धमनी रोग तब होता है, जब हृदय की मांसपेशियों को रक्त पहुंचाने वाली धमनियां सख्त और संकरी हो जाती हैं। यह बिल्ड-अप कोलेस्ट्रॉल और अन्य सामग्री के कारण होता है, जिसे प्लेक या पट्टिका कहा जाता है।
यह धमनी की अंदरूनी दीवारों पर होता है और इसे कैथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है। जैसे-जैसे यह बढ़ता है, धमनियों से होकर रक्त बहना कम हो जाता है। नतीजतन, हार्ट को वह रक्त या ऑक्सीजन नहीं मिल सकता है, जिसकी उसे आवश्यकता है। इससे सीने में दर्द (एनजाइना) या दिल में दर्द हो सकता है। धमनियों में रुकावट कम उम्र में भी विकसित हो सकती है। यदि आपके परिवार में किसी को पहले से ही सीएडी है, तो आपको जोखिम कम करने के लिए कम उम्र से ही सावधानी बरतनी चाहिए।
डॉ. मनोज कुमार ने कहा, “भारतीयों में समय से पहले सीएडी होना एक अनुवांशिक गड़बड़ी के कारण हो सकता है, जिसमें लो-डेंसिटी के लिपोप्रोटीन (एलडीएल-सी) या बैड-कोलेस्ट्रॉल की अधिक मात्रा और मेटाबोलिक सिंड्रोम शामिल हैं। ऐसे में यदि किसी की लाइफस्टाइल अनहेल्दी हो तो दिल की बीमारी जल्दी लगती है और मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। यह महत्वपूर्ण है कि सीएडी और दिल की अन्य समस्याओं के जोखिम को कम करने के लिए शुरुआत से ही हेल्दी आदतें डालें।”
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इसके लिए, एंजियोप्लास्टी एक उपचार है, जिसका उपयोग खून के फ्लो को बहाल करने और सुधारने के लिए किया जाता है। एक लंबी, पतली ट्यूब (कैथेटर) को धमनी के संकरे हिस्से में डाला जाता है। खास तरह का गुब्बारा लगे एक तार को कैथेटर के माध्यम से संकरे क्षेत्र में पहुंचा दिया जाता है, फिर गुब्बारा फुलाया जाता है, जो धमनी की दीवारों पर जोर डालकर उन्हें चैड़ा करता है। एक स्टेंट अक्सर धमनी में छोड़ दिया जाता है। धमनियों को खुला रखने में मदद करने के लिए ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट डाला जाता है, जो दवा को धीरे-धीरे रक्त वाहिका में छोड़ता चलता है, ताकि आर्टरी फिर से ब्लाॅक न हो।
सीएबीजी विधि में, सर्जन शरीर के किसी अन्य हिस्से से एक वैसल लेकर कोरोनरी धमनियों को बायपास करने के लिए उससे एक ग्राफ्ट बनाता है। यह ब्लाॅक हो चुकी या संकरी कोरोनरी आर्टरी के आसपास खून के फ्लो को बरकरार रखता है।
- कम वसा एवं हाई फाइबर युक्त आहार (जैसे ताजे फल, सब्जियां और साबुत अनाज) का सेवन करें। नमक की खपत दिन में 6 ग्राम से अधिक न करें।
- हेल्दी वेट के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें। व्यायाम से हार्ट को रक्त संचार बढ़ाने में मदद मिलेगी, कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम होगा और ब्लड प्रेशर ठीक रहेगा।
- धूम्रपान सीएडी के लिए प्रमुख रिस्क फैक्टर्स में से एक है और इससे बचा जाना चाहिए। शराब का सेवन कम करना जरूरी है।
- ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर आदि को नियंत्रण में रखें।