
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Written By: Anju Rawat | Updated : January 30, 2026 1:56 PM IST
Medically Verified By: Dr. Meena J.
Vaccination in Kids: वैक्सीनेशन एक ऐसा महत्वपूर्ण कदम है, जो बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाता है और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाता है। वैक्सीनेशन को बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने का पहला कदम माना जाता है। डॉ. मीना बताती हैं कि वैक्सीनेशन की शुरुआत जन्म के तुरंत बाद से ही हो जाती है। बच्चों में वैक्सीनेशन की यह प्रक्रिया लगभग 5 से 6 साल तक चलती रहती है। इस उम्र के बीच बच्चों को विभिन्न प्रकार की बीमारियों से लड़ने के लिए वैक्सीन लगाई जाती है। बच्चों के शरीर को बीमारियों और संक्रमणों से लड़ने के लिए तैयार किया जाता है। आइए,आकाश हेल्थकेयर की सीनियर कंसल्टेंट-बाल रोग एवं नवजात शिशु विज्ञान डॉ. मीना जे. से जानते हैं कि उम्र के अनुसार कौन-सी वैक्सीन कब लगाई जाती है?
डॉ. मीना बताती हैं, "टीकाकरण की शुरुआत जन्म के तुरंत बाद से ही हो जाती है। जन्म के समय बच्चे को बीसीजी (BCG), ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) और हेपेटाइटिस-बी की पहली खुराक दी जाती है। बीसीजी वैक्सीन, टीबी जैसी गंभीर बीमारी से बचाती है। वहीं, पोलियो वैक्सीन बच्चे को आजीवन विकलांगता से और हेपेटाइटिस-बी लिवर से जुड़ी गंभीर समस्याओं से बचाती है। बच्चे के भविष्य को बीमारी मुक्त बनाने के लिए ये वैक्सीन लगवाने बहुत जरूरी होते हैं।

आपको बता दें कि 6, 10 और 14 हफ्ते की उम्र में बच्चों को पेंटावैलेंट वैक्सीन दी जाती है। यह वैक्सीन डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनस, हेपेटाइटिस-बी और हिब (Haemophilus influenzae type b) जैसी बीमारियों से बचाती है।
इसके साथ ही, इस उम्र के बच्चों को रोटावायरस वैक्सीन (डायरिया से बचाव), पोलियो ड्रॉप्स और पीसीवी (निमोनिया से बचाव) भी दी जाती हैं। ये वैक्सीन बच्चों की इम्युनिटी को मजबूत करने में मदद करते हैं और कई रोगों से बचाते हैं।
9 महीने की उम्र में बच्चों को एमआर वैक्सीन (Measles Rubella) लगाई जाती है। यह वैक्सीन खसरा और रूबेला नामक बीमारियों से बचाती है। आपको बता दें कि खसरा एक बेहद संक्रामक बीमारी है। यह बीमारी निमोनिया, कुपोषण और मृत्यु का कारण भी बन सकती है। वहीं, रूबेला गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक होता है।
वहीं, 12 महीने के आसपास बच्चों को हेपेटाइटिस-ए, टायफाइड और वेरिसेला (चिकनपॉक्स) जैसी वैक्सीन भी दी जाती हैं। ये वैक्सीन बच्चों को गंभीर संक्रमणों से बचाती हैं।
| उम्र | वैक्सीन | काम |
| 6 से 14 सप्ताह | पेंटावैलेंट वैक्सीन | काली खांसी, टिटनस, हेपेटाइटिस-बी और हिब जैसी बीमारियों से बचाव |
| 9 महीने से 1 साल | एमआर वैक्सीन | खसरा और रूबेला नामक बीमारियों से बचाव |
| 16 महीने से 2 साल | पेंटावैलेंट, पोलियो, एमआर वैक्सीन बूस्टर | इम्यूनिटी को लंबे समय तक बनाए रखना |
| 5 से 6 साल | डीपीटी बूस्टर | बच्चों में संक्रमण का खतरा कम करना |
इस उम्र के बच्चों को पेंटावैलेंट, पोलियो, एमआर वैक्सीन और डीपीटी की बूस्टर डोज दी जाती है। बूस्टर डोज इसलिए जरूरी होती है, ताकि पहले से बनी इम्युनिटी लंबे समय तक बनी रहे और कमजोर न पड़े।
5 से 6 साल की उम्र में डीपीटी (Diphtheria)बूस्टर दी जाती है। यह बच्चों की डिप्थीरिया, टिटनस और काली खांसी से बचाव करने के लिए लगाई जाती है। यह स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। क्योंकि, इस उम्र में बच्चों में संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है।

वैक्सीन शरीर को बीमारी से लड़ना सिखाती है। यह न सिर्फ बच्चे को सुरक्षित रखती हैं, बल्कि इम्युनिटी को भी मजबूत बनाती है और कई तरह के संक्रमणों से बचाती है।
6 साल की उम्र तक पूरा वैक्सीनेशन बच्चे के स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव है। माता-पिता को बच्चे के वैक्सीनेशन शेड्यूल का पालन करना चाहिए और डॉक्टर द्वारा बताए गए सभी वैक्सीन जरूर लगवाने चाहिए।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।